Practicing with Malhar Hindi Book Class 7 Solutions Chapter 7 वर्षा बहार कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 7 Hindi Chapter 7 Question Answer वर्षा बहार
NCERT Class 7th Hindi Chapter 7 वर्षा बहार Question Answer
कक्षा 7 हिंदी पाठ 7 प्रश्न उत्तर – Class 7 Hindi वर्षा बहार Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा
(*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1.
इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर-कर आता है?
- दु:ख और निराशा
- आनंद और प्रसन्नता (*)
- भय और चिंता
- क्रोध और विरोध
प्रश्न 2.
‘नभ में छटा अनूठी’ और ‘घनघोर छा रही है’ पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
- बादलों के घिरने का दृश्य (*)
- बिजली के गिरने का दृश्य
- ठंडी हवा के बहने का दृश्य
- आमोद हा जाने का दृश्य
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प्रश्न 3.
कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है, क्योंकि
- कवि वर्षा को विशेष ॠतु मानता है।
- वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
- वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
- वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है। (*)
प्रश्न 4.
“सारे जगत की शोषा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
- प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
- वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है। (*)
- बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोमा बढ़ती है।
- हमें वर्षा ॠतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साधियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर :
कविता में बर्षा ॠशुतु के आगमन से सभी जीव-जंतु, पेड-पौधे और मनुष्य आनंदित होते दिखाई देते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसका मुख्य भाव ‘आनद और प्रसन्नता’ है। ‘नभ में छटा अनूठी’ और ‘घनघोर छा रही है’ पंक्तियाँ बादलों के घिरने और वर्षा पूर्व दृश्य को दर्शाती हैं। वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है, क्योकि वह एक अनोखी प्राकृतिक घटना है, जो जीवन में नई ऊर्जा और सुंदरता लाती है। इसी तरह “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” यह दर्शाता है कि वर्षा पृथ्वी पर जीवन और हरियाली का मुख्य स्रोत है।
पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पड़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए
(क) “फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में वर्षा ऋतु के आगमन पर खुशी और उत्साह का भाव व्यक्त हो रहा है। प्रीष्म की गर्मी से राहत पाकर लाखों पक्षी वन में घूम रहे हैं और मोर अपने सुंदर पंखों को फैलाकर नृत्य कर रहे हैं। यह दृश्य प्रकृति में उल्लास और सौंदर्य का प्रतीक है।
(ख) ”चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर गाते हैं गीत कैसे लेते किसान मनहर।”
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने वर्षा ऋतु की सुंदरता और उसके प्रभाव को दर्शाया है। वर्षा के कारण हंस सुंदर कतार बनाकर उड़ते या चलते नजर आ रहे हैं, जो देखने में बहुत ही मनमोहक दृश्य होता है। वहीं दूसरी ओर, किसान भी वर्षा से प्रसन्न होकर मधुर और आनंददायक गीत गा रहे है। वर्षा उनके लिए खुशहाली और फसल की उम्मीद लेकर आती है, इसलिए वे उल्लासित होकर मन को भाने वाले गीत गाते हैं।
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मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ $I$ में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ II में दिए गए हैं। स्तंभ I की पंक्तियों का स्तंभ II की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए

उत्तर :
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं | (2) वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। |
| 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | (6) ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं। |
| 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते | (1) वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं । |
| 4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते | (3) वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। |
| 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | (5) वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुंगध और ताजगी फैला रहे हैं। |
| 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | (4) हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। |
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए

(क) कविता में कौन-कौन गींत गा रहे हैं और क्यों?
