Practicing with Malhar Hindi Book Class 7 Solutions Chapter 9 चिड़िया कविता प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 7 Hindi Chapter 9 Question Answer चिड़िया
NCERT Class 7th Hindi Chapter 9 चिड़िया Question Answer
कक्षा 7 हिंदी पाठ 9 प्रश्न उत्तर – Class 7 Hindi चिड़िया Question Answer
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?
- प्रेम-प्रीति
- लोभ और पाप (*)
- मिल-जुलकर रहना
- निर्भय विचरण
उत्तर :
लोभ और पाप
प्रश्न 2.
“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं।” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?

- असमानता और विभाजन
- प्रतिस्पर्द्धा और संघर्ष
- समानता और एकता (*)
- स्वार्थ और ईष्या
उत्तर :
समानता और एकता
प्रश्न 3.
“वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?

- आकाश में उड़ते रहना
- स्वच्छंद रहना (*)
- बंघन में रहना
- संचय करना
उत्तर :
स्वच्छंद रहना
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(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
उत्तर :
मैंने इन उत्तरों को इसलिए चुना, क्योकि यह कविता के मुख्य संदेश; जैसे- स्वतंत्रता, एकता और लोभ से मुक्ति को अच्छे से व्यक्त करते हैं। कविता पक्षियों के सरल, स्वच्छंद और सहयोगी जीवन से मनुष्य को प्रेरणा लेने की बात कहती है।
मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए। इनके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:
| संदर्भ | भाव |
| 1. चिड़िया की बोली | 5. प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |
| 2. सोने की कड़ियाँ | 1. बंधन और लालच |
| 3. निर्भय विचरण | 4. स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन |
| 4. मुक्ति-मंत्र | 3. बंधन से मुक्ति |
| 5. दिनभर काम | 2. श्रम और संतोष |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं, इन्हें ध्यान से पड़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की
रीति हमें सिखलाती है!”
उत्तर :
इस पंक्ति का अर्थ है कि पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया का शांत और प्रेम भरा व्यवहार हमें प्रेम और स्नेह की रीति सिखाता है। उसकी स्वाभाविक चहचहाहट में कोई स्वार्थ नहीं होता, वल्कि वह हमें आपस में प्यार से रहने और स्नेहपूर्ण संबंध बनाने की प्रेरणा देती है। चिड़िया हमें प्रेम और आपसी सहयोग से जीने की सीख देती है।
(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं।”
उत्तर :
यह पंक्ति पक्षियों की स्वाभाविक निर्मलता और संतोषी स्वभाव को दर्शाती है। पक्षियों के हुदय में किसी प्रकार का लोभ या लालच नहीं होता, न ही वे कोई बुरा काम करने या पाप करने की सोचते हैं। इसके अतिरिक्त, उनमें दूसरों को दुःख या कष्ट पहुँचाने की कोई भावना नहीं होती। वे अपनी आवश्यकताओं को परिश्रम से प्राप्त करते हैं और शांतिपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करते हैं, नकारात्मक भावनाओं से दूर रहते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें भी लोभ और बुरे विचारों से दूर रहकर साधारण और संतोषी जीवन जीना चाहिए।
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(ग) “सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं।”
उत्तर :
इस पंक्ति का अर्थ यह है कि पक्षी असीम आकाश में उड़ते हैं, जिसकी कोई सीमा नहीं है। वे बिना किसी डर या भय के स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करते हैं अर्थात् घूमते-फिरते हैं। उन्हें किसी प्रकार का बंधन या रोक-टोक नहीं होती और वे अपनी इच्छानुसार पूरे आकाश में उड़ सकते हैं।
यह पंक्ति पक्षियों की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। मनुष्य अक्सर अपनी बनाई हुई सीमाओं और डर के कारण बंधा हुआ महसूस करता है। पक्षियों का यह निर्भय होकर उड़ना हमें प्रेरणा देता है कि हमें भी अपने मन के बंधनों को तोड़कर निड्डरता से अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने जीवन में डर और बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्रता का आनंद लेना चाहिए।
सोच-विचार के लिए

नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रश्न दिए गए हैं। कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते है” पक्षियों के आपसी सह्ठयोग की यह भावना ह्रमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पक्षियों का आपसी सहयोग हमें सिखाता है कि समाज में एकता और सामंजस्य बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ठीक उसी प्रकार जैसे विभिन्न पक्षी बिना भेदभाव के मिल-जुलकर रहते हैं। उनका मिलकर खाना, संसाधनों को साझा करने और न्यायसंगत वितरण का संदेश देता है। उनकी स्वतंत्रता के साथ मिलकर रहने की भावना हमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाती है। यह सहयोग हमें लोभ और स्वार्थ से मुक्त होकर एक बेहतर और अधिक मानवीय जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
यह भावना हमारे लिए इसलिए आवश्यक है, क्योंकि यह एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज की नींब रखती है। सहयोग से हम मुश्किलों का सामना आसानी से कर सकते हैं, संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे एक अधिक मानवीय और शांतिपूर्ण जीवन जिया जा सकता है। यह हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के साथ मिलकर काम करने की प्रेरणा देता है।
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(ख) “जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
उत्तर :
पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं, क्योंकि वे ‘जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं और जो बच जाता है, उसे दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। उनके मन में लोभ या भविष्य के लिए अत्यधिक संग्रह करने की चाह नहीं होती।
मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न है, क्योंकि कविता के अनुसार, मनुष्य ‘जग का सारा माल हड़पकर जाने की भी चाह’ रखता है। मनुष्य में अकसर लोभ और अधिक पाने की लालसा होती है। वे भविष्य की अनिश्चितताओं के हर से या और अधिक सुख-सुविधाओं की चाह में अपनी आवश्यकता से कहीं अधिक धन और वस्तुओं का संचय करते है। पक्षियों की तरह वे केवल अपने वर्तमान श्रम पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि दूसरों के श्रम और संसाधनों पर भी अधिकार जमाना चाहते हैं। कविता मनुष्य की इस प्रवृत्ति को ‘द्रोह-भावना’ कहती है, जो मानवता के बिरद्ध है।
(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
उत्तर :
पक्षी को स्वच्छंद इसलिए बताया गया है, क्योंकि वे सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं। उनके लिए पूरा आकाश खुला है, बे जहाँ चाहें जा सकते हैं और बिना किसी बंधन या रोक-टोक के अपनी इच्छानुसार घूम सकते हैं। उनके मन में लोभ, पाप या भविष्य की चिंता नहीं होती, जिससे वे स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र और निश्चित रहते हैं।
मनुष्य को बेड़ियों में इसलिए बताया गया है, क्योकि उसने स्वयं को कई तरह के बंधनों में जकड़ लिया है। ये बेड़ियाँ भौतिक हो सकती हैं; जैसे-धन-संपत्ति का अत्यधिक मोह और संग्रहु की इच्छा, जिसके कारण वह लगातार कमाने और बचाने में बंधा रहता है। ये भावनात्मक और मानसिक भी हो सकती हैं; जैसे-भविष्य की चिन्ताएँ, सामाजिक दबाब और स्वार्थ की भावनाएँ, जो उसकी स्वतंत्रता को सीमित कर देती हैं। कविता में मनुष्य की ‘सोने की कड़िया’ तोड़ने और ‘द्रोह-भावना’ छोड़ने की बात की गई है, जो इंगित करता है कि मनुष्य स्वयं ही अपनी लालसाओं और नकारात्मक भावनाओं के कारण बंधनों में जकड़ा हुआ है, जबकि पक्षी इन सब से मुक्त होकर स्वच्छंद जीवन जीते हैं।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए
प्रश्न 1.
चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?
उत्तर :
स्वतंत्रता है मनुष्य के पास सोचने और अपने विचारों को व्यक्त करने की आज़ादी है। वह अपने जीवन के मार्ग को चुनने और निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। अपनी मेहनत और रचनात्मकता से वह जीविकोपार्जन कर सकता है। भौतिक रूप से, उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की भी स्वतंत्रता प्राप्त है।
स्वतंत्रता नहीं है मनुष्य ने स्वयं को कई तरह की आंतरिक बेड़ियों में जकड़ लिया है। अत्यधिक लोभ और संग्रह की इच्छा उसे लगातार धन कमाने और बचाने के बंधन में डाल देती है। भविष्य की चिंताएँ और सामाजिक दबाव उसकी मानसिक स्वतंत्रता को सीमित कर देते हैं। मनुष्य को दूसरों को नुकसान पहुँचाने, किसी के अधिकारों का उल्लंघन करने, समाज की नैतिकता और नियमों को तोड़ने या पर्यावरण को नष्ट करने की स्वतंत्रता नहीं है। समाज और कानून ने कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहे।
