Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 1 स्वदेश कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 1 Question Answer स्वदेश
NCERT Class 8th Hindi Chapter 1 स्वदेश Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 1 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi स्वदेश Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा
बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. ‘वह हृदय नहीं है पत्थर हैं – इस पंक्ति में हुदय के पत्थर होने से तात्पर्य है
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता से
2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
- देश की प्रगति
- देश के प्रति प्रेम
- देश की सुरक्षा
- देश की स्वतंत्रता
3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” – इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
- देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
- देश की शासन व्यवस्था के लिए
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
- देश के सभी प्राणियों के लिए
4. कविता के अनुसार कौन-सा हुदय पत्थर के समान है?
- जिसमें साहस की कमी है
- जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- जिसमें स्मृति और उमंग नहीं है
उत्तर:
(क) 1
संवेदनहीनता से
कठोरता से
2 देश के प्रति प्रेम
3 देश के समस्त नागरिकों के लिए
4 जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
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(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

उत्तर :
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| (क) जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| (ख) जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| (ग) जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| (घ) सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।”
उत्तर :
(क) इन पंक्तियों से मुझे यह समझ आया है कि यह जीवन नश्वर है। मृत्यु अटल सत्य है और प्रत्येक प्राणी को एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना ही है, ठीक वैसे ही जैसे पतंगे आग में जलकर समाप्त हो जाते हैं। यह पंक्तियाँ जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाती हैं और हमें यह याद दिलाती हैं कि हमारा समय सीमित है।
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं वह हुदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
उत्तर :
इन पंक्तियों से मुझे यह समझ आया है कि मनुष्य के पास अपनी नियति को गढने की पूरी शक्ति है और वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है, हमारे हाथों में तोप, तलवार जैसी शक्तियाँ भी है, अगर फिर भी उसके हुदय में अपने देश के प्रति प्रेम का अभाव है, तो उसका जीवन और हदय दोनों ही व्यर्थ और निर्जीव हैं। ये पंक्तियाँ हमें अपने अंदर की शक्ति को पहचानने और साथ ही देश्रेम के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती हैं।
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(ग) “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। वह हुदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
उत्तर :
इन पंक्तियों से मुझे यह समझ आया है कि एक सच्चा मनुष्य वही है, जो न केवल सामान्य मानवीय भावनाओं (प्रेम, करुणा) से भरा हो, बल्कि जिसमें अपने देश के प्रति गहरा प्रेम भी हो। यदि इन भाबनाओं में देशत्रेम का अभाव है और जिसमें ‘रस-धार’ अर्थात् प्रेम, आनंद या जीवन की मिठास की धारा नहीं बहती, वह हदय एक जीवित और संवेदनशील हदय नहीं कहा जा सकता। ये पंक्तियाँ भावनात्मक गहराई और देशभक्ति को एक सार्थक जीवन के लिए अनिवार्य बताती हैं।
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी”-पंक्ति में ‘राजा-रानी’ किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर :
इस पंक्ति में ‘राजा-रानी’ से आशय है-हम सब भारतीय नागरिक हैं। यहाँ कबि यह कहना चाहता है कि अपने देश में हम स्वतंत्र हैं, अपनी इच्छा से जीवन जी सकते हैं। जिस देश में हमें पूरा अधिकार और सम्मान मिला है, वहाँ हम राजा-रानी की तरह हैं। यह स्वतंत्रता ही हमें महान बनाती है।
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर :
‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है-समय और समाज के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलना। जो व्यक्ति समय की गति, समाज की आवश्यकताओं और बदलावों के साथ नहीं चलता, वह पीछे रह जाता है। ऐसे लोगों का जीवन दूसरों के लिए उपयोगी नहीं बन पाता, इसलिए संसार उसका नहीं हो पाता।
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।”-पंक्ति से आप क्या समझते है? बताइए।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि उन्.लोगों की आलोचना करता है, जो अपने देश के प्रति प्रेम, करुणा या संवेदना नहीं रखते। कवि कहता है कि जो क्यक्ति इतनी महान भूमि पर जन्म लेकर भी उससे प्रभाबित नहीं होता, वह केवल धरती पर बोझ है। ऐसे लोगों का जीवन व्यर्थ है, क्योंकि उन्होने देश के लिए कुछ नहीं किया।
(घ) कबिता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर :
कविता में देश-प्रेम का अर्थ-अपने देश से सच्चा लगाव रखना, उसकी रक्षा करना और उसकी उन्नति के लिए कार्य करना है। देश के प्रति प्रेम केवल भाबनाओं में नहीं, कर्मों में भी दिखना चाहिए; जैसे-ईमानदारी, सेवा, साहस और आवश्यकता पड़ने पर बलिदान देने की भावना। देश-प्रेम वही करता है, जो देश को अपना घर और देशवासियों को अपना परिवार मानता है।