उत्तर :
कविता में मेंढक, मालिनें (बागों की रखावाली करने वाली स्त्रियाँ) और किसान गीत गा रहे हैं। मालिनें बागों में सुंदर गीत गा रही हैं, क्योकि वर्षा ऋतु ने वातावरण को आनंदमय बना दिया है। किसान भी वर्षा से प्रसन्न होकर मन को मोहने वाले मधुर गीत गा रहे हैं, क्योंकि वर्षा उनके लिए खेती और खुशहाली का संदेश लेकर आती है।
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(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं”
“तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” दी गई दोनों पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इनमें वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
इन दोनों पंक्तियों में वर्षा ऋतु के दो अलग-अलग दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। पहली पंक्ति में वर्षा के पहले का दृश्य है, जहाँ आकाश में बिजली चमकती है और बादल गरजते हैं, जो वर्षा के आगमन की सूचना देते हैं। दूसरी पंक्ति में वर्षा के बाद का दृश्य है, जहाँ तालाबों के जलचर जीव प्रसन्न दिखाई देते है। दोनों पंक्तियाँ वर्षा से जुड़ी होने के कारण आपस में जुड़ी हुई हैं।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
कविता में मुख्य रूप से वर्षा ॠतु की सुंदरता और उसका प्रकृति तथा जीव-जंतुओं पर सकारात्मक प्रभाव दर्शाया गया है। कवि ने बताया है कि वर्षा के आने से संपूर्ण वातावरण आनंदमय हो जाता है। पेक्र-पौधे, फूल, पक्षी, जलचर, किसान और सभी जीव प्रसन्न हो जाते हैं। वर्षा न केवल धरती को हरा-भरा करती है, बल्कि सभी के मन में नई ऊर्जा और उमंग भर देती है।
(घ) “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिलते हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है?
उत्तर :
इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना ही नहीं है, बल्कि यह वर्षा ऋहु के कारण प्रकृति में आई ताजगी, खुशबू और जीवन के नवोल्थान को भी दर्शाता है। गुलाब का खिलना और उसकी सुगंध फैलाना इस बात का संकेत है कि वर्षा से प्रकृति खिल उठती है। यह पंक्ति सौदर्य, प्रसन्नता और नए जीवन की प्रतीक है, जो वर्षा के आगमन से उत्पन्न होती है।
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(ङ) कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए, जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है; जैसे- ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है?
उत्तर :
सकारात्मक गतिविधियाँ दर्शाने वाली पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं
- ‘बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब’ – (गीत गाना)
- ‘करते हैं नृत्य बन में, देखो ये मोर सारे’ – (नृत्य करना)
- ‘मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे’ – (गीत गाना)
- ‘खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड्डा रहा है’ – (सुगंध फैलाना)
- ‘गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर’ – (गीत गाना)
स्पष्टीकरण इन सभी पंक्तियों में उल्लास, आनंद और सौदर्य का चित्रण है, जो वर्षा ॠतु के आगमन से उत्पन्न होता है। वर्षा के कारण प्रकृति खिल उठती है, सभी जीव-जंतु खुश हो जाते हैं और वाताबरण में सकारात्मकता फैल जाती है। इसी कारण कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ रखा गया है, क्योकि यह श्रहुतु बास्तब में धरती पर बहार लेकर आती है।
अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर :
वर्षा के अभाव में मानव जीवन, पशु-पक्षियों और प्रकृति पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। फसलें सूख जाएँगी, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है, जलस्रोत सूख जाएंगे और पीने के पानी की कमी हो सकती है, पशु-पक्षियों को भोजन और पानी नहीं मिल पाएगा, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ सकता है, पेड़-पौधे मुरझा जाएँगे, जिससे पर्यावरण असंतुलित हो सकता है। इस प्रकार, वर्षा का अभाव संपूर्ण जीवन प्रणाली को प्रभावित करता है।
(ख) “बिजली चमक रही है”, बादल गरज रहे हैं” – बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है?
संकेत- (आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।)
उत्तर :
बिजली चमकना और बादल गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं, जिनके जीवन पर दोनों प्रकार के प्रभाव पड़ सकते हैं। सकारात्मक रूप से, बिजली का चमकना और बादल का गरजना वर्षा के आगमन का संकेत होता है, जो कृषि के लिए लाभदायक होता है और जलस्रोतों को पुन: भरता है। ये दृश्य और ध्वनि प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाते हैं और वातावरण में ताजगी का अनुभव कराते हैं। हालाँकि, इन घटनाओं के नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। बिजली गिरने से जान-माल का नुकसान हो सकता है, आग लग सकती है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो सकते हैं। तेज़ गर्जना और बिजली की चमक से लोगों में भय का माहौल बन सकता है, मुख्यत: बच्चों और बूड़ों में। तेज़ तूफान और बिजली गिरने से संचार लाइने और बिजली के खंभे गिर सकते हैं, जिससे बिजली और संचार बाधित हो सकता है। इस प्रकार, बिजली और बादलों की ये घटनाएँ प्रकृति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनके अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव होते हैं।
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(ग) “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” – इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे?