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प्रश्न 2.
चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?
उत्तर :
चिड़िया और मनुष्य का जीवन कई तरह से भिन्न है
- स्वतंत्रता और बंघन चिड़िया ‘सीमा-हीन गगन में उड़ती, निर्भय विचरण करती है,’ जो उसकी असीम स्वतंत्रता को दर्शाता है। इसके विपरीत, मनुष्य अपनी इच्छाओं, लोभ और भविष्य की चिंताओं की ‘सोने की कड़ियो’ में बँधा हुआ है, जिससे उसकी स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।
- आवश्यकता और संग्रह चिड़िया केवल अपनी ‘श्रम’ से उतना ही लेती है, जितनी उसकी आवश्यकता होती है और बचा हुआ दूसरों के लिए छोड़ देती है। वहीं, मनुष्य ‘जग का सारा माल हड़पकर जाने की ‘भी चाह’ रखता है, जो उसकी अत्यधिक संग्रह करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
- भावनात्मक स्थिति चिड़िया के मन में लोभ, पाप या परवाह नहीं होती, वह निश्चित और सरल जीवन जीती है, जबकि मनुष्य स्वार्थ और नकारात्मक भावनाओं से ग्रस्त हो सकता है।
- सामाजिक व्यवहार कविता में पक्षी आपस में ‘हिलमिल’ कर रहते हैं और मिलकर खाते हैं, जो उनके सहयोग और सामजस्य को दर्शाता है। मनुष्य में स्वार्थ और प्रतिस्पद्धां की भावना अधिक हो सकती है, जिससे अलगाब और संघर्ष उत्पन्न हो सकता है।
- घर और आश्रय पक्षियों का घर पूरा आसमान है और वे जहाँ चाहें जा सकते है। मनुष्य एक निश्चित स्थान पर घर बनाता है और सामाजिक नियमों और सीमाओं से बंधा होता है।
- जीवन का उद्देश्य चिड्रिया का जीवन सहज और वर्तमान में जीने पर केंद्रित है, जबकि मनुष्य अकसर भविष्य की योजनाओं और चिंताओं में उलझा रहता है। कविता मनुष्य को पक्षी से सीख लेकर अधिक सरल और बंधनमुक्त जीवन जीने का संदेश देती है।
प्रश्न 3.
चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो, तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर :
चिड़िया का कोई निश्चित घर नहीं है, क्योंकि उनका तो पूरा आसमान ही घर है और वे जहाँ चाहें, अपनी दुनिया बसा लेते हैं। यदि मेरे पास चिड़िया जैसी सुबिधा होती, तो मैं अपना घर ऐसी जगह बनाना चाहता, जहाँ प्रकृति की सुंदरता और शांति हो, लेकिन मानवीय संबंध भी बने रहें। मै किसी ऊँचे पेड़ की फुनगी पर घर बनाना पसंद करता, ठीक वैसे ही जैसे कविता में चिड़िया पीपल की डाली पर बैठी है। पेड़ पर रहने से मैं सीधे प्रकृति से जुड़ पाता, सुबह की पहली किरणें और रात के तारे मेरे घर से दिखते और पक्षियों का चहचहाना हमेशा मेरे साथ रहता।
ऊँचाई पर होने से मुझे एक तरह की स्वतंत्रता और एकांत मिलता, जैसे चिड़िया को ख्रुले आकाश में मिलता है। हालाँकि मैं अकेला नहीं रहना चाहता, इसलिए मैं ऐसे पेड़ के पास घर बनाता जहाँ और लोग भी हों, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे जुड़ाव महसूस हो सके। चिड़िया भले ही कहीं भी बसे, कविता में वन के अन्य पक्षियों के साथ उसका मिल-सुलकर रहना सहयोग की भावना को दिखाता है। पेड़ पर घर होने से मैं मौसम के बदलाबों को भी करीब से महसूस कर पाता। इस प्रकार, मैं एक ऊँचे पेड पर अपना घर बनाना चाहता, ताकि मुझे प्रकृति, स्वतंत्रता और एकांत मिले, लेकिन साथ ही मानवीय जुड्राव भी बना रहे, जो कविता में पक्षियों के मिल-जुलकर रहने से प्रेरित है।
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प्रश्न 4.
यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते, तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?
उत्तर :
यदि मै चिड़िया की भाषा समझ पाता, तो मैं उससे उसकी असीम स्वतंत्रता का रहस्य पूछता और यह जानना चाहता कि वह लोभ और चिंता से कैसे मुक्त रहती है। मैं उस ‘मुक्ति-मंत्र’ के बारे में पूछता जो वह मनुष्यों को सुनाती है। मैं प्रेम और एकता की उस रीति को समझना चाहता जो वह सिखाती है, खासकर वन के विभिन्न पक्षियों के बीच सहयोग को। मैं उसके संतोष और त्याग की भावना के बारे में पूछता कि वह केवल आवश्यकतानुसार क्यों लेती है। मैं यह भी जानना चाहता कि उसे मनुष्य इतना बँधा हुआ क्यों दिखता है और उन ‘सोने की कडियो’ को तोड़ने का तरीका पूछता। मैं उस ‘द्रोह-भावना’ को गहराई से समझना चाहता जिसे छोइने के लिए वह कहती है। अंत में, मैं उसके सरल जीवन में आनंद का रहस्य पूछता। संक्षेप में, मैं उसकी स्वतंत्रता, प्रेम, एकता, संतोष और जीवन के गहरे अर्थों के बारे में बात करता, ताकि मनुष्य भी प्रेरित हो सके।
कविता की रचना

