Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 2 दो गौरैया कहानी के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 2 Question Answer दो गौरैया
NCERT Class 8th Hindi Chapter 2 दो गौरैया Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 2 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi दो गौरैया Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस कहानी को थोड़ी और स्पष्टता से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है, क्योंकि
- घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
- घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
- पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
- घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
उत्तर :
- घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
- घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
2. कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
- माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
- लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
- जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
- मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
उत्तर :
जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
3. गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
- दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
- पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन माँ ने मना किया
- दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
- माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा, लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
उत्तर :
पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन माँ ने मना किया
4. माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
- माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
- माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
- माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
- माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
उत्तर :
माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
5. कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
- दूसरों पर निर्भर रहना
- असफलताओं से हार मान लेना
- अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
- संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
उत्तर :
अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
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(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।

उत्तर :

(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर
छात्र स्वयं करें।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) ‘अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।’
उत्तर :
इस पंक्ति में माँ की समझदारी झलकती है। जब कोई व्यक्ति या जीब किसी स्थान पर स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है और वहाँ अपना घर बसा लेता है, तो फिर उसे वहाँ से हटाना आसान नहीं होता। यह बात केवल गौरैयों पर नहीं, बल्कि जीवन की अन्य परिस्थितियों पर भी लागू होती है; जैसे- कोई आदत, भावना या संबंघ, ओ शुरू में कमजोर होते है, पर समय के साथ गहराई पकड लेते हैं। इसलिए शुरू में ही सोच-समझकर निर्णय लेना ज़रूरी होता है।
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(ख) ‘एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर होड़ देंगी।’
उत्तर :
यह पंक्ति पिताजी द्वारा कही गई है। इसमें एक प्रयोगवादी दृष्टिकोण दिखता है-यदि किसी को किसी स्थान पर जाने से बार-बार रोका जाए, तो वह स्वर्य ही उस स्थान को छोड़ देता है। लेकिन गौरैयों की जिजीविषा (ज़िद और जीवन के लिए संघर्ष) इस सोच को गलत साबित करती है। यह पंक्ति यह भी दिखाती है कि मनुष्य कभी-कभी यह सोच लेता है कि वह प्रकृति पर नियंत्रण रख सकता है, जबकि जीव-जंतु अपना स्थान स्वयं बना लेते हैं।
(ग) ‘किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।’
उत्तर :
यह कथन क्रोध और निराशा से भरे पिताजी द्वारा कहा गया है। यह मानव स्वभाव को दर्शाता है कि जब हम किसी को सहन नहीं कर पासे, तो उसे पूरी तरह से हटाने के लिए प्रयास करते हैं। यह पिताजी के कठोर स्वभाव को दर्शाता है।
सोच-विचार के लिए