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(ङ) यह रचना एक आहान गीत है, जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ जूँढिए और लिखिए।
उत्तर :
इस रचना की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
- देशभक्ति का भावपूर्ण चित्रण पूरी कविता में स्वदेश के प्रति प्रेम, त्याग और गौरव की भावना प्रजल है।
- प्रेरक और उद्दीपन स्वर यह रचना पाठकों को केवल भावनात्मक नहीं, अपितु कर्मशील बनने की प्रेरणा देती है।
- प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग जैसे ‘पत्थर’, ‘काल-दीप’, ‘दाना-पानी’ आदि प्रतीक रूप में गहरे भाव व्यक्त करते हैं।
- सरल, प्रभावशाली भाषा भाषा सरल होते हुए भी भावनाओं को बहुत सशक्त रुप में व्यक्त करती है।
- तुकबंदी और लयात्मकता कविता में सुंदर तुक मिलान और लय है, जो पाठक को सहल रूप से बाँधती है।
- पुनरक्ति अलंकार का प्रयोग जैसे- ‘बह द्वदय नहीं है परथर है’ में दोहराब द्वारा जोर दिया गया है।
- कर्त्तव्य और चेतना का बोध यह कविता पाठक को मृत्यु की अनिवार्यता याद दिलाकर जीवन में कर्म और देशसेवा का संदेश देती है।
- भारतीय सांस्कृतिक गौरव का वर्णन कविता में भारत के खजाने, नव रत्व, मिट्टी, भाषा और परंपराओं को गौरवपूर्ण बताया थाया है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” – अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि कहते हैं कि जिसने संसार में खजाने खोले हैं अर्धात् जिसने अपार धन-संपत्ति अर्जित की है, जिसने अनमोल रत्न दिए है। ऐसे व्यक्ति किसी भी बात पर या परिस्थिति में द्रवित नहीं होते।
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे-बढ़े” – पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर :
‘उगे-बड़े’ शब्द का प्रयोग हम भारतीय नागरिकों के लिए किया गया है। इसका अर्थ है-हम भारत की मिट्टी में जन्मे, पले-बढ़े, उसी की हबा-पानी में बड़े हुए। इसलिए इस मिट्टी के प्रति हमारा कर्त्तव्य है कि हम उसका सम्मान करें और उसकी सेवा करें।
(ग) “वह द्बदय नहीं है पत्थर है” – पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर :
कवि ने हुदय के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग इसलिए किया है, क्योकि देशग्रेम के अभाव में हृदय संवेदनहीन, कठोर और भावनाओं से रहित हो जाता है, ठीक पत्थर की तरहा यह देशभक्ति के बिना जीवन की निरर्थकता को दर्शाता है।
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे? (संकेत- पत्थर- जब में नदी में था, तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी।)
उत्तर :
(कल्पनात्मक उत्तर) पत्थर कहेगा “बब में नदी में था, तो बहती धारा मुझे घिसती रही। कभी तेज़ बहाव ने मुझे चट्टानों से टकराया, तो कभी बच्चों ने मुझे उठाकर दूर फेंका, पर मैने कभी शिकायत नहीं की। मुझे मंदिर में देवता का रूप भी बनाया गया और किसी सड़क पर कुचला धी गया।”
मैं पत्थर से कहाँगा “तुमने सब कुछ सहा, फिर भी ज्ञांत रहे। तुममें सहनशीलता और विनम्रता है, लेकिन अगर कोई मनुष्य अपने देश के लिए क्ठोर बन जाए और भावझून्य हो जाए, तो वह पत्थर से भी गया-गुज़रा है।”
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(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर :
देश के निम्नलिखित संसाषनों के संरक्षण की आवश्यकता है
- जल पानी जीवन के लिए अनिवार्य है, इसका संरक्षण आवश्यक है, ताकि आने वाली पीब्जियाँ भी इसका उपयोग कर सकें।
- वन बनों का ऊटाब रोकना आवश्यक है, क्योकि पेड़-पौधे पर्यावरण को संतुलित रखते हैं।
- भूमि भूमि से ही हमें भोजन, चारा और विभिन्न प्रकार के कच्चे माल आदि प्राप्त होते हैं। इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक है।
- ऊर्जा बिजली, गैस, पेट्रोल जैसे संसाधनों को आवश्यकता के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी भी इसका फायदा ले पाएँ।
कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंघु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शैब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है।
इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर :
शब्दों के तुक जैसे ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ मिलाने से कविता में लय, संगीतात्मकता और आकर्षण आता है। तुकवंदी कविता को पढ़ने और सुनने में मधुर बनाती है। इससे कविता पाठक या श्रोता के मन में गूँजती है और याद भी जल्दी हो जाती है। तुकों की सहायता से कवि अपने भावों को सरल और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है।
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(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर :
कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए कवि ने कई काव्यात्मक अलंकारों और भावों का प्रयोग किया है। देशप्रेम जैसे उच्च भावों का चित्रण किया गया है। सरल और सशक्त भाषा का प्रयोग किया गया है, जो सीधा हृदय को स्पर्श करती है। पुनरुक्ति अलंकार (जैसे हदय नहीं है पत्थर है) से कविता को बल मिला है। रूपक और प्रतीकों का उपयोग (जैसे परवाने, काल-दीप) करके भावों को गहराई दी गई है। प्रेरणात्मक शैली अपनाई गई है, जिससे पाठकों में जोश और देशभक्ति की भावना जागती हैं।
आपकी कविता
देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए

वह हुदय नर्ही है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
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उत्तर :
जो जननी की मिट्टी भूल गया,
उस जीवन में उजियार नहीं।
जिसकी रग-रग में न बहे वतन,
उसमें कोई भी सार नहीं।
जो झुके न अपने ध्वज तले,
उसमें तेज़ उजागर नहीं।
हर बूंद लहू की बोले बस,
‘भारत माँ की जय’ प्यारी है।
हम बीर सपूत हैं भारत के,
हमको इसकी रखयाली है।
जिसने देश पे तन-मन बार दिया,
वो सच्चा है बलिदानी।
वह हुदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए

उत्तर :
देशभक्ति, मातृभूमि, राष्ट, ध्वज, वंदे मातरम्, सेना, संविधान, कर्त्तव्य, स्वतंत्रता।
(ख) विराम चिह्नों को समझें

“जो चल न सका संसार-संग”
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्गार हुआ”
कविता में आई हुई उपयुक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे ‘योजक चिह्न’ कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार, योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और, में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे, जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके, लिखिए। (संकेत – “जो चल न सका संसार के संग”)
उत्तर :
“वहती जिसमें रस की धार नहीं”
“जिससे न जाति का उद्धार हुआ”
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(ग) शब्द-मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल-दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है, जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए, तो वह गद्य जैसी लगने लगेगी; जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल-दीप हरदम जलता है।’
अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए, जिनमें ‘हैं शब्द का प्रयोग पहले हुआ हो। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुन: लिखिए।
उत्तर :
‘है’ का पहले प्रयोग वाली पंक्ति हैं जिसके राजा-रानी
पुन: लिखी हुईं पंक्ति राजा-रानी जिसके हैं
अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौदर्य में क्या परिवर्तन आया है? अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।”
उत्तर :
पुनः लिखी हुई पंक्तियाँ “हैं जिस पर ज्ञानी भी मरते,
है जिस पर दुनिया दीवानी।”
नोट पंक्तियों में आए परिवर्तन की चर्चा छात्र अपने साथियों से करें।
(घ) समानार्थी शब्द
कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढकर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

उत्तर :
भू-धरा, पृथ्वी
हृदय-दिल, जी
दुनिया-जग, संसार
दीप-दीपक, प्रदीप
तलवार-कृपाण, असि
पत्थर-पाधाण, पाहन
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कविता का शीर्षक
“वह हुदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर :
यदि मुझे इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो मैं चुनूंगा-‘वह हृदय नहीं है पत्थर है’। यह पंक्ति सीधे उस व्यक्ति की संवेदनहीनता को दर्शाती है, जिसमें अपने देश के प्रति प्रेम नहीं है।
यह पंक्ति कविता के भाव को स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करती है, इसलिए इसे शीर्षक के रूप में चुनना उपयुक्त होगा।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए, जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

उत्तर

(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर :
उपरोक्त सभी कार्य देश की प्रगति, सम्मान और स्वच्छता में योगदान देते हैं। ऐसे कार्य नागरिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना को बढ़ाते हैं, इसलिए इन्हें स्वदेश प्रेम की श्रेणी में रखा है।
हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हार्थों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भाबना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?

उत्तर :
विद्यार्थी ज्ञान, पुस्तक, मेहनत, अनुशासन
अध्यापक शिक्षा, किताब, प्रेरणा
कृषक हल, बीज, धरती, परिश्रम
चिकित्सक दवाई, सेवा भावना
बैज्ञानिक प्रयोगशाला, शोध, आविष्कार
श्रमिक औज़ार, श्रम, पसीना
पत्रकार – कलम, सत्य, कैमरा, निष्पक्षता
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अपनी भाषा अपने गीत
(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
तिरंगा झंडा-कब प्रसन्न और कब उदास
राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
झरोखे से
आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी।
अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए

साझी रसमझ
आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढकर पढ़िए। उत्तर छात्र स्वयं करें।