CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1

CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1

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CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1

Board CBSE
Class 10
Subject Social Science
Sample Paper Set Paper 1
Category CBSE Sample Papers

Students who are going to appear for CBSE Class 10 Examinations are advised to practice the CBSE sample papers given here which is designed as per the latest Syllabus and marking scheme as prescribed by the CBSE is given here. Paper 1 of Solved CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium is given below with free PDF download Answers.

समय : 3 घण्टे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न-पत्र में कुल 26 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सामने दिए गए हैं।
  • प्रश्न संख्या 1 से 7 अति लघु-उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
  • प्रश्न संख्या 8 से 18 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। इनमें से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 80 शब्दों से अधिक का नहीं होना चाहिए।
  • प्रश्न संख्या 19 से 25 तक प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। इनमें से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100 शब्दों से अधिक का नहीं होना चाहिए।
  • प्रश्न संख्या 26 मानचित्र से सम्बंधित है। इसके दो भाग हैं 26(A) और 26(B) / 26(A) 2 अंक का इतिहास से तथा 26(B) 3 अंक का भूगोल से है। मानचित्र का प्रश्न पूर्ण होने पर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी करें।
  • पूर्ण प्रश्न-पत्र में विकल्प नहीं हैं। फिर भी कई प्रश्नों में आंतरिक विकल्प हैं। ऐसे सभी प्रश्नों में से प्रत्येक से आपको एक ही विकल्प हल करना है।

प्र०1.
सर्वप्रथम मुद्रण तकनीक का आविष्कार कहाँ हुआ? 1
अथवा
उपन्यास सबसे पहले किस भाषा में लिखे गए थे? 1

प्र०2.
भारत में किस मृदा का सर्वाधिक विस्तार मिलता है? 1

प्र०3.
श्रम का लैंगिक विभाजन से क्या अभिप्राय है? 1

प्र०4.
मिली-जुली सरकार किसे कहते हैं? 1

प्र०5.
बैंक अपने पास जमा धन का क्या करते हैं? 1

प्र०6.
सतत् पोषणीय विकास का क्या अर्थ है? 1

प्र०7.
यदि किसी उपभोक्ता को बाज़ार में शोषण होता है, तो उसे किस न्यायालय में मुकद्दमा दायर करना चाहिए? 1

प्र०8.
डब्लू०टी०ओ० या विश्व व्यापार संगठन की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी? 3
अथवा
भारतीय उद्योगों पर प्रथम विश्व युद्ध के क्या परिणाम हुए? 3
अथवा
19वीं सदी के मध्य में ब्रिटेन के श्रमिकों की जीवनशैली का उल्लेख कीजिए। 3

प्र०9.
असहयोग आंदोलन शहरों में धीरे-धीरे धीमा क्यों पड़ने लगा? कोई तीन कारण स्पष्ट कीजिए। (3 x 1 = 3)

प्र०10.
मुद्रण का भारतीय महिलाओं के जीवन पर क्या प्रभाव हुआ? इसका विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत कीजिए? 3
अथवा
उपन्यासों की लोकप्रियता किन कारणों से बढ़ी? स्पष्ट कीजिए। 3

प्र०11.
नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट कीजिए कि यह उपनिवेशवाद के ख़िलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था। 3

प्र०12.
भारत की किन्हीं तीन लौह-अयस्क की प्रमुख पेटियों का उल्लेख कीजिए। सबसे दक्षिणी लौह-अयस्क की पेटी की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए। (1\(\frac { 1 }{ 2 }\) + 1\(\frac { 1 }{ 2 }\) = 3)

प्र०13.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं? पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाने चाहिएँ? (3 x 1 = 3)

प्र०14.
भारत में राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को सुधारने के विभिन्न संवैधानिक प्राधिकरणों द्वारा उठाए गए तीन उपायों को स्पष्ट कीजिए। 3

प्र०15.
लोकतंत्र में सामाजिक विभाजन के दो लाभ और दो नुकसान बताइए। 3

प्र०16.
लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी, ज़िम्मेदार और वैध सरकार का गठन करता है? 3

प्र०17.
भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिए सरकार द्वारा किन कानूनी मानदंडों को लागू किया गया है? 3