उत्तर :
वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों में एक नई ऊर्जा और प्रसन्नता आ जाती है। प्रस्तुत पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि मोर अपनी खुशी नाचकर व्यक्त करते हैं। इसी प्रकार, अन्य पक्षी (पपीहे) मीठे सुरों में गाना गाते हैं, मेंढक टर्र-टर्ं की आवाज़ में गीत गाकर वर्षा का स्वागत करते हैं। तालाबों के जलचर जीव सक्रिय हो जाते हैं और ताजे पानी में तैरते हुए प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। वर्षा उनके लिए जीवनदायिनी होती है, जिससे सभी जीवों में उल्लास और जीवंतता दिखाई देती है। ये सभी अपनी-अपनी तरह से वर्षा ऋतु की खुशी को प्रकट करते हैं।
आपकी रचनाएँ
(क) कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंठक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
उत्तर :
वर्षा ऋतु के आगमन से पूरा जंगल आनंदित हो उठता है। मोर खुशी से पंख फैलाकर नाचते हैं, उनके रंग-बिरंगे पंख वर्षा की बूँदों में और भी चमक उठते हैं। बहीं मेंढक तालाब किनारे बैठकर टर्र-टर्र करते हुए सुरीले गीत गाते हैं, जिससे वाताबरण में संगीत भर जाता है। यह दृश्य एक अद्भुत प्राकृतिक उत्सब जैसा प्रतीत होता है।
(ख) वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
उत्तर :
बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में लगातार तीन वर्षों तक बर्षा नहीं हुई। खेत सूख गए, तालाब खाली हो गए और पेड़-पौधे मुरझा गए। लोग परेशान थे, जानवर उदास थे और पक्षियों ने गाना तक छोड़ दिया था।
गाँब के बुजुर्गों ने कहा-“अब हमें वर्षा देवी की पूजा करनी चाहिए। वह जब प्रसन्न होती हैं, तब बादल घिरते हैं और जीवन लौट आता है।” गाँव के सभी लोग एकसाथ एक पहाड़ी मंदिर पर पहुँचे, ढोल-नगाड़ों के साथ पूजा की, गीत गाए और प्रार्थना की।
कुछ ही समय बाद आकाश में बादल घिर आए, बिजली चमकी, बादल गरजे और तेज़ वर्षा होने लगी। झरने बहने लगे, तालाब भर गए, मोर नाचने लगे और मेंढक गीत गाने लगे। गुलाब फिर से खिले और गाँव में फिर से जीवन लौट आया।
इस तरह यह लोककथा ‘वर्षी-बहार’ कविता के भावों को जीवंत करती है, जहाँ वर्षा केवल पानी नहीं, बल्कि पूरी प्रकृति की मुस्कान और आनंद का कारण बनती है।
(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
शब्द से जुड़े शब्द
अपने समूह् में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए

उत्तर :
- बादल
- मेंटक
- बिजली
- हरियाली
- इंद्रधनुष
- काली घटा
कविता की रचना

“वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है”
इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘वर्षा’ एक ॠतु का नाम है। ‘बहार’ ‘वसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वर्षा’ और ‘बहार’ को एक साथ दिया गया है, जिससे वर्षा ऋतु की सुंदरता को स्पष्ट किया जा सके।
इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं; जैसे- कविता की कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य के रूप में ही हैं, तो कुछ में वाक्य संरचना सरल नहीं हैं।
अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची लय और तुक कविता में एक सुंदर लय और तुक का प्रयोग किया गया है, जिससे यह पढ़ने और सुनने में मधुर लगती है।
- सरल भाषा कविता की भाषा सरल और सहज है, जो आसानी से समझ में आ जाती है।
- भावनाओं की अभिव्यक्ति कविता में खुशी, उत्साह, शांति और सौंदर्य जैसी विभिन्न भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया गया है।
- प्रकृति का मानवीकरण कुछ स्थानों पर प्रकृति के तत्त्वों (जैसे बादलों का गरजना) को मानवीय क्रियाओं से जोड़ा गया है।
- संक्षिप्तता कविता आकार में संक्षिप्त है, लेकिन गहरे अर्थों को व्यक्त करती है।
- सकारात्मक दृष्टिकोण पूरी कविता में वर्षा ऋतु के प्रति एक सकारात्मक और आनंदपूर्ण दृष्टिकोण दर्शाया गया है।
- शब्दों का सुंदर चयन कवि ने वर्षा ॠतु के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने के लिए सुंदर और उपयुक्त शब्दों का चयन किया है।
- प्रकृति चित्रण कविता में वर्षा ऋतु का सुंदर और सजीव बर्णन किया गया है, जिससे पाठक के मन में प्राकृतिक दृश्य उभरते हैं।
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कविता का सौंदर्य
(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए, जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए।
______ बहार सब के, मन को लुभा रही है (बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि)
उत्तर : बरखा
_______ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम)
उत्तर : मेघ
बिजली चमक रही है, _______ गरज रहे हैं (मेघ, जलधर, घन, जलद)
उत्तर : अंबर
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_______ बरस.रहा है, झरने-भी ये बहे हैं (जल, नीर, सलिल, तोय)
उत्तर : जल
(ख) अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों?
