Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary

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Sanskrit Class 7 Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary

मित्राय नमः Meaning in Hindi

Class 7 Sanskrit Chapter 3 Summary Notes मित्राय नमः

प्रस्तुत पाठ में दो सहेली आपस में बात चीत करती हैं और योगासनों की शिक्षा लेने के लिए योगशिक्षिका के पास जाती हैं। योगशिक्षिका उन्हें सूर्य नमस्कार (आसन) का महत्त्व बताती हुई, उसके बारह आसनों का वर्णन करती हैं। शिक्षिका कहती हैं कि प्रत्येक सूर्य नमस्कार से पूर्व एक मंत्र होता है, जिसमें ‘ॐ’ मित्राय नम:’ प्रथम मंत्र है। सूर्य नमस्कार के अनेक प्रयोजन हैं। जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करता है उसकी आयु, बुद्धि, बल, वीरता और तेज बढ़ जाते हैं, इसलिए हमें भी प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करना चाहिए।

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पाठ परिचय

सखी – अहो ! योगिते त्वं प्रातः किं करोषि ?
योगिता – अहं प्रतिदिनं प्रातः पित्रा सह उद्यानं गच्छामि ।
सखी – उद्याने किं करोषि भो: ?
योगिता – अहं तु भ्रमणं करोमि, किन्तु बहवः जनाः तत्र व्यायामं योगासनानि च कुर्वन्ति ।
सखी – अहो योगासनानि! वयम् अपि ज्ञातुम् इच्छामः।
योगिता – तर्हि वयं सर्वे योगशिक्षिकायाः समीपं गच्छामः।
(सर्वे उत्साहेन योगशिक्षिकायाः समीपं गच्छन्ति ।)

शब्दार्थाः
करोषि = करती हो,
सह = साथ,
तु = तो,
बहवः = बहुत,
वयं = हम,
ज्ञातुं = जानने की,
तर्हि = तो,
सर्वे = सभी।

हिंदी अनुवाद

सखी – अरे! योगिता तुम प्रातः क्या करती हो?
योगिता – मैं प्रतिदिन प्रात: पिता के साथ उद्यान (बगीचे) में जाती हूँ।
सखी – अरे ! उद्यान में क्या करती हो?
योगिता – मैं तो भ्रमण करती हूँ, किंतु अनेक लोग वहाँ व्यायाम और योगासन करते हैं।
सखी – अरे योगासन! हमें भी जानने की इच्छा है।
योगिता – तो हम सभी योगशिक्षिका के पास जाते (चलते) हैं ।
(सभी उत्साह से योगशिक्षिका के पास जाते हैं ।)

Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary 4

Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः

1. छात्राः – नमो नमः आचार्ये!
आचार्या – शुभं भवतु। उपविशन्तु सर्वे ।
छात्राः – आचार्ये! किम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शिक्षयति ?
आचार्या – निश्चयेन, वदन्तु किम् आसनं शिक्षितुम् इच्छन्ति ?
योगिता – आचार्ये! अद्य सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु ।
आचार्या – समीचीनम्। सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति। प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति । तेषु प्रथमः मन्त्रः अस्ति ‘ॐ मित्राय नमः’ इति ।
छात्राः – आम् महोदये! वयं स्मरामः

शब्दार्थाः
उपविशन्तु = बैठो,
किम् = क्या,
अद्य = आज,
समाहारः = समूह,
स्मरामः = याद रखेंगे।
संदर्भ – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक संस्कृत दीपकम् भाग-2 के तृतीय अध्याय ‘मित्राय नमः’ नामक पाठ से लिया गया है।
अनुवाद –
छात्र – आचार्या नमस्कार !
आचार्या – आप सौभाग्यशाली हो । सभी बैठो।
छात्र – आचार्या ! क्या आज आप हमें योगासन सिखा रही हैं?
आचार्या – निश्चय ही कहो कौन – सा आसन सीखना चाहते हो ?
योगिता – आचार्या! आज हमें सूर्य नमस्कार सीखना है।
आचार्या – ठीक हैं। सूर्य नमस्कार बारह आसनों का समूह है। प्रत्येक सूर्य नमस्कार से पहले एक मंत्र होता है। उनमें से पहला मंत्र है – ॐ मित्राय नमः ।’
छात्र – हाँ महोदया ! हम याद रखेंगे……।

2. आचार्या – अत्युत्तमम् ! मिलित्वा वदन्तु !
छात्राः –
Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary 1

शब्दार्थाः
वदन्तु = बोलें,
नमः = नमस्कार,
खगाय = पक्षी के लिए,
पूष्णे = सूर्यः
संदर्भ – पूर्ववत् ।
अनुवाद –
आचार्या – बहुत सुंदर ! मिलकर बोलो !
छात्र-

  • ॐ मित्राय नमः |
  • ॐ रवये नमः ।
  • ॐ सूर्याय नमः ।
  • ॐ भानवे नमः ।
  • ॐ खगाय नमः।
  • ॐ पूष्णे नमः।
  • ॐ हिरण्यगर्भाय नमः ।
  • ॐ मरीचये नमः ।
  • ॐ आदित्याय नमः ।
  • ॐ सवित्रे नमः ।
  • ॐ अर्काय नमः।
  • ॐ भास्कराय नमः ।

(अंत में सभी) ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः।

Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary 5

3. आचार्या – अत्युत्तमम्! इदानीम् एकेन श्लोकेन सूर्यनमस्कारस्य बहूनि प्रयोजनानि वदामि।
भवन्तः शृण्वन्तु अनुवदन्तु च।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते।।

एवं योगासनेषु सूर्यनमस्कारः एकः श्रेष्ठः आसनक्रमः अस्ति। सूर्यनमस्कारेण शारीरिक, मानसिकम्, आध्यात्मिकं च बलं वर्धते। अतः वयं प्रतिदिनं सूर्य नमस्कारं करवाम, ‘स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः’ च प्राप्नवाम । अस्तु, पुनः अग्रिमकक्षायाम् अन्येषाम् आसनानां विषये ज्ञास्यामः ।
छात्राः – धन्यवादाः आचार्ये!

शब्दार्थाः
प्रयोजनानि = उद्देश्य,
अनुवदन्तु = दोहराएँ,
प्रज्ञा = बुद्धि,
वीर्यं = वीरता,
तेज = कांति,
आध्यात्मिकं = आध्यात्मिक,
स्वस्थं = स्वस्थ,
अग्रिमकक्षायाम् = अगली कक्षा में।
संदर्भ – पूर्ववत् ।
अनुवाद –
आचार्या – बहुत सुंदर ! इस एक श्लोक से सूर्य नमस्कार के अनेक उद्देश्य बताऊँगी। आप उन्हें सुने और दोहराएँ ।
“जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, बुद्धि, शक्ति, वीरता और कांति (सभी) बढ़ जाते हैं।”
इस प्रकार योगासनों में सूर्य नमस्कार एक श्रेष्ठ आसनक्रम है। सूर्य नमस्कार से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है।
अत: हमें प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करना चाहिए, जिससे हम ‘स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन’ प्राप्त कर सकें। ठीक है, पुनः अगली कक्षा में अन्य आसनों के विषय में जानेंगे।
छात्र – धन्यवाद आचार्या !

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