प्र०18.
प्रच्छन्न बेरोजगारी किसे कहते है? प्रच्छन्न बेरोज़गारी और छिपी बेरोज़गारी के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। 3

प्र०19.
“नेपोलियन ने नि:स्संदेह फ्रांस में लोकतंत्र को नष्ट किया था, परन्तु प्रशासनिक क्षेत्र में उसने क्रांतिकारी सिद्धांतों का समावेश किया था, ताकि पूरी व्यवस्था अधिक तर्कसंगत और कुशल बन सके।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। 5
अथवा
“वियतनाम के बंटवारे से पूरा देश युद्ध के मोर्चे में तब्दील होकर रह गया।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। 5

प्र०20.
गैर-पंरपरागत ऊर्जा के साधनों के प्रयोग को अधिक महत्त्व क्यों दिया जा रहा है? व्याख्या कीजिए। 5

प्र०21.
रोपण कृषि किसे कहते है? रोपण कृषि की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (1 + 4 = 5)

प्र०22.
केन्द्र सरकारों और राज्य सरकारों के बीच तीन स्तरों में विभाजित विधायी अधिकारों का वर्णन कीजिए। यदि कोई विषय इन तीन स्तरों की सूचियों के अंतर्गत नहीं आता तो वह किस सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है? 5

प्र०23.
“सैद्धांतिक रूप में लोकतंत्र को अच्छा माना जाता है, परन्तु व्यवहार में इसे इतना अच्छा नहीं माना जाता।” इस कथन की पुष्टि तर्क सहित कीजिए। 5

प्र०24.
‘वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।’ इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए। 5

प्र० 25.
ऋण क्या है? सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल ऋण देश के विकास के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? चार | कारण स्पष्ट कीजिए। (1 + 4 = 5)

प्र०26.
(A) भारत के दिए गए राजनीतिक रेखा-मानचित्र पर-
पहचानिए : (a) से अंकित किया गया एक स्थान, जहाँ पर किसानों का सत्याग्रह आंदोलन हुआ। 1
पता लगाकर चिन्हित कीजिए : (b) वह स्थान, जहाँ 1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन हुआ। 1
CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1 Q26
(B) भारत के दिए गए राजनीतिक रेखा-मानचित्र पर-
पहचानिए :
(c) से अंकित किया गया एक प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र। (1 x 1 = 1)
पता लगाकर चिन्हित कीजिए।
(i) मदुरई : सूती कपड़ा उद्योग
(ii) राणा प्रताप सागर बांध (1 + 1 = 2)
CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1 Q26.1
नोटः निम्नलिखित प्रश्न केवल दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए प्रश्न संख्या 26 के स्थान पर हैं : (5 x 1 = 5)
(a) उस स्थान का नाम बताइए जहाँ 1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था।
(b) उस स्थान का नाम बताइए जहाँ किसानों का सत्याग्रह हुआ था।
(c) भारत के एक प्रमुख जूट उत्पादक राज्य का नाम बताइए।
(d) मदुरई सूती कपड़ा उद्योग कौन से राज्य में स्थित है?
(e) उस राज्य का नाम बताइए जहाँ राणा प्रताप सागर बांध स्थित है।

Answers

उत्तर 1.
चीन
अथवा
बंगाली और मराठी।

उत्तर 2.
भारत में जलोढ़ मृदा का विस्तार सबसे अधिक है।

उत्तर 3.
काम के विभाजन का वह तरीका जिसमें घर के अंदर के सभी कार्य महिलाएँ करती हैं या नौकर-नौकरानियाँ तथा घर से बाहर के सभी कार्य पुरुष करते हैं।

उत्तर 4.
जब विधानमंडल में किसी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं होता तब कई दल मिल कर सरकार का गठन करते हैं तो उसे मिली-जुली सरकार कहते हैं।

उत्तर 5.
बैंक अपने पास जमा धन को ऋण के इच्छुक व्यक्तियों को ऋण के रूप में प्रदान करते हैं।

उत्तर 6.
आर्थिक विकास की वह रणनीति जिसमें भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं को, प्रकृति को बिना हानि पहुँचाए, पूरा किया जाता है, सतत् पोषणीय विकास कहलाता है अर्थात् प्रकृति का कम दोहन कर विकास करना सतत्
पोषणीय विकास है।