उत्तर :
- ‘बरखा’ शब्द में संगीतात्मकता है और यह कविता के भावों के साथ बेहतर तालमेल बनाता है।
- ‘अंबर’ प्रचलित शब्द है, जो काव्य भाषा में सुंदरता जोड़ता है।
- ‘मेघ’ शब्द बारिश और गरज से सीधे जुड़ा हुआ है और कविता के लय में भी आता है।
- ‘जल’ सबसे सामान्य, समझने में सरल और कविता के प्रवाह के अनुसार सबसे उपयुक्त लगा।
विशेषण
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब”
इस पंक्ति में ‘सुंदर’ शब्द ‘गीत’ की विशेषता बता रहा है अर्थात् यह ‘विशेषण’ है। ‘गीत’ एक संज्ञा शब्द है, जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् यह ‘विशेष्य’ शब्द है।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए

(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए

उत्तर :
1. सुहानी – वर्षा
2. ठंडा – पानी
3. काले – बादल
4. हरी – डालियाँ
5. लाल – गुलाब
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ॠतु और शब्द
“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते”
‘ताप’ शब्द ग्रीष्म ऋतु से जुड़ा शब्द है। भारत में मुख्य रूप से छह ॠतुतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। लोग इन ऋतुओं में कुछ विशेष शब्दों का उपयोग करते हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर कौन-सी ॠशु का स्मरण होता है? इन शब्दों को तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए

उत्तर
| वसंत ऋतु (सामान्यतः मार्च-अप्रैल) | बहार, हरियाली |
| ग्रीष्म ऋतु (सामान्यत: मई-जून) | ताप, लू, जेठ, तपन |
| वर्षा ऋतु (सामान्यतः जुलाई-अगस्त) | रिमझिम, सावन, आँधी, बयार, झड़ी, हरियाली, शीतलता, बादल फटना, वृष्टि |
| शरद ऋतु (सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर) | पाला, जाड़ा |
| हेमंत ऋतु (सामान्यतः नवंबर-दिसंबर) | ठिठुरन, हिमपात, धूप |
| शिशिर ऋतु (सामान्यत: जनवरी-फरवरी) | धुंध, कोहरा |
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर :
वर्षा के समय हमारे क्षेत्र का वातावरण ठंडा और सुहावना हो जाता है, पेड़-पौधे हरे-भरे दिखने लगते हैं, धूल और गर्मी से राहत मिलती है, खेतों में हरियाली छा जाती है और नदियाँ, तालाब पानी से भर जाते है, कई बार सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे आने-जाने में परेशानी होती है।
(ख) बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए।
उत्तर :
बारिश में स्कूल जाते समय छाता लेकर चलना पड़ता है। रास्ते में कीचड़ और फिसलन होती है। एक बार मैं स्कूल जाते समय बारिश में फिसलकर गिर गया था, लेकिन तभी मेरे दोस्त ने हँसते हुए मुझे उठाया और हम दोनों कीचड़ में सने हुए हँसते-हँसते स्कूल पहुँचे। वो दिन आज भी याद आता है, तो हँसी आ जाती है।
(ग) वर्षा ॠतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं?