पाठ को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा- घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लर्गी और क्यों?
उत्तर :
मुल्ने इस कहानी में माँ का पात्र सबसे अच्छा लगा, क्योंकि वे समझदार, सहनशील और करुणामयी हैं। उन्होने कभी भी गौरियों को हटाने की ज़िद नहीं की, बल्कि उनकी स्थिति को समझा। उन्होने पिताजी को मजाक में समझाया, गुस्से को हल्का किया और अंत में नन्हीं गैरैयों के लिए दरवाजे खोलकर सहायता की। उनकी संवेदनशीलता और व्यंग्य में भी गहराई थी, जिससे माहौल हल्का बना रहा।
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर :
गौरैयों ने घोसला बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में बनाया था। उन्होने वहीं घोंसला इसलिए बनाया, क्योंकि वहाँ उन्हें सुरक्षित और गर्म स्थान मिला, जहाँ वे अपने अंडे सुरक्षित रख सकें। साथ ही उनका घर में आना-जाना अपसान था और उन्हें किसी तरह का खतरा महसूस नहीं हुआ।
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(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हाँ, बिल्कुला कहानी में गौरैयों ने न केवल घोसला बनाया, बल्कि वहाँ अडे भी दिए और बच्चों को जन्म दिया। जब पिताजी ने घोसला तोडना चाहा, तब नन्हीं चिड़ियाँ ‘ची-ची’ कर पुकारने लर्गी, मानो अपने माँ-बाप को बुला रही हों। उनके माता-पिता तुरंत लौटकर आए और बच्चों को चुग्गा खिलाया। यह स्पष्ट करता है कि पशु-पक्षी भी अपने घर और परिबार को लेकर संवेदनशील होते है।
(घ) ‘अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।’ इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर :
इस कथन से स्पष्ट होता है कि पिताजी हठी (ज़िद्दी), दृब निश्चयी और आत्मसम्मानी व्यक्ति हैं। वे बार-बार गौरैयों को भगाने का प्रयास करते हैं और अपने नियंत्रण को बनाए रखना चाहते हैं। यह उनके आत्मविश्वास को भी दर्शाता है, लेकिन कही-कहीं उनकी सहनशीलता की कमी भी झसकती है।
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
(संकेत- कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)
उत्तर :
गौरैयों का व्यवहार तब बदल गया, जब अंडों से बच्चे निकल आए। पहले बे चहचहाते हुए गाना गा रही थी, पर बाद में गाना बंद कर दिया था। यह बदलाब इसलिए आया, क्योकि अब उनकी ज़िम्मेदारी बढ़ गई थी और वे चितित थी कि उनका घोसला कहीं नष्ट न हो जाए। बदलाव का मुख्य कारण पिताजी का कठोर स्वभाव भी था।
(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
उत्तर :
गैरैयों ने निम्न स्थानों से घर में प्रवेश किया
- दरवाजों के नीचे की खुली जगह से
- रोशनदान के टूटे हुए शीशे से
- खुले दरबाजे से
- खिड़की से
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर :
यह कहानी लेखक स्वयं सुना रहा है। यह बात इसलिए पता चलती है, क्योंकि कहानी मैं, मेरे पिताजी, मेरी माँ जैसे शब्दों में लिखी गई है। यह एक पहले व्यक्ति की शैली में है, जो स्पष्ट करता है कि लेखक स्वयं अपने अनुभब बता रहा है।
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(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर :
माँ यह वात अपने अनुभव और समझदारी के आधार पर कह रही थीं। उन्हें अनुभव था कि गौरैयों ने न केवल घोसला बना लिया है, बल्कि अंडे भी दे दिए हैं। अब वे किसी भी कीमत पर घर नहीं छोड़ेंगी। माँ यह भी जानती थी कि उन्हें बार-बार भगाकर भी हटाया नहीं जा सकता।
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं, जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
उत्तर :
यदि मैं उस घर में होता, जहाँ चिड़ियाँ अपना घोंसला बना रही हैं, तो मैं उन्हें देखकर बहुत खुश होता। मैं उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि उनकी सुरक्षा का ध्यान रखता। में शांत रहता, ताकि वे डरे नहीं और आराम से अपने वच्चों की देखभाल कर सकें। मुझे उनके चहकने की आबाज़ पसंद आती और मै उनके लिए दाना-पानी भी रखता।