उत्तर 7.
उपभोक्ता अदालत।

उत्तर 8.
डब्लू०टी०ओ० की स्थापना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी नियमों को संचालित करने के उद्देश्य से की गई थी। इसकी स्थापना 1 फरवरी, 1995 में की गई और इसका मुख्यालय जिनेवा में है। डब्लू०टी०ओ० या विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को संगठित करना।
  • सभी राष्ट्रों के हितों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए नियम बनाना।
  • विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते करवाना और निष्पक्षता पर ध्यान रखना।

अथवा
प्रथम विश्व युद्ध से भारतीय उद्योगों को अनेक कारणों से प्रोत्साहन मिला :

  • ब्रिटिश कारखाने सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए युद्ध-संबंधी उत्पादन में व्यस्त हो गए, इससे भारत में वास्तविक रूप से सारे आयात बंद हो गए।
  • भारतीय कारखानों को अचानक घरेलू बाजार के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ उत्पादित करने का अवसर मिल गया।
  • भारतीय कारखानों में भी फौज के लिए जूट की बोरियाँ, फौजियों की वर्दी, टैंट, चमड़े के जूते. घोडे तथा खच्चरों के लिए जीन तथा अन्य बहुत सारे सैन्य उत्पाद तैयार होने लगे।
  • कारखानों में उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पालियों में काम किया जाने लगा।
  • बहुत सारे नए मजदूरों को काम पर रखा गया। इतना ही नहीं, अधिक उत्पादन के लिए प्रत्येक मजदूर को पहले से अधिक काम करना पड़ता था।
    यही कारण था कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय औद्योगिक उत्पादन बढ़ गया।

अथवा
19वीं सदी के मध्य में ब्रिटेन के श्रमिकों की जीवनशैली :

  • अधिकतर कारखानों में श्रमिकों की माँग मौसमी थी।
  • श्रमिकों को बहुत कम वेतन मिलता था।
  • कारखानों में बड़ी संख्या में महिलाएँ काम करती थीं।
  • अधिकतर श्रमिक गंदी बस्तियों में रहते थे। कारखाना मालिकों ने अप्रवासी श्रमिकों को घर उपलब्ध नहीं कराए थे।
  • गरीब श्रमिकों के लिए टीन की छतें आराम, आनंद और मनोरंजन की जगह थी।

उत्तर 9.
असहयोग आन्दोलन के शहरों में धीमी पड़ने के कारण:

  1. हाथ से बना खादी का कपड़ा मिलों में भारी मात्रा में बनने वाले कपड़े के मुकाबले में प्रायः महँगा होता था और गरीब लोग उसे खरीद नहीं सकते थे। अतः वे मिलों के कपड़े का लंबे समय तक बहिष्कार नहीं कर सकते थे।
  2. ब्रिटिश संस्थानों के बहिष्कार से भी समस्या पैदा हो गई थी। आंदोलन की सफलता के लिए वैकल्पिक . भारतीय संस्थानों की स्थापना आवश्यक थी ताकि ब्रिटिश संस्थानों के स्थान पर उनका प्रयोग किया जा सके। परन्तु वैकल्पिक संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया धीमी थी। फलस्वरूप विद्यार्थी और शिक्षक सरकारी स्कूलों में लौटने लगे और वकील दोबारा सरकारी अदालतों में दिखाई देने लगे।
  3. काउंसिल के चुनावों का भी सभी वर्गों ने बहिष्कार नहीं किया था। मद्रास की जस्टिस पार्टी ने काउंसिल चुनावों में भाग लिया।

उत्तर 10.

  1. लेखकों ने महिलाओं के जीवन और भावनाओं के बारे में लिखना शुरू किया और इससे महिला विचारको की संख्या बढ़ी।
  2. महिला लेखकों ने अपनी आत्मकथाएँ लिखीं। उन्होने महिलाओं की अज्ञानता, कठोर घरेलु कार्यों और उनकी शोचनीय दशा के बारे में भी लिखा।
  3. हिन्दू लेखकों का बड़ा वर्ग महिलाओं की शिक्षा के प्रति समर्पित था।
  4. 19वीं सदी के प्रारंभ में महिला लेखकों द्वारा लिखी पत्रिकाओं को बहुत लोकप्रियता मिली जिनमें महिलाओं की शिक्षा, वैधव्य तथा विधवाओं के पुनर्विवाह के बारे में विचार किया गया था।
  5. अनेक लेखकों ने प्रकाशित किया कि महिलाओं को आज्ञाकारी पत्नियाँ बनने के लिए कैसे शिक्षा दी जानी चाहिए।