उत्तर :
वर्षा ऋतु में मुझे बारिश की बूँदों में भीगना, हरियाली देखना और गरमागरम पकौड़े खाना बहुत अच्छा लगता है। मिट्टी की सोंधी खुशबू मन को भाती है, लेकिन इस मौसम में बाहर खेलना, घूमना और कपडे सुखाना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने में भी परेशानी होती है। फिर भी यह मौसम मुझे बहुत आनंद देता है।
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(घ) बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?
उत्तर :
बारिश में कुत्ते और बिल्लियाँ किसी छत या शेड के नीचे बैठ जाते है। पक्षी पेड़ों की घनी डालियों में छिप जाते हैं। कई बार उन्हें खाना हूँढने में मुश्किल होती है। छोटे जानवरों के घर पानी से भर जाते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित जगह ढूँडनी पड़ती है।
(ङ) अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ॠतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
साक्षात्कार
“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
मान लीजिए कि आप अपने विद्यालय की पत्रिका के पत्रकार हैं। आप एक किसान का साक्षात्कार कर रहे हैं, जो वर्षा के आने पर अपने खेतों में गीत गा रहा है।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर उस किसान के साक्षात्कार के लिए कुछ प्रश्न लिखिए।
(संकेत-आपका क्या नाम है? आप क्या काम करते हैं? आप काम करते समय गीत क्यों गाते हैं? आदि)
उत्तर :
(क) किसान के साक्षात्कार के लिए प्रश्न
- आपका नाम क्या है?
- आप कितने वर्षों से खेती कर रहे हैं?
- वर्षा के आने से आपके मन में क्या भाव उत्पन्न होते हैं?
- आप खेतों में काम करते समय गीत क्यों गाते हैं?
- क्या आपके ये गीत किसी परंपरा से जुड़े होते हैं?
- वर्षा के समय खेती में क्या-क्या बदलाव आते हैं?
- कौन-सी फसलें आप वर्षा के मौसम में बोते हैं?
- क्या कभी बहुत अधिक वर्षा या कम वर्षा से नुक्सान हुआ है?
- आपको खेती में सबसे ज्यादा क्या पसंद है?
- आप नई पीढ़ी को खेती के बारे में क्या संदेश देना चाहेंगे?
(ख) अपने समूह के साथ मिलकर इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए। आपके समूह का कोई सदस्य किसान की भूमिका निभा सकता है। अन्य सदस्य पत्रकारों की भूमिका निभा सकते हैं।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
वर्षा के दृश्य
(क) वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए, जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है; जैसे- आकाश में इंद्रधनुष।
उत्तर :
- बच्चों का बारिश में कागज़ की नाव चलाना
- बारिश के बाद कीचड और पानी से भरी गलियाँ
- छतरियों का इस्तेमाल करते लोग
- नालियों का बहना
- बारिश में भीगते पेड़-पौधे
- बिजली गिरने से पेड़ का टूटना
- मछलियों का पानी में उछलना
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(ख) वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए।
उत्तर :
बिजली पहले दिखाई देती है, फिर उसकी ध्वनि सुनाई देती है, क्योंकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से अधिक तेज होती है। इसीलिए हम बिजली की चमक पहले देखते हैं और थोड़ी देर बाद उसकी गड्माइाहट सुनाई देती है।
(ग) आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?
