हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 4 हरिद्वार पत्र के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.

Class 8 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer हरिद्वार

NCERT Class 8th Hindi Chapter 4 हरिद्वार Question Answer

कक्षा 8 हिंदी पाठ 4 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi हरिद्वार Question Answer

पाठ से

आइए, अब हम इस पत्र को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 1

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. ‘सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं’ का क्या अर्थ है?

  • लेखक के अनुसार, सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
  • लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
  • लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
  • लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।

उत्तर :
लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।

2. ‘वैराग्य और भक्ति का उदय होता था’ इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?

  • शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
  • आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
  • सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम

उत्तर :
मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

3. ‘पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की धाल से बढ़कर था’ इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?

  • संतुष्टि में सुख होता है।
  • सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
  • लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी।
  • पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिप्ट होता है।

उत्तर :
संतुष्टि में सुख होता है।

4. ‘एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।’ यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?

  • अंघविश्वास और लालच
  • मानबता और देश्रेम
  • सादगी और आत्मनिर्भरता
  • स्वच्छता और प्रकृति प्रेम

उत्तर :
सादगी और आत्मनिर्भरता

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 2

5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?

  • राजनीतिक
  • आध्यात्मिक
  • सामाजिक
  • प्राकृतिक

उत्तर :
आध्यात्मिक
प्राकृतिक

6. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?

  • कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
  • मुहावरों का अधिक प्रयोग
  • सरलता और चित्रात्मकता
  • जटिलता और संक्षिप्तता

उत्तर :
सरलता और चित्रात्मकता

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।

मिलकर करें मिलान

पाठ से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आपस में चर्चा कीजिए और इनके उपयुक्त संदर्मों से इनका मिलान कीजिए
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 3
उत्तर :

क्रम शब्द संदर्भ
1. हरिद्वार 3. यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है।
2. गंगा 5. यह भारतवर्ष की एक प्रधान नदी है, जो हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके अनेक नाम हैं; जैसे- भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी आदि।
3. भगीरथ 6. ये अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे। कहा जाता है कि ये घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। इसलिए गंगा का एक नाम ‘भागीरथी’ भी है।
4. चण्डिका 1. मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप।4. यह एक पेड़ का नाम है। यह दक्षिण भारत में बहुतायत से मिलता है। इस पेड़ की सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम में आती है। इसे ‘दारचीनी’ भी कहते हैं।
5. भागवत 2. यह अठारह पुराणों में से सर्वप्रसिद्ध एक पुराण है। इसमें अधिकांश श्रीकृष्ण संबंधी कथाएँ हैं।
6. दालचीनी 4. यह एक पेड़ का नाम है। यह दक्षिण भारत में बहुतायत से मिलता है। इस पेड़ की सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम में आती है। इसे ‘दारचीनी’ भी कहते हैं।

मिलकर करें चयन

पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं- एक सही और एक भ्रामक। अपने समूह में इन पर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 4
उत्तर :
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 16

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 5

(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है, जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
उत्तर :
इन पंक्तियों में लेखक ने हरिद्धार की पवित्रता को बहुत सुंदर ढंग से बताया है। वे कह रहे हैं कि वहाँ की साधारण घास ‘कुशा’ से भी ऐसी सुगंध आती है, जैसे दालचीनी या जावित्री से आती है। इससे पता चलता है कि हरिद्धार की भूमि पवित्र है जहाँ की घास भी विशेष है। मुझे लगता है कि लेखक यह कहना चाहते हैं कि जब जगह पुण्य और पवित्र हो, तो वहाँ की छोटी-छोटी चीज़ें भी विशेष हो जाती हैं।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ख) “अहा ! इनके जन्म भी धन्य हैं, जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
उत्तर :
इन पंक्तियों में लेखक पेड़ों की महानता की बात कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि पेड़ ऐसे होते हैं, जो मरने के बाद भी लोगों का भला करते हैं; जैसे-उनकी लकड़ी, पत्ते, बीज, यहाँ तक कि राख भी। इस पंक्ति से हमें यह सीखने को मिलता है कि पेड़ नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं। वे हमेशा देते ही रहते हैं, कुछ माँगते नहीं। मुझे लगता है कि लेखक ऐसे लोगों की भी तारीफ़ कर रहे हैं, जो पेड़ों जैसे होते हैं अर्थात् जो हर हाल में दूसरों के काम आते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…”
लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है?
कब-कब?
(संकेत – किसी स्थान से लौटने के बाद भी उसी के विषय में सोचते रहना)
उत्तर :
लेखक का यह वाक्य दर्शाता है कि वह हरिद्वार की यात्रा से इतना प्रभावित हुआ कि वहाँ से लौट आने के बाद भी उसका मन वहीं रमा रहा। इसका अर्थ है कि हरिद्वार की सुंदरता, वातावरण, आध्यात्मिक शांति और अनुभव लेखक के हृदय में गहराई से बस गए थे। मैंने भी ऐसा अनुभव तब किया, जब मैं शिमला गया था। वहाँ की ठंडी हवा, बर्फबारी और पहाड़ियों की शांति ने मुझे बहुत भाया। लौटकर भी कई दिन तक मेरा मन वहीं अटका रहा।