“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे
सब मिल-जुलकर खाते हैं।”
रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए ये शब्द लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्रायः कविता में आती है। अब आप सब मिल-जुलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए-
संकेत-सब मिल-जुलकर हैँसते हैं वे
सब मिल-जुलकर गाते हैं……………
…………………………………………..
उत्तर :
सब मिल-जुलकर उड़ते हैं वे
खुले गगन में नाचते हैं।
सब मिल-जुलकर जीते हैं वे
प्रेम-प्रीति में बंधाते हैं।
भाषा की बात

“पीपल की ऊँची डाली पर
बैठी चिड़िया गाती है।
तुम्हें ज्ञात क्या अपनी
बोली में संदेश सुनाती है?”
रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘गाती’ और ‘सुनाती’ रेखांकित शब्दों से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। वे शब्द जिनसे कार्य करने का होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया शब्दों को ढूँढकर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर :
- गाती मेरी सहेली मधुर गीत गाती है।
- सुनाती दादी हमें रोज़ रात को कहानियाँ सुनाती हैं।
- सिखलाती शिक्षिका हमें हिंदी सिखलाती है।
- बतलाती माँ हमें अच्छे संस्कार बतलाती हैं।
- रहते हम सब परिवार में मिल-जुलकर रहते हैं।
- खाते हम रोज़ स्वादिष्ट भोजन खाते हैं।
- जाते बच्चे सुबह स्कूल जाते हैं।
- बसाते लोग गाँब में नया घर बसाते हैं।
- सो जाते रात को सभी जल्दी सो जाते है।
- उड़ते पक्षी आकाश में स्वतंत्रता से उड़ते है।
पाठ से आगे
भावों की बात

(क) जब आप नीचे दिए गए दृश्य देखते हैं, तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्तर के कारण भी सोचिए और बताइए। आप नीचे दिए गए भावों में से शब्द चुन सकते हैं। आप किसी भी दृश्य के लिए एक से अधिक शब्द भी चुन सकते हैं।