अथवा
उपन्यासों की बढ़ती लोकप्रियता के कई कारण थे। उपन्यासों में रची जा रही दुनिया विश्वसनीय और दिलचस्प थी, और सच लगती थी। उपन्यास पढ़ते हुए पाठक किसी और दुनिया में पहुँच जाता था और संसार को किताब के चरित्र की नज़र से देखने लगता था। इन्हें अकेले भी पढ़ा जा सकता था और दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ मिल-बैठ-बोल कर भी इस पर चर्चा की जा सकती थी। देहाती क्षेत्रों में लोग अकसर इकट्ठा होकर उपन्यासों को बड़े गौर से पढ़ते हुए व सुनते देखे जा सकते थे।

उत्तर 11.
नमक एक ऐसी वस्तु है जिसे अमीर-गरीब सभी इस्तेमाल करते हैं। यह भोजन का एक अभिन्न अंग है। इसलिए नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी कर प्रणाली को महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन का सबसे दमनकारी पहलू बताया।
महात्मा गाँधी ने अपने 78 विश्वस्त साथियों के साथ नमक यात्रा शुरू की। यह यात्रा गुजरात के साबरमती में स्थित गाँधीजी के आश्रम से आरंभ होकर 240 किलोमीटर दूर दांडी नामक गुजरात के तटीय कस्बे में जाकर खत्म होनी थी। गाँधीजी की टोली ने 24 दिन तक प्रतिदिन लगभग 10 मील का सफर तय किया। 6 अप्रैल, 1930 को वह दांडी पहुँचे और उन्होंने समुद्र का पानी उबालकर नमक बनाना शुरू कर दिया जो कानून का उल्लंघन था। इस बार लोगों को न केवल ब्रिटिश शासन का सहयोग न करने के लिए बल्कि औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन करने के लिए आह्वान किया गया था। अत: कहा जा सकता है कि यह घटना ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक थी।

उत्तर 12.
भारत में लौह-अयस्क की प्रमुख पेटियाँ निम्नलिखित हैं:

  • उड़ीसा-झारखण्ड पेटी- उड़ीसा में उच्चकोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह-अयस्क मयूरभंज व केंदूझर जिलों में बादाम पहाड़ खदानों से निकाला जाता है।
  • दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी- यह पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों के अंतर्गत पाई जाती है। यहाँ अति उत्तम किस्म का हेमेटाइट पाया जाता है।
  • महाराष्ट्र-गोआ पेटी- यह पेटी गोआ तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित है।

सबसे दक्षिणी लौह-अयस्क की पेटी बेलारी-चित्रदुर्ग, चिकमंगलूर-तुमकुर है।
इसकी विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं:

  • कर्नाटक की इस पेटी में लौह-अयस्क की बड़ी राशि संचित है।
  • कुद्रेमुख की खानें शत-प्रतिशत निर्यात इकाई हैं।
  • कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने जाते हैं।

उत्तर 13.
मृदा के कटाव व इसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहा जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिएँ:

  1. पहाड़ी क्षेत्रों में ढाल वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के समानांतर हल चलाने से ढाल के साथ जल बहाव की गति घटती है।
  2. ढाल वाली भूमि पर सोपान बनाए जा सकते हैं। सोपान कृषि अपरदन को नियंत्रित करते हैं। पश्चिमी और मध्य हिमाचल में सोपान अथवा सीढ़ीदार कृषि काफी विकसित है।
  3. फसलों के बीच में घास की पट्टियाँ उगाई जाती हैं। ये पवनों द्वारा जनित बल को कमजोर करती हैं। इस तरीके की कृषि को पट्टी कृषि कहते हैं।
  4. पेड़ों को कतारों में लगाकर रक्षक मेखला बनाना भी पवनों की गति कम करता है। इन रक्षक पट्टियों का पश्चिमी भारत में रेत के टीलों के स्थायीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