(ख) “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।”
लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है? क्या अब भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
लेखक का यह कथन आज के समाज में बहुत हृद तक दुर्लभ हो गया है। आज के समय में अधिकतर लोग संतोष के स्थान पर लालच में विश्वास करते हैं। फिर भी कुछ लोग अब भी संतोषी होते हैं; जैसे – गाँवों में कई बुज़ुर्ग या मंदिरों में कार्यरत पुजारी, जो कम में भी खुश रहते हैं और ज्यादा की चाह नहीं करते।
उदाहरण के लिए, हमारे मोहल्ले में एक बुजुर्ग बाबा जी हैं, जो बहुत कम साधनों में भी बहुत संतुष्ट रहते हैं। वे हमेशा कहते हैं कि ‘जितना मिला, उतना बहुत है।’

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ग) “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।”
आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है? उस स्थान में कौन-कौन सी विशेषताएँ होंगी, जो उसे ‘टिकने योग्य’ बनाती होंगी?
(संकेत – केवल आराम, सुविधा या कोई और कारण भी।)
उत्तर :
लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ इसलिए कहा, क्योकि वह स्थान केवल आरामदायक ही नहीं, बल्कि सुंदर, शांत, पवित्र और अनुभवों से भरपूर था। वहाँ से गंगा तट, पहाड, हरियाली और हरिद्धार का दिब्य वातावरण देखा जा सकता होगा।
इसका तात्पर्य हैं कि लेखक को उस स्थान पर शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और आत्मिक संतोष प्राप्त हुआ।
इसलिए वह स्थान केवल ठहरने के लिए नहीं, वल्कि आत्मिक आनंद के लिए भी श्रेष्ठ था।

(घ) “फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़;
यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
इस वाक्य के माध्यम से आपको वृक्षों के महत्त्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझ रही हैं?
उत्तर :
इस वाक्य के माध्यम से वृक्षों के महत्व को बहुत सुंदर बंग से बताया गया है। दृक्ष अपने जीवनकाल में ही नहीं, बल्कि मरने के बाद भी मनुष्य के काम आते हैं।
उनसे हमें फल, फूल, छाया, लकड़ी, दबाइयाँ, बीज, गोंद आदि प्राप्त होते हैं और इनकी राख भी उपयोगी होती है।
इससे यह सीख मिलती है कि हमें वृक्षों की सेवा, त्याग और उपयोगिता से प्रेरणा लेकर उनका संरक्षण करना चाहिए। वृक्ष नि:स्वार्थ भाव से सबका कल्याण करते हैं।

अनुमान और कल्पना से

(क) ‘यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।’
कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?
उत्तर :
यदि मैं हरिद्वार में होता, तो सबसे पहले गंगा नदी के पवित्र तट पर जाकर स्नान करता। उसके बाद हर की पौड़ी पर आरती में भाग लेता और वहाँ की दिव्यता को अनुभव करता। मैं आसपास के सुंदर हरे-भरे पर्वतों की ओर घूमने जाता, शांति से बैठकर ध्यान करता और प्राकृतिक सौदर्य का आनंद लेता। मैं मंदिरों के दर्शन करता, स्थानीय संस्कृति और व्यंजन का आनंद लेता और अपने अनुभवों को डायरी में भी लिखता। हरिद्वार की यह यात्रा मेरे लिए एक आध्यात्मिक और मानसिक शांति देने वाला अनुभव होती।