उत्तर :
- वर्षा से पहले पेड़-पौधे मुरझाए और धूल से भरे होते हैं।
- वर्षा के बाद पेड़-पौधे हरे-भरे और ताजे हो जाते हैं।
- पत्तियों पर पानी की बूँदें चमकती हैं।
- मिट्टी की खुशबू से वातावरण ताजा लगता है।
- पौधों की शाखाएँ साफ और नमी से भरी होती हैं।
(घ) ‘चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर’
कविता में हंसों के कतार में अर्थात् पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब
पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत – चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि)
उत्तर :
- चींटियाँ अकसर भोजन की तलाश में लाइन बनाकर चलती हैं।
- बच्चे स्कूल में प्रार्थना सभा या श्रमण पर जाते समय लाइन में चलते हैं।
- गाड़ियाँ ट्रैफिक में एक के पीछे एक चलती हैं।
- हाथी या घोड़े सर्कस या शो में कतार में चलते हैं।
- पक्षी प्रवास के समय एक ही दिशा में समूह में उड़ते हैं।
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वर्षा में ध्वनियाँ
(क) कविता में वर्षा के अनेक दृश्य दिए गए हैं। इन दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई दे रही होंगी? अपनी कल्पना से उन ध्वनियों को कक्षा में सुनाइए।
उत्तर :
- बारिश की टप-टप या झमाझम गिरती बूँदों की आवाज
- छत पर पानी गिरने की टप-टप
- नालियों में बहते पानी की छप-छप
- बच्चों की हँसी और मस्ती की खिलखिलाहट
- मेंढकों की टर्र-टर्र
- बादलों की गइगड्माहट
- बिजली की कड़कड़ाहट
- पत्तों पर गिरती बूँदों की रुनद्धुन
- तेज़ हवा की सरसराहट
(ख) “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे”
कविता में मेंढकों की टर्र-टर्ट को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?
उत्तर :
बेसुरी ध्वनियाँ भी तब अच्छी लगती हैं, जब उनका संबंध किसी प्राकृतिक सुंदरता, भावना या स्मृति से जुड़ा होता है; जैसे-
- बारिश में मेंढकों की टर्र-टर्ट सुनकर वर्षा के आने की स्तुझी होती है।
- बच्चों की शरारती चीख-पुकार भी खेलते समय अच्छी लगती है।
- गाँव के मेले में ढोल-नगाड़ों की अनगढ़ आवाज भी उत्सव का आनंद देती है।
इसलिए, जब कोई ध्वनि प्रकृति, भावना या संस्कृति से जुड़ी होती है, तो वह हमें अच्छी लगने लगती है, चाहे वह सुर में हो या न हो।
सृजन
“बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है”
‘आमोद’ या ‘मोद’ दोनों शब्दों का अर्थ होता है- आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता। कविता में वर्षा ऋतु में ‘आमोद’ के दृश्यों का वर्णन किया गया है। कविता के इन दृश्यों को हम नीचे दिए गए उदाहरण की तरह अनुच्छेद में भी लिख सकते हैं।
“हवा की ठंडक थी, बारिश की रिमझिम बूँदें गिर रही थीं, मोर नृत्य कर रहे थे और मेंढक खुश होकर गाना गा रहे थे। ये सभी मिलकर वर्षा ऋतु को एक उत्सब जैसा बना रहे थे। बागों में गुलाब की खुशबू और आम के पेड़ों पर नए फल देखकर पक्षी और लोग, सभी प्रसन्न हो गए थे। किसान अपने खेतों में काम करते हुए इस प्राकृतिक आनंद के भागीदार बन रहे थे।” अब नीचे दिए गए ‘आमोद’ से जुड़े विभिन्न दृश्यों का एक-एक अनुच्छेद में वर्णन कीजिए –
उत्तर :
बारिश के बाद उपवन में सैर बारिश के बाद उपवन की सैर करना एक अद्भुत अनुभव होता है। चारों ओर हरियाली निखर उठती है, पत्तों पर पानी की बूंदें चमकती हैं और मिट्टी से सोंधी खुशबू आती है। पंछी फुदकते हैं, फूलों की महक हवा में घुल जाती है। ठंडी-ठंडी बयार तन-मन को ताजगी से भर देती है। यह सब मिलकर एक सुखद ‘आमोद’ का अनुभव कराते हैं।
परिवार के किसी प्रिय सदस्य या मित्र से वर्षों बाद मिलना जब वर्षों बाद किसी प्रिय मित्र या परिवार के सदस्य से मुलाकात होती है, तो दिल खुशी से भर जाता है। पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं, बातें खत्म होने का नाम नहीं लेतीं। एक आलोकित आनंद की लहर सी बहती है, जैसे कोई खोई चीज़ मिल गई हो। उस मिलन में ‘जो ‘मोद’ छिपा होता है, वह जीवन भर याद रहता है।