उत्तर 14.
राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को सुधारने हेतु विभिन्न संवैधानिक प्राधिकरणों द्वारा दिए गए निम्नलिखित सुझाव/उपाय उपयोगी सिद्ध हुए हैं:

  1. विधायकों और सांसदों को दल-बदल करने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया है। इस कानून के अनुसार दल बदलने वाले सांसद या विधायक को अब अपनी सीट भी गॅवानी होगी।
  2. उच्चतम न्यायालय ने राजनीति में पैसे और अपराधियों का प्रभाव कम करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के अनुसार चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी चल-अचल संपत्ति और अपने विरुद्ध चल रहे सभी आपराधिक मामलों का ब्यौरा चुनाव आयोग को एक शपथपत्र के माध्यम से देना अनिवार्य कर दिया है।
  3. चुनाव आयोग ने एक आदेश द्वारा सभी दलों के लिए सांगठनिक चुनाव कराना और आयकर की रिटर्न भरना अनिवार्य बना दिया है।

उत्तर 15.
लोकतंत्र में सामाजिक विभाजन के लाभ :

  1. सामाजिक विभाजन की राजनीति का भाव बहुत सामान्य और स्वस्थ हो सकता है। यह विभिन्न वंचित और सीमांत सामाजिक समूहों को अपनी शिकायतों को व्यक्त करने और सरकारी कामों में भाग लेने के लिए अनुमति देता है। यह एक स्वस्थ राजनीति का लक्षण भी हो सकता है। राजनीति में विभिन्न प्रकार के सामाजिक विभाजनों की अभिव्यक्ति ऐसे विभाजनों के बीच संतुलन पैदा करने का काम भी करती है।
  2. राजनीति में सामाजिक विभाजन के अंतर्गत यह भी देखा गया है कि यदि सरकार सभी समूहों के साथ सत्ता की साझेदारी करने के प्रयास करती है, यहाँ तक कि अल्पसंख्यकों के साथ भी, तो यह देश की राजनीति के लिए लाभप्रद ही है।

लोकतंत्र में सामाजिक विभाजन के नुकसान :

  1. कई बार सामाजिक असमानताएँ इतनी ज्यादा गैर-बराबरी और अन्याय वाली होती हैं कि उनको स्वीकार करना अंसभव है। ऐसे गैर-बराबरी और अन्याय के ख़िलाफ होने वाले संघर्ष कई बार हिंसा का रास्ता भी अपना लेते हैं और दल ही शासन के ख़िलाफ उठ खड़े होते हैं।
  2. लोकतंत्र में सामाजिक विभाजन के कारण राजनीति में कई विभिन्नताएँ आ जाती हैं। सभी सामाजिक समूह भिन्न-भिन्न समुदायों से संबंधित होते हैं तथा इसके चलते राजनीति में सामंजस्य बैठाना काफी मुश्किल होता है।

उत्तर 16.
लोकतंत्र एक उत्तरदायी, ज़िम्मेदार और वैध सरकार का गठन निम्न प्रकार करता है:

  1. लोकतंत्र नियमित, स्वतंत्र तथा निष्पक्ष ढंग से चुनाव संपन्न कराता है। यह शासन पद्धति सरकार की नीतियों के विषय में तथा उसकी कार्यशैली के विषय में जानने के लिए जनता को सूचना का अधिकार’ प्रदान करती है।
  2. लोकतांत्रिक सरकार नागरिकों को चुनाव प्रक्रिया में हिस्सेदार बना कर स्वयं को उनके प्रति उत्तरदायी बनाने वाली कार्यविधि विकसित करती है।
  3. लोकतंत्र एक वैध सरकार का निर्माण करता है क्योंकि यह जनता ही होती है जो अपने द्वारा चुने गए। प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार बनाकर स्वयं के ऊपर शासन करवाती है।
  4. लोकतांत्रिक सरकार देश के प्रति उत्तरदायी होती है। यह जनता की आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करती रहती है।

उत्तर 17.
सरकार द्वारा इस दिशा में कई कानूनी मानदंड लागू किए गए जिनमें उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 प्रमुख है।
इसके प्रमुख कानूनी मानदंड निम्नलिखित हैं:

  • उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम कुछ विशिष्ट वस्तुओं को छोड़कर शेष सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर लागू होता है।
  • इसके अन्तर्गत सभी आर्थिक क्षेत्रक आते हैं।
  • इस अधिनियम के प्रावधान क्षतिपूरक, संरक्षणात्मक और दण्डात्मक प्रकृति के हैं।
  • यह उपभोक्ताओं के सभी अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
  • इसके अन्तर्गत जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरों पर उपभोक्ता सुरक्षा परिषदों की स्थापना की गई है।
  • उपभोक्ता विवादों का सरल, शीघ्र और सस्ता निपटारा करने के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र की स्थापना की गई है।

उत्तर 18.
प्रच्छन्न बेरोजगारी से अभिप्राय ऐसी बेरोजगारी से है जिसमें शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति जो कार्य कर रहा होता है उसे उस कार्य से यदि हटा भी दिया जाए तो उत्पादकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रच्छन्न बेरोज़गारी और छिपी बेरोज़गारी के बीच अंतर:
CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1 S18

उत्तर 19.
नेपोलियन ने अपने शासन वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक क्षेत्र को अधिक तर्कसंगत एवं कुशल बनाने हेतु निम्नलिखित क्रांतिकारी परिवर्तन किए:

  1. 1804 की नागरिक संहिता, जिसे आमतौर पर नेपोलियन की संहिता के नाम से जाना जाता है, ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए।
  2. उसने कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।
  3. डचे गणतंत्र, स्विट्ज़रलैंड, इटली और जर्मनी में नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया।
  4. नेपोलियन ने सामंती व्यवस्था को समाप्त किया और किसानों को भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई।
  5. शहरों में भी कारीगरों के श्रेणी-संघों पर लगे नियंत्रणों को हटा लिया गया। यातायात और संचार-व्यवस्थाओं को भी सुधारा गया।

अथवा
बंटवारे से पूरा वियतनाम युद्ध के मोर्चे में तब्दील होकर रह गया। देश की आम जनता आपस में ही गुटों में बंटकर एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ी हो गई थी। आपसी संघर्ष से सार्वजनिक संपत्ति तथा पर्यावरण का बहुत अधिक नुकसान हो रहा था। कुछ समय पश्चात् न्गो दिन्ह दिएम के नेतृत्व में हुए तख्तापलट में बाओ डाई को गद्दी से हटा दिया गया तथा दिएम की अगुवाई में एक और दमनकारी व निरंकुश शासन की स्थापना हुई। दिएम का विरोध करने वालों को कम्युनिस्ट कहकर जेलों में डाल दिया जाता था अथवा मार दिया जाता था। दिएम ने अध्यादेश 10 को लागू रहने दिया जिसके अनुसार ईसाई धर्म को मान्य करार दिया गया तथा बौद्ध धर्म को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। फलस्वरूप दिएम के तानाशाही शासन के विरोध में नैशनल लिबरेशन फ्रंट (एन०एल०एफ०) के नाम से एक व्यापक मोर्चा बनाया गया।

उत्तर 20.
ऊर्जा के बढ़ते उपभोग ने देश को कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर कर दिया है। गैस व तेल की बढ़ती कीमतों तथा इनकी संभाव्य कमी ने भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितताएँ उत्पन्न कर दी हैं। ऊर्जा के गैर-परंपरागत साधनों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त जीवाश्मी ईंधनों का प्रयोग गम्भीर पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न करता है। अतः नवीकरण योग्य ऊर्जा संसाधनों, जैसे-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जैविक ऊर्जा तथा अवशिष्ट पदार्थ-जनित ऊर्जा के उपयोग की बहुत आवश्यकता है। इनके उपयोग से पर्यावरण को कोई हानि नहीं होती तथा इनका निकट भविष्य में समाप्त होने का भी कोई खतरा नहीं है। ये ऊर्जा के गैर-परंपरागत साधन कहलाते हैं।

उत्तर 21.
वह वाणिज्यिक कृषि, जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है तथा इसको अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से व्यापक क्षेत्र पर उगाया जाता है, रोपण कृषि कहलाती है।
रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. रोपण कृषि वाणिज्यिक खेती है क्योंकि इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है।
  2. रोपण कृषि में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है।
  3. रोपण कृषि, उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ है। रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में की जाती है जो अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है।
  4. भारत में चाय तथा कॉफी, रबड़, केला इत्यादि महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें हैं। असम और उत्तरी बंगाल में चाय तथा कर्नाटक में कॉफी, वहाँ की मुख्य रोपण फसलें हैं।