(ख) ‘जल के छलके पास ही ठंढे-ठंटे आते थे।’
कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर :
जब मैं गंगा के तट पर झैद्यन्था, ठंडी-ठंडी हवा मेरे चेहरे को छू रही थी। गंगा की लहरें जब किनारे से टकराती थी, तो उनके छीटे मेरे चेहरे पर आकर गिरते थे। वे छीटे इतने ठंडे और शुद्ध लगते थे कि जैसे माँ के हाथों का स्पर्श हो। मन को एक गहरा सुकून मिल रहा था। आसपास मंदिरों की घंटियाँ बज रही थीं और पंडित मंत्र पढ़ रहे धे। ऐसा लग रहा था जैसे समय थम गया हो और केवल शांति शेष रह गई हो।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ग) ‘सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।’
यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?
उत्तर :
यदि पेड-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यबहार करने लगें, तो वे केवल उन्हीं को फल और छाया देंगे, जो उनका ध्यान रखेंगे। जो लोग उन्हें नुकसान पहुँचाएँगे, वे शायद उनसे रूठ जाएँ और उन्हें फल न दें। लेकिन अगर बे सज्जन मनुष्य की तरह व्यवहार करें, तो बे बिना भेदभाव के सबको फल, फूल और छाया देंगो इससे समाज में उदारता और दया का भाव और बढ़ेगा।

(घ) ‘यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं- एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से!’
इस पाठ में ‘गंगा’ शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?
उत्तर :
गंगा को हमारे देश में माँ का दर्जा दिया गया है। उसे पवित्र और देवी के रूप में माना गया है। इसलिए उसके नाम के साथ सम्मान सूचक शब्द ‘श्री’ और ‘जी’ जोड़े गए हैं। इससे पता चलता है कि लेखक गंगा के प्रति श्रद्धा और आदर भाव रखते हैं। यह हमारी संस्कृति में नदी को भी माता समान मानने की परंपरा को दर्शाता है।

(ङ) कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणवाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।
उत्तर :
यदि मैं हरिद्धार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित मित्र के साथ जाता, तो मै उनकी सुविधा का पूरा ध्यान रखता।

  • दृष्टिबाधित मित्र के लिए मैं हर जगह उनका हाथ पकड़कर उन्हें रास्ता बताता और मंदिरों का वातावरण उन्हें शब्दों में समझाता।
  • श्रवणबाधित मित्र के लिए मैं उन्हें लिखकर या इशारों में हर जानकारी देता।
  • उन्हें गंगा का स्पर्श महसूस कराता, आरती के समय दीया हाथ में पकड़ाकर ठनके लिए वह अनुभव जीवंत बनाता।
  • साथ ही उन्हें भीड्भाइ से सुरक्षित दूरी पर रखता और आरामदायक जगह बैठाता। इस तरह हम दोनों की यात्रा आनंददायक होती।

लिखें संवाद

(क) ‘मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।’
लेखक और कल्लू जी के बीच हृदिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
उत्तर :

  • लेखक (गंगा की ओर देखते हुए) अहा! क्या दृश्य है कल्सू जी! यह गंगा जल तो जैसे सीषे स्वर्ग से बहकर आ रहा हो।
  • कल्लू जी सच कहते हो मित्र, यह पुण्यभूमि ही कुछ ऐसी है। मेरे मन का हर दु:ख बह गया लगता है।
  • लेखक और देखो ये घाट… कितनी श्रद्धा से लोग स्नान कर रहे हैं। लगता है जैसे सब कुछ यहीं छोड़ देना चाहिए।
  • कल्लू जी हाँ, और देखो न, ये पंडे भी कितने संतोषी हैं। एक पैसे को लाख मान लेते हैं। अब ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं?
  • लेखक (मुस्कुराते हुए) और तुम्हारी वातों में तो मिठास है कल्लू जी! हरिद्धार का असर तुम्हारे शब्दों में भी दिख रहा है।
  • कल्लू जी (हंसते हुए) मित्र, मैं तो पहले ही परमानंदी था, अब तो लगता है स्वर्य गंगा जी ने हृदय में शांति भर दी है।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ख) ‘यह भूमि तीनों ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।’
लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद् तैयार
कीजिए- जैसे पर्वत बोल रहे हों।
उत्तर :