उत्तर :
- आनंद, शांति, आश्चर्य, उत्साह
- आनंद, शांति, आश्चर्य, सुख
- ममता, दया, करुणा, प्रेम
- घृणा, क्रोध, निराशा
- आनंद, गर्व, आभार, उत्साह
- चिंता, डर, क्रोध, निराशा
- दु:ख, चिंता, निराशा
- उत्साह, आत्मविश्वास, सहानुभूति, आश्चर्य, गर्व
- सहानुभूति, शांति, सुख, आभार
- क्रोध, घृणा, दु;ख, निराशा
- दया, करुणा, आभार, सुख
- प्रेम, ममता, सुख, आनंद
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(ख) उपर्युक्त भावों में से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते हैं? भावों के नाम लिखकर उन स्थितियों के लिए एक-एक वाक्य लिखिए।
(संकेत- आत्मविश्वास-जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ।)
उत्तर :
| भाव | स्थिति |
| आत्मविश्वास | जब मैं स्कूल में कोई नया खेल सीख लेता हूँ। |
| आनंद | जब मैं अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलता हूँ। |
| प्रेम | जब मैं अपनी माँ के लिए कुछ खास बनाता हूँ। |
| चिंता | जब मेरा दोस्त बीमार हो जाता है। |
| सहानुभूति | जब मैं किसी गरीब व्यक्ति को ठंड में ठिठुरते देखता हूँ। |
| क्रोध | जब कोई मेरे दोस्त को बेवजह डाँटता है। |
| शांति | जब मैं सुबह बगीचे में पक्षियों की आवाज सुनता हूँ। |
आज की पहेली
कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़ें। अब आपके सामने पक्षियों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पथियों को पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए

उत्तर :

चित्र की बात
इन तीनों चित्रों को ध्यान से देखिए और बताइए –
आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगें और क्यों?

उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
निर्भय विचरण

“सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं”
कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और इन चित्रों को देखिए। इन चित्रों को देखकर आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं?
(संकेत-जैसे इन चित्रों में कौन निर्भय विचरण कर रहा है?)
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
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साथ-साथ

“वन में जितने पंछी है, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;
काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!”
प्रश्न 1.
वन में सारे पक्षी एकसाथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं। आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है?
उत्तर :
हमारे परिवेश में पशु-पक्षियों का रहना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि वे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं; जैसे-खाद्य शृंखला और कीट नियंत्रण। उनकी विविधता जैव-विविधता को बढ़ावा देती है, जो पर्यावरण की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
उनकी चहचहाहट और गतिविधियाँ हमारे आसपास के वातावरण को जीवंत और मनोरम बनाती हैं, जिससे हमें मानसिक शांति मिलती है। कविता में पक्षियों का मिल-जुलकर रहना हमें सह-अस्तित्व और सहयोग का मूल्य सिखाता है और यह हमें प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। इसलिए उनका हमारे साथ रहना पर्यावरण और हमारे कल्याण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
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प्रश्न 2.
हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
उत्तर :
हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कई तरह से कर सकते हैं
- हमें उनके प्राकृतिक आवासों का सम्मान करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम उन्हे नष्ट न करें।
- हमें उन्हें बेवजह डराना या परेशान नहीं करना चाहिए, वर्कि उनके स्वाभाविक जीवन को शांति से जीने देना चाहिए।
- विशेष रूप से कठिन मौसम में, हम उन्हें थोड़ा भोजन और पानी उपलब्ध करा सकते हैं।
- अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखकर हम उन्हें स्वस्थ रहने में सहायता कर सकते हैं।
- यदि कोई पशु या पक्षी घायल या संकट में दिखे, तो हमें उसकी सहायता के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
- हमें उनके प्रति दयालु और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए और दूसरों को भी उनके महत्त्व के बारे में जागरूक करना चाहिए।
शब्द एक अर्थ अनेक
“उसके मन में लोभ नही है”, इस पंक्ति में ‘मन’ का अर्थ ‘चित्त’ (बुद्धि) है, किंतु ‘मन’ शब्द के अन्य अर्थ भी हो सकते हैं। अब नीचे कुछ और पंक्तियाँ दी गई है, उन्हें भी पढ़िए
(क) आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है।
(ख) व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा।
उपर्युक्त वाक्यों में ‘मन’ शब्द का प्रयोग अलग-अलग अर्थों या संदर्भों में किया गया है। इस प्रकार हम देखते हैं कि एक ही शब्द दूसरे संदर्भ में अलग-अलग अर्थ दे रहा है। आइए, इससे संबंधित एक और रोचक उदाहरण देखते हैं
“मंगल ने मंगल से कहा कि मंगल को मंगल पर मंगल होगा”
(संकेत- इस वाक्य में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से दिन, ग्रह और शुभ कार्य की चर्चा कर रहा है।)
आगे कुछ और ऐसे ही शब्द दिए गए हैं। दिए गए शब्दों का अलग-अलग अर्थों या संदर्भों में प्रयोग कीजिए

उत्तर :
(क) कर
- सरकार सभी नागरिकों से कर वसूल करती है। (टैक्स के अर्थ में)
- उसने घायल पक्षी को अपुने कोमल कर से सहलाया। (हाथ के अंर्च में)
(ख) जल
- हमें प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में जल पीना चाहिए। (पानी के अर्थ में)
- सूर्य की रोशनी में तालाब का जल चमक रहा था। (चमक के अर्थ में)
(ग) अर्थ
- इस जटिल समस्या का अर्थ समझना मुश्किल है। (मतलब के अर्थ में)
- उसने व्यापार में बहुत अर्थ कमाया। (धन के अर्थ में)
(घ) फल
- यह पेड़ स्वादिष्ट फल देता है। (खाने योग्य के अर्थ में)
- अपनी कड़ी मेहनत का फल उसे अवश्य मिलेगा। (परिणाम के अर्थ में)
(ङ) आम
- गर्मी के मौसम में आम खाना सबको पसंद होता है। (एक फल के अर्थ में)
- यह एक आम घटना है, इसमें आश्चर्य की कोई बात नईी। (सामान्य के अर्थ में)
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रचनात्मकता
(क) खुले आसमान में, पेड़ों की टहनियों, छतों और भवनों आदि पर बैठे या उड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते हैं। अपनी पसंद के ऐसे कुछ दुश्यों का कोलाज बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर :
में एक कोलाज बनाऊँगा, जिसमें निम्नलिखित दृश्य शामिल होंगे
- सुबह के समय पेड़ की डाल पर चहचहाते तोते।
- सूर्यास्त के समय आकाश में उड़ते कबूतरों का झुंड।
- छत पर बैठी मैना जो गीत गा रही है।
- पेड़ पर घोंसला बनाती हुए चिड़िया।
इन दृश्यों के लिए पुरानी पत्रिकाओं, अखबारों, किताबों या इटरनेट से तस्वीरें एकत्र कर सकते हैं। फिर इन तस्वीरों को एक बड़े चार्ट पेपर या कार्डबोर्ड पर अपनी रचनात्मकता के अनुसार व्यवस्थित करके चिपकाएँ। आप चाहें तो इन दृश्यों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए रंगीन पेन या स्केच पेन का भी उपयोग कर सकते हैं।
(ख) “स्वतंत्रता और प्रेम” का संदेश देने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसमें इस कविता की कोई पंक्ति या संदेश भी शामिल कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
हमारा पर्यावरण

मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यों की एक सूची बनाइए, जिनसे पर्यावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस संकट की स्थिति से बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं? लिखिए। आप इस कार्य में शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं। (संकेत – जैसे- ऊँचे भवनों का निर्माण…….)
उत्तर :
मनुष्य के कार्यों से पर्यावरण व पशु-पक्षियों पर संकट
- वनों की कटाई से आवास नष्ट।
- शहरीकरण व औद्योगीकरण से प्रदूषण व आवास कमी।
- कृषि विस्तार व कीटनाशकों से भोजन दूषित व कमी।
- जलाशय प्रदूषण से जलीय जीवन खतरे में।
- खनन से आवास विनाश व प्रदूषण।
- जलबायु परिवर्तन से मौसम बदलाव व प्रभाव।
- प्लास्टिक व अन्य प्रदूषण से जीवों को हानि। बचाव के उपाय
- वन कटाई रोकना, वृक्षारोपण करना।
- सतत् विकास अपनाना।
- जैविक खेती को बढ़ावा देना।
- जलाशयों को प्रदूषण से बचाना।
- जीवाश्म ईंधन कम करना, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना।
- अवैध शिकार रोकना।
- प्रदूषण नियंत्रित करना।
- जन जागरूकता बढ़ान्म।
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परियोजना कार्य
(क) पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते हैं। आप अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में देखिए कि किन-किन कार्यों में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कार्यों की सूची बनाइए। अब इनमें प्रयोग किए जा रहे प्लास्टिक के थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए और लिखिए। (संकेत- जैसे हम प्लास्टिक के थैले की जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग किन-किन कार्यों में कर सकते हैं।)
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
(ख) सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
साझी समझ
आप इंटरनेट या किसी माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियों पर लेख लिखिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।