उत्तर 22.
संविधान में केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को तीन सूचियों में विभाजित किया गया है।
ये तीन सूचियाँ हैं-
(i) संघ सूची;
(ii) राज्य सूची तथा
(iii) समवर्ती सूची।
CBSE Sample Papers for Class 10 Social Science in Hindi Medium Paper 1 S22
यदि कोई विषय इन तीन स्तरों की सूचियों के अंतर्गत नहीं आता तो वह केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में चला जाता है। जैसे-कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर जैसे विषय, क्योंकि ये संविधान के बनने के बाद उजागर हुए विषय हैं।

उत्तर 23.
लोकतंत्र को प्रत्येक बीमारी की दवा मान लिया जाता है और इस शासन व्यवस्था द्वारा हर समस्या के सुलझाने की उम्मीद सभी लोग करने लगते हैं। लोकतंत्र के प्रति अपनी दिलचस्पी और इसकी विशेषताओं के आधार पर आमतौर पर यह कहा जाता है कि लोकतंत्र सभी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं का समाधान कर सकता है परंतु जब हमारी कुछ उम्मीदें पूरी नहीं होतीं तो हमें लोकतांत्रिक अवधारणा दोषपूर्ण लगने लगती है।
परंतु सत्य तो यह है कि लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है और यह स्वरूप लक्ष्यों को प्राप्त करने की स्थितियाँ तो बना सकता है परंतु स्थितियों का लाभ उठाकर अपने लक्ष्यों को किस प्रकार प्राप्त करना है-यह उपाय नागरिकों को ही करना होता है।

उत्तर 24.
उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है। देसी और विदेशी कंपनियों की प्रतियोगिता से उपभोक्ताओं को लाभ हुआ, उन्हें अधिक विकल्प मिलने लगे। परंतु दूसरी ओर इस प्रतियोगिता में निचले मध्यम दर्जे के उद्योग पिसकर रह गये और उनकी इकाइयाँ बंद हो गई, जिससे वहाँ काम कर रहे श्रमिकों के हाथों से रोजगार भी जाता रहा। जहाँ एक ओर तो श्रमिकों को बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ठेके प्रथा के अनुसार रखकर उन्हें उनका पूरा अधिकार अथवा पूरी सुविधाएँ नहीं देती हैं, वहीं दूसरी ओर पढ़े-लिखे वर्गों के लिए भी नए रोज़गारों का सृजन हुआ है। अतः स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।

उत्तर 25.
ऋण से अभिप्राय उधार लेने से है। यह ऋण देने वाले (ऋणदाता) और ऋण लेने वाले के बीच एक सहमति है जिसमें ऋणदाता अदायगी की शर्तों के अनुसार धन, वस्तु अथवा सेवाओं को ऋणस्वरूप देकर ऋण लेने वाले से भविष्य में ऋण अदायगी का वादा लेता है।
सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल ऋण देश के विकास के लिए निम्न कारणों से महत्त्वपूर्ण है :

  • सस्ते और सामर्थ्य के अनुकूल ऋण द्वारा लोगों की आय बढ़ सकेगी जिसके परिणामस्वरूप बहुत से लोग अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सस्ता ऋण ले सकेंगे।
  • सस्ते ऋण द्वारा किसान उत्तम किस्म के बीजों तथा आधुनिक कृषि उपकरणों को खरीद सकते हैं तथा इनके उपयोग से अच्छी फसल उगा सकते हैं।
  • ऋण सस्ता होने से छोटे व्यवसायी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ा सकते हैं तथा नवीन उद्योगों में भी धन निवेश कर सकते हैं। इसके साथ-साथ सस्ते तथा सामर्थ्य अनुकूल ऋण कुटीर तथा अन्य
    गृह उद्योगों के लिए वरदान सिद्ध हो सकते हैं।
  • कुछ लोग बीमारियों अथवा शादी-ब्याह के लिए भी ऋण लेते हैं।

उत्तर 26.
(a) मद्रास
(b) खेड़ा (गुजरात)
(c) ओडिशा
(d) तमिलनाडु
(e) मध्य प्रदेश

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