  • लेखक ओ विशाल पर्वतों! तुम्हारा यह हरियालापन मन को शीतलता देता है। तुम यहाँ की शोभा हो।
  • पर्वत धन्यबाद प्रिय यात्री! हम सदियों से बहीं खड़े हैं, हरिद्धार की रक्षा करते हुए।
  • लेखक तुम तो मानो धरती के प्रहरी हो। हर दिशा से तुमने इसे अपनी बाँहों में समेटा है।
  • पर्वत हाँ, हम ही तो हैं, जो हरियाली, शुद्ध वायु और ठंडक लाते हैं। हमारे ऑचल में ही गंगा की यात्रा शुरू होती है।
  • लेखक तुम्हारे बिना तो यह भूमि अधूरी होती। मैं नतमस्तक हुं तुम्हारी शाति, शक्ति और सौंदर्य के आगे।
  • पर्वत और हम धन्य हैं कि हमें ऐसे यात्रियों की दृष्टि मिलती है, जो प्रकृति को समझते और सराहते हैं।

‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 6

इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए

  • विशेष आश्चर्य का विषय यह है कि यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देबता नहीं।
  • यों तो बैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैं।

आप जानते ही हैं कि एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘है’ का प्रयोग किया जाता है और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का। सोचिए, ‘गंगा’ शब्द एकवचन है, फिर भी इसके साथ ‘हैं क्यों लिखा गया है?
इसका कारण यह है कि कभी-कभी हम आदर-सम्मान प्रदर्शित करने के लिए एकवचन संज्ञा शब्दों को भी बहुवचन के रूप में प्रयोग करते हैं। इसे ‘आदरार्थ बहुवचन’ प्रयोग कहते हैं। उदाहरण के लिए,

  • मेरे पिताजी सो रहे हैं।
  • भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं।

अब ‘आदरार्थ बहुबचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं _______ बे अभी सभा में उपस्थित ।
2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते _______ हमें उनका कहना मानना चाहिए।
3. मेरी बहन बाजार जा रही _______ वहाँ से किताबें ले आएगी।
4. बाहर फेरीवाला _______ । _______ बुला लाओ।
5. डाकिया जी आए _______ । उन्हें भी बुला लाओ।
6. आप तो बहुत दिन बाद आए _______ का स्वागत है।
7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान _______ से परामर्श लेना चाहिए।
8. आपके माता-पिता कहाँ _______ ? क्या मैं _______ से मिल सकता हूँ?
9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक _______ हम _______ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर _______.
उत्तर :
1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं हैं, वे अभी सभा में उपस्थित हैं।
2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, हमें उनका कहना मानना चाहिए।
3. मेरी बहन बाजार जा रही है, वहाँ से किताबें ले आएगी।
4. बाहर फेरीवाला आया है। उसे बुला लाओ।
5. डाकिया जी आए हैं। उन्हें भी बुला लाओ।
6. आप तो बहुत दिन बाद आए हैं, आप का स्वागत है।
7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं, उन से परामर्श लेना चाहिए।
8. आपके माता-पिता कहाँ हैं? क्या मैं डन से मिल सकता हूँ?
9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक हैं, हम उन से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर रहा है।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

भावों की पहचान

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 7

नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। सोचिए कि इनमें कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है? पहचानिए और चुनकर लिखिए।
1. उस समय के पर्थर पर का भोजन का सुख सोने की धाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।
2. चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।
3. पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।
4. हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।
5. सज्जन ऐसे कि परथर मारने से फल देते हैं।
उत्तर :
1. संतोष
2. ज्ञान, वैराग्य और भक्ति
3. संतोष
4. शाति और आश्चर्य
5. दया और परोपकार

काल की पहचान

‘यहाँ हर की पौड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है।’
आप जानते ही होंगे कि काल के तीन भेद होते हैं- भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल। परस्पर चर्चा करके पता लगाइए कि ऊपर दिए गए वाक्य में कौन-सा काल प्रदर्शित हो रहा है? सही पहचाना, यह वाक्य वर्तमान काल को प्रदर्शित कर रहा है।

(क) नीचे दी गई पाठ की इन पंक्तियों को पढ़कर बताइए, इनमें क्रिया कौन-से काल को प्रदर्शित कर रही है?