(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
(प्राणियों के नाम – चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
उत्तर :
- चूहा लोग डर जाएँगे और उसे भगाने या मारने की कोशिश करेंगे, क्योंकि वह घर के सामान को नुकसान पहुँचा सकता है।
- कुत्ता यदि वह पालतू नहीं है, तो लोग पहले हरेंगे या उसे बाहर निकालने की कोशिश करेगे, लेकिन कुछ लोग उसे सहानुभूति से भी देख सकते हैं।
- मच्छर उसे तुरंत मारने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि बह बीमारी फैलाता है।
- बिल्ली यदि बाहर की है, तो उसे भगाया जाएगा, पर कई लोग उसे दूध भी दे सकते हैं।
- कबूतर लोग उसके आने से परेशान हो सकते हैं, क्योंकि वह गंदगी करता है, फिर भी कुछ लोग उसे दाना डालते हैं।
- कॉकरोच अधिकतर लोग इसे गंदा और हानिकारक मानते हैं, इसलिए तुरंत मारना चाहेंगे।
- तितली लोग उसे देखकर प्रसन्न होगे, उसे नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।
- मक्खी उसे हटाया जाएगा, क्योकि वह भोजन पर बैठती है और गंदगी फैलाती है।
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(ग) ‘मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।’ लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
उत्तर :
लेखक को यह देखकर विस्मय हुआ कि पंखे के ऊपर से दो नन्हीं गौरैयाँ सिर निकालकर ‘चीं-ची’ कर रही थीं। उन्हें आश्चर्य इस बात पर हुआ कि पिताजी द्वारा घोंसला तोड़ने की कोशिश के बाबजूद वहाँ बच्चे पहले ही जन्म ले चुके थे। उन्हें यह समझ नहीं थी कि अब सिर्फ माँ-वाप नहीं, उनके बच्चे भी उस घर का हिस्सा बन चुके हैं।
(घ) ‘माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हैसे जा रही थीं।’ माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर :
माँ को गौरैयों की उपस्थिति अच्छी लगती थी। वे उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती थीं। साथ ही वे पिताजी की चिड़ियों को भगाने की ज़िद और उस पर उनका मजाकिया नाच देखकर आनंद ले रही थीं।
बे समझदार थीं और जानती थी कि पिताजी इस लड़ाई में हारने वाले हैं, इसलिए उन्होने चुपचाप उन्हें स्वयं ही सबक सीखने दिया।
(ङ) ‘एक चूहा अंगीठी के पीचे बैहना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है, उसे सर्दी बहुत लगती है।’ लेखक ने चूहे के विशेष ब्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि?
(संकेत – आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
उत्तर :
हमारे मोहल्ले में एक बुजुर्ग व्यक्ति रोज़ सुबह-सुबह पार्क की एक ही बेंच पर बैठते है और गिलहरियों को बिस्कुट खिलाते हैं। वे बच्चों को मुस्कुराकर देखते है, लेकिन स्वयं बहुत चुपचाप रहते है। उनके इस व्यवहार से लगता है कि वे शायद अकेले हैं और उन्हें जीवों से प्रेम है। हो सकता है कि वे अपने किसी पुराने साथी को याद कर रहे हों या बच्चों और पशु-पक्षियों में सुकून पाते हों।
(च) ‘पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।’ सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर :
सराय और घर में निम्नलिखित अंतर हैं
| सराय | घर |
| सराय मुसाफिरों के ठहरने के लिए होता है। | घर अपने परिवार के लिए होता है। |
| सराय अस्थायी प्रवास होता है। | घर में स्थायित्व और अपनापन होता है। |
| सराय में अजनबी लोग आते-जाते रहते हैं। | घर में निजी जीवन और भावना जुड़ी होती है। |
| सराय में हर कोई स्वतंत्र होता है। | घर में नियम और मर्यादा होती है। |
| सराय सामान्य रूप से कार्य सुविधा के लिए होता है। | घर सुसज्जित व सजाया जाता है। |
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संवाद और अभिनय

नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए
(क) ‘बे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?’ -नन्हीं-नन्हीं दो गैरैयाँ क्या-क्या बोल रही होंगी?
उत्तर :
गीरैया 1 ची-चीं! अरे दीदी, यही तो है हमारा घर!
गौरिया 2 हाँ! और हमारे मम्मी-पापा कहाँ है? मुले भूख लगी है! गौरैया 1 चीं-ची! देखो-देखो, नीचे वो आदमी फिर लाठी ले आया! गीरैया 2 डरने की बात नहीं है, हम तो अब यहीं रहेगे! हमारा घर है ये!
(ख) ‘चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?’ घोसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?
उत्तर :
- गौरैया 1 ची-ची! दीदी, ये आदमी तो अजीव तरह से कूद रहा है।
- गौरिया 2 लगता है हमें डराने की कोशिश कर रहा है।
- गौरैया 1 लेकिन हमें तो बहुत मज़ा आ रहा है! क्या मज़ेदार नाच है!
- गौरिया 2 चीं-चीं! सच में! हम तो रोज़ इसी शो के लिए यहीं आएँगे!
(ग) ‘एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आई और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगी।’ जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया, तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?
उत्तर :
- गौरैया 1 अरे, ये घर तो कितना खुला-खुला है! देखो, बैठने के लिए पंखे के ऊपर जगह भी है!
- गौरेया 2 हौ! और न तो यहां कोई बड़ा पक्षी है, न ही बिल्ली। बहुत सुरक्षित लग रहा है।
- गौरैया 1 क्यों न यहीं अपना घर बनाएँ।
- गैरैया 2 तय रहा! कल से तिनके लाकर घोंसला बनाते हैं।
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(घ) ‘उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।’ गैरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?
उत्तर :
बच्चा 1 मम्मा, पापा! आप आ गए। हमें बहुत डर लग रहा था! बच्चा 2 हमने ऊपर से देखा कि कोई हमारा घर तोड़ रहा था! माँ गौरैया बेटा, घबराओ नहीं। हम अब यहीं हैं। ये हमारा घर है और हम इसे छोड़कर नहीं जाएँगे।
पिता गौरेया और ये लो चुग्गा। पहले पेट भरो, फिर गाना गाओ!
बदली कहानी
मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तर :
यदि घोसले में अंडों से बच्चे न निकलते, तो पिताजी शायद कुछ समय और गैरैयों को सहन करते, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता, पिताजी को उनकी उपस्थिति से परेशानी होने लगती। वह घोंसले को हटाने का फैसला करते। माँ थोड़ी दुःखी होतीं, पर कुछ न कहती, लेकिन जब पिताजी घोसले को हटाते समय उनके अंडे देखते तो संभवतः पिताजी का मन बदलता।
कहने के ढंग/क्रियाविशेषण
‘माँ खिलखिलाकर हँस दी।’
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रियाविशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रियाविशेषण शब्द है।
अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, ‘तू खड़ा क्या देख रहा है?’
उत्तर :
पिताजी ने नौकर को झिड़ककर आदेश दिया, ‘काम समय पर पूरा करो।’
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(ख) ‘देखो जी, चिड़ियों को मत्त निर्कालो’, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
उत्तर :
अध्यापक ने परीक्षा के नियमों को गंभीरता से समझाया।
(ग) ‘किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।’ उन्होने गुस्से में कहा।
छात्र ने गुस्से में अपनी पेंसिल ज़मीन पर फेंक दी।
अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रियाविशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
(संकेत -धीरे से, ज़ोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि)
उत्तर :
- धीरे से वह धीरे से कमरे में दाखिल हुआ, ताकि किसी को उसकी आहट न सुनाई दे।
- ज़ोर से जैसे ही बिजली गई, वच्चे जोर से चिल्ला उठे ‘अरे, लाइट चली गई!’
- अटकते हुए बह अटकते हुए जवाब देने लगा, जैसे कुछ छुपा रहा हो।
- चिल्लाकर
- बच्चा चिल्लाकर रोने लगा, क्योंकि उसका खिलौना टूट गया था।
- शरमाकर जब सभी ने उसकी तारीफ़ की, तो वह शरमाकर मुस्कुरा दी।
- सहमकर तेज़ आवाज़ सुनकर वह सहमकर पीछे हट गया।
- फुसफुसाते हुए दोनों बच्चे फुसफुसाते हुए आपस में कुछ गुप्त बातें कर रहे थे।
घर के प्राणी
कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है, जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?

उत्तर :
(क) बिल्ली – ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) चूहे – एक कमरे से दूसरे कमरे में दौड़ते रहते हैं, बर्तन गिराते हैं, डिब्बे खोलते हैं और प्याले तोड़ते हैं।
(ग) चमगादड – शाम होते ही कमरे के आर-पार पर फैलाए कसरत करने लगते हैं।
(घ) कबूतर – दिनभर ‘गुटर-गूँ, गुटर-गूँ’ का संगीत सुनाते रहते हैं।
(ङ) गौरेयाँ – घर का निरीक्षण करती हैं, घोसला बनाती है और बच्चों का पालन करती हैं।
हेर-फेर मात्रा का

‘माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।’ ‘पहले इन्हें उड्डा देते, तो उड़ जातीं’
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।
अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
- नाच-नाचा-नचा
- हार-हरा-हारा
- पिता-पीता
- चूक-चुक
- नीचा-नीचे
- सहसा-साहस
उत्तर :
नाच-नाचा-नचा
- नाच राधा का नाच बहुत सुंदर था।
- नाचा मै कल शादी में खूब नाचा।
- नचा गुरुजी ने बच्चों को मंच पर नचा दिया।
हार-हरा-हारा
- हार माँ ने सोने का हार पहन रखा है।
- हरा भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया।
- हारा बह दौड़ में सबसे पीछे रहकर हारा।
पिता-पीता
- पिता मेरे पिता बहुत ईमानदार व्यक्ति हैं।
- पीता वह हर दिन दूध पीता है।
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चूक-चुक
- चूक सुरक्षा में थोड़ी-सी चूंक भी भारी पड़ सकती है।
- चुक वह दो सेकह की देरी से समय पर पहुँचने से चुक गया। नीचा-नीचे
- नीचा उसने शर्म के मारे सिर नीचा कर लिया।
- नीचे बच्चे सीढ़ियों से नीचे बतर आए।
सहसा-साहस
- सहसा सहसा आकाश में बादल घिर आए।
- साहस संकट के समय साहस से काम लेना चाहिए।
वाद-विवाद
कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं
- ‘अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जाती।’
- ‘एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाज़े बंद कर दो। तथी ये निकलेंगी।’
- ‘देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।’
कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद का विषय है-‘माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।’
कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
कहानी की रचना
‘कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।’
इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अर्नेंक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर डूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर :
कहानी ‘दो गौरैया’ में कई विशेषताएँ दिखाई देती हैं; जैसे-
- हास्य और व्यंग्य से भरी भाषा।
- चिड़ियों के ब्यबहार का मानवीकरण।
- छोटी-छोटी बातों को रोचक और संवेदनशील बंग से कहना।
- पिताजी और माँ के संबादों के माध्यम से घरेलू माहौल को जीवंत बनाना।
- घर के प्राणियों के कार्यों का मानबीय अंदाज़ में वर्णन।
- संवादों के माध्यम से पात्रों के मनोभाबों को प्रकट करना।
- सह-अस्तित्व और करुणा का संदेश देना।
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(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।

उत्तर :
आपकी बात

पाठ से आगे
(क) ‘गैरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-ची’ करने लर्गी।’ आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर :
मैने अपने घर के आस-पास बहुत-से पक्षियों को आते-जाते देखा है; जैसे-गौरैया, कबूतर, बुलबुल आदि। वे कभी छज्जे पर बैठकर चहचहाते हैं, कभी पेड़ों की डालियों पर झूलते हैं और कभी-कभी जमीन पर दाना चुगते हैं। उनके व्यवहार में स्नेह, चिंता, आत्मीयता और सुरक्षा की भावना दिखाई देती है। वे अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं और उनके लिए बार-बार दाना लाते हैं। ये भाव मनुष्यों जैसे लगते हैं।
(ख) ‘कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुस्कराते रहे।’ कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है, तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
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(ग) परिवार के लोग गैरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते है, किंतु गैरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तर :
हाँ, एक बार मेरे घर के बाहर एक घायल कुत्ता बैठा था। पहले मैं उसे डर के कारण हटाने की सोच रहा धा, लेकिन जब मैने देखा कि वह चुपचाप पड़ा है और बहुत पीड़ा में है, तो मेरा मन बदल गया। मैंने उसे पानी और खाना दिया तथा पशु-सेवा संस्था को बुलाया। उस दिन मुझे महसूस हुआ कि जब हम किसी की स्थिति को समझते है, तो हमारा दृष्टिकोण भी बदल जाता है।
चिड़ियों का घोंसला
घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूर्जों को पालते हैं।
(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूँढिए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए।
(सावधानी उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है।)

उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
(ख) विभिन्न पक्षियों के घोसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।