सर्दियों का पहला हिमपात सर्दियों का पहला हिमपात किसी जादू से कम नहीं लगता। जैसे ही बर्फ की सफेद चादर धरती पर गिरती है, चारों ओर शांति और सौदर्य बिखर जाता है। पेड़-पौधे बर्फ से ढैंक जाते हैं और वातावरण एक परी कथा जैसा लगने लगता है। गर्म चाय की चुस्की और कंबल में बैठकर बर्फबारी को देखना दिल को बहुत प्रसन्नता देता है।
कोई उत्सव जब घर में कोई उत्सब होता है, तो हर कोना रोशनी और उल्लास से भर जाता है। रिश्तेदारों का आना-जाना, हँसी-ठिठोली, पकवानों की खुशबू और सजाबट का दृश्य मन को ‘आमोद’ से भर देता है। त्योहारों की यह रौनक न केवल खुशी देती है, बल्कि आपसी संबंधों को भी प्रगाढ़ बनाती है। उत्सब, जीवन में आनंद का उत्सव बन जाता है।
मित्रों संग खेलना मित्रों के साथ खेलना एक सुखद अनुभव होता है। इससे न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी प्रसन्न होता है। साथ खेलने से हमारे बीच की मित्रता और भी मजबूत होती है।
किसी प्रिय पुस्तक को पढ़ना जब हम किसी प्रिय पुस्तक को पढ़ते हैं, तो हम एक नई दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं। शब्दों का जादू हमें सोचने पर मजबूर करता है, कल्पनाओं को उड़ान देता है। एकांत में बैठकर अच्छी किताब पढ़ने का सुख अनमोल होता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, भीतर एक मधुर आनंद बहता है-जो केवल एक पाठक ही महसूस कर सकता है।
किसी कार्य को पूरा करना या सफल प्रदर्शन करना जब हम किसी कार्य को पूरी मेहनत और लगन से करते हैं और वह सफलता से पूरा होता है, तब हमारे भीतर एक विशेष आनंद की अनुभूति होती है। चाहे वह परीक्षा में अच्छे अंक हों या मंच पर सफल प्रस्तुति। यह संतोष और गर्व से भरा हुआ आनंद ‘आमोद’ कहलाता है। यह हमें प्रेरणा देता है और आत्मविश्वास से भर देता है।
समुद्र के किनारे शांत सवेरा या शाम समुद्र के किनारे बैठकर सूरज को उगते या हलते देखना मन को गहराई से सुकून देता है। लहरों की शांत गूँज, हवा की सरसराहुट और क्षितिज पर बिखरे रंगों का दृश्य आत्मा को शांति और आनंद से भर देता है। यह दृश्य जीवन की भागदौड़ में एक ठहराव-सा होता है-एक ऐसा ‘मोद’, जो भीतर तक छू जाता है।
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वर्षा से जुके गीत
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब”
‘गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर”
हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत और लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढिए और लिखिए। इस कार्य के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, इंटरनेट और पुस्तकालय की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को संकलित करके वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका भी तैयार कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
आज की पहेली
आपने वर्षा से जुड़ी एक कविता पढ़ी है। अब भारत की विभिन्न ऋतुओं से जुड़ी कुछ पहेलियाँ पढ़िए और इन्हें बुझिए

जाने कैसा मौसम आया,
सूरज ने सबको झुलसाया।
आम पर्कें तो रस बलके,
समय कौन-सा ये झलके?
उत्तर :
प्रीष्म ॠतु
पानी बरसे, बादल, गरजे,
धरती का हर कोना हरसे।
नदियाँ नाले भरे हर ओर,
बूझो किसका है ये जोर?
उत्तर :
वर्षा ऋतु
हवा में ठंडक बढ़ती जाए,
घूप सुहानी सबको भाए।
नई फसल खेतों में लाए,
बूझो कौन-सा मौसम आए ?
उत्तर :
शरद ऋतु
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फूल खिले, हर पक्षी गाए,
चारों ओर हरियाली छाए।
बागों में खुशबू छा जाए,
बूझो ऋगु ये क्या कहलाए?
उत्तर :
वसंत ऋतु
बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए,
ऊनी कपड़े सबको भाए।
घुर्ध की चादर लाए रात,
बूझो किस ॠतु की बात?
उत्तर :
शीत ॠतु
पत्ता-पत्ता गिरता आए,
सूनी डाली बहुत सताए।
पेड़ करें खुद को तैयार,
कौन-सी ॠतु का है ये सार?
उत्तर :
पतझड ग्रहुतु