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 8
(भूतकाल/वर्तमान/भविष्य)
1. निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा। _______
2. यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है। _______
3. वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं। _______
4. चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उद्य होता था। _______
5. में दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। _______
उत्तर :
1. भविष्य काल
2. वर्तमानकाल
3. वर्तमान काल
4. भूतकाल
5. भूतकाल

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ख) अब इन वाक्यों के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए और नए वाक्य बनाइए।
उत्तर
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 17

पत्र की रचना

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 9

‘और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ..’ इस पंक्ति में लेखक संपादक महोदय को संबोधित करके अपनी बात लिख रहे हैं। आप जानते ही होंगे कि पत्र जिस व्यक्ति के लिए लिखा जाता है, उसे संबोधित किया जाता है। पत्र के अंत में अपना नाम लिखा जाता है, ताकि पत्र पाने वाले को पता चल सके कि पत्र किसने लिखा है। नीचे इस पत्र की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं से जुड़े वाक्यों से इनका मिलान कीजिए

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 10

आप एक विशेषता को एक से अधिक बाक्यों से भी जोड़ सकते हैं।
उत्तर
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 18

पत्र

आपने जो यात्रा-वर्णन पढ़ा है, इसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक संपादक को पत्र के रूप में लिखकर भेजा था। आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए।
उत्तर नमस्ते पवन,
आशा है तुम ठीक होगे!
मैं तुम्हें अपनी हाल ही की पहाड़ों की यात्रा के बारे में बताने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ यह यात्रा मेरे लिए अविस्मरणीय थी।
पिछले हप्ते मैं अपने परिवार के साथ शिमला घूमने गया था। दिल्ली की गर्मी से दूर, वहाँ का मौसम बहुत ही सुहावना था।
चारों ओर हरे-भरे पहाइ और उन पर चिछी धुँध ने मन मोह लिया। हमने वहाँ टॉय ट्रेन का भी आनंद लिया, जिसकी घीमी रफ्तार से यात्रा करते हुए आस-पास के नज़ारे देखना एक अद्भुत अनुभव धा।
शिमला की माल रोड पर शाम को टहलना और स्थानीय ब्यंजनों का स्वाद लेना भी बहुत अच्छा लगा। वहाँ की शांति और ताजी हवा ने मन को बहुत सुकून दिया। हमने जाखू मंदिर के लिए ट्रेकिंग भी की, जहाँ से पूरे शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। रास्ते में कुछ सरारती बंदरों से भी मुलाकात हुई।
कुल मिलाकर यह यात्रा तरोताजा करने वाली और यादगार रही। मुझे उम्मीद है कि तुम भी जल्द ही कहीं घूमने जाओगे और अपने अनुभव मुझसे साझा करोगे।
अपने परिवार में सभी को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र,
विजय

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में ‘हरिद्धार’ से जुड़े शब्द अपने मन से या पाठ से चुनकर लिखिए।
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 11
उत्तर गंगा, पहाड़, स्नान, मंदिर, हर की पौड़ी, पवित्र, यात्रा।

लेखन के अनोखे तरीके

(क) ‘हरिद्वार’ पाठ में लेखक ने हरिद्धार के अपने अनुभवों को बहुत ही साहित्यिक और कल्पनाशील भाषा में प्रस्तुत किया है, जिसमें कई स्थानों पर उन्होंने तुलनात्मक वाक्यों के माध्यम से दृश्यों का वर्णन किया है; जैसे- हरी-भरी लताओं की तुलना सज्जनों से इस प्रकार की गई है
‘पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।’
नीचे कुछ तुलनात्मक वाक्य दिए गए हैं। पाठ में ढूँढिए कि इन तुलनात्मक बाक्यों को लेखक ने किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा है अर्थात् विशिष्टता प्रदान की है?

प्रश्न 1.
वृक्षों की तुलना साघुओं से की गई है।
उत्तर :
यहाँ लेखक ने वृक्षों को ‘एक पैर से खड़े तपस्या करते’ और ‘साधुओं की भौति घाम, ओस और वर्षा सहते’ हुए चित्रित किया है। यह उनके धैर्य, सहनशीलता और परोपकारी स्वभाव को साधुओं के समान दिखाता है, जो फल, फूल आदि देकर दूसरों की इच्छा पूरी करते हैं।

प्रश्न 2.
गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से की गई है।
उत्तर :
लेखक ने सिर्फ ‘चीनी’ से तुलना नहीं की, बल्कि ‘चीनी के पने को बरफ़ में जमाया हुआ’ बताया है। यह गंगाजल की मिठास के सांथ-साथ उसकी शीतलता और शुद्धता को भी व्यक्त करता है, जिससे एक विशेष प्रकार के मीठे और ठंडे पेय की कल्पना होती है।

प्रश्न 3.
हरियाली की तुलना गलीचे से की गई है।
उत्तर :
यहाँ लेखक ने हरियाली को केवल ‘हरे गलीचे’ से नहीं, बत्कि ‘हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत’ के रूप में चित्रित किया है। यह न केवल हरियाली की सुंदरता और कोमलता को दर्शाता है, वल्कि उसे यात्रियों के लिए एक आरामदायक और स्वागत योग्य स्थान के रूप में भी प्रस्तुत करता है।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

प्रश्न 4.
नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश (कीर्ति) से की गई है।
उत्तर :
लेखक ने गंगा की धारा को केवल भगीरथ के यश से नहीं, बल्कि ‘उज्ज्यल कीर्ति की लता-सी’ बताया है। यह तुलना गंगा की पविक्रता, उसके निरंतर प्रवाह (लता की तरह फैलना) और भगीरथ के महान कार्य की अमरता को बहुत ही सुंदर और काव्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है। ‘लता’ शब्द निरंतरता और विस्तार का भाब भी देता है।

(ख) ‘मैं उस पुण्य भूमि का वर्णन करता हैं, जहाँ प्रवेश करने ही से मन शुद्ध हो जाता है।’
‘पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।’
उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यान से देखिए, ये आज की हिंदी की तरह नहीं लिखी गई हैं। इसे लेखक ने न केवल अपनी शैली में लिखा है, अपितु इसमें प्राचीन हिंदी भाषा की छबि भी दिखाई देती है। नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं आप इन्हें आज की हिंदी में लिखिए।
1. ‘इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।’
2. ‘वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिह्ही थी।’
3. ‘यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं।’
4. ‘मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।’
5. ‘यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागबत का पारायण भी किया।’
6. ‘उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की धाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।’
7. ‘निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।’
उत्तर :
1. आज की हिंदी इन पेड़ों पर कई रंग के पक्षी चहचहाते हैं और शहर के क्रूर शिकारियों से बिना डरे आनंद मनाते हैं।
2. आज की हिंदी बारिश के कारण चारों ओर हरियाली ही दिख रही थी, जैसे यात्रियों के आराम के लिए हरे मखमल का कालीन बिछा हो।
3. आज की हिंदी यह इतना पवित्र तीर्थ है कि इच्छा और क्रोध के वश में रहने वाले (ऐसे दुर्गुणी) मनुष्य वहाँ नहीं रहते हैं।
4. आज की हिंदी बहाँ जाते ही मेरा मन इतना प्रसन्न और शुद्ध हो गया कि उसका वर्णन करना मुश्किल है।
5. आज की हिंदी यहाँ रात में प्रहण लगा और हम सबने ग्रहण में बड़े आनंद के साथ स्नान किया और दिन में भागवत का पाठ भी किया।
6. आज की हिंदी उस समय पत्थर पर भोजन करने का सुख सोने की थाली में किए गए भोजन से कहीं ज्यादा था।
7. आज की हिंदी मुझे विश्वास है कि आप इस पत्र को प्रकाशित करेंगे।

(ग) इस रचना में हरिश्चंद्र जी ने कहीं-कहीं प्राचीन वर्तनी का प्रयोग किया है; जैसे- शिखर के लिए शिषर, यात्रियों के लिए जात्रियों। ऐसे शब्दों की सूची बनाइए। आप इन शब्दों को कैसे लिखते हैं? कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर :
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 19

पाठ से आगे

आपकी बात

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 12

प्रश्न 1.
‘मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके… भोजन किया।’
क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
उत्तर :
हाँ, मैने एक बार परिवार के साथ नदी के किनारे पिकनिक के दौरान खुले वातावरण में भोजन किया था। वहाँ बहती हुई नदी, चारों ओर हरियाली और पक्षियों की मधुर आबाज़ ने भोजन को और भी स्वादिष्ट बना दिया।
घर के खाने की तरह वहाँ पर सुविधा तो नहीं थी, लेकिन प्रकृति के बीच भोजन करने का आनंद कुछ अलग ही था। वह अनुभव बहुत ही ताज़गी भरा, आनंददायक और यादगार रहा। घर के खाने में जो सुकून मिलता है, वहीं बाहर खाने में नई तरह की खुशी और उत्साह होता है।

प्रश्न 2.
‘उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कर्हीं बढ़ के था।’
आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए।
उत्तर :
हाँ, मेरे जीवन में एक बार ऐसा अवसर आया था, जब मुझे एक बहुत ही सामान्य वस्तु ने गहरा सुख दिया। एक बार बारिश के मौसम में बिजली चली गई थी और सब कुछ अंधेरे में डूबा हुआ था। उस समय मेरी दादी माँ ने दीये की रोशनी में हमें पुरानी कहानियाँ सुनाईं। वो दीया, जो साधारण सा धा, उस क्षण हमारे लिए रोशनी और सुकून का स्रोत बन गया। उसकी हल्की लौ में दादी की कहानियाँ सुनना बहुत ही खास अनुभव था। उस दिन मुझे समझ आया कि असली बुशी महुंगी चीज़ों में नहीं, बल्कि सादगी और अपनेपन में छुपी होती है।

प्रश्न 3.
‘हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।’
आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है, जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो? उस स्थान की कौन-सी बातें आपको अच्छी लर्गी?
उत्तर :
मुझे मंदिर जाकर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है। जब भी मैं मंदिर जाता हैं, वहाँ की शांति, भजन की मधुर ध्वनि और फूलों की खुशबू मन को बहुत सुकून देती है।
एक बार मैं अपने माता-पिता के साथ एक पहाड़ी मंदिर गया था। वहाँ का वातावरण बहुत शांत, स्वच्छ और भक्तिभाव से भरा हुआ था। वहाँ जाकर मेरा मन झांत हो गया था। मुझे वहाँ की शुद्ध हवा, पहाडों का सुंदर दृश्य और लोगों का प्रेमभाव बहुत अच्छा लगा। ऐसे स्थानों पर जाकर मन को नई ऊर्जा और सकारात्मकता मिलती है।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

प्रश्न 4.
पाठ में वर्णित है यहाँ के वृक्ष ‘फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।’
क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है, जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं? क्यों?
उत्तर :
हाँ, मेरे जीवन में नीम के पेड़ से मेरा विशेष जुड़ाव है। हमारे घर के पास एक पुराना नीम का पेड़ है, जिसके नीचे मैं अक्सर बैठकर पढ़ाई करता हुँ या अपनी बातें सोचता हूँ।
नीम का पेड मुले बहुत सुकून देता है। उसकी छाया ठंडी होती है, पत्ते हवा में सरसराते हैं और उसमें एक विशेष प्रकार की शांति होती है। इसके अतिरिक्त नीम स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है।
इस पेड से मुझे न केवल प्रकृति की सुंदरता का अनुभब होता है, बल्कि यह मुक्ने हमेशा स्थिर और शांत रहने की प्रेरणा भी देता है।

प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण
‘यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है….’
आपने पत्र में पड़ा कि हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इस सौंदर्य को बनाए रखने में प्रत्येक मानव की महत्तपूर्ण भूमिका है। इस विषय में अपने समूह में चर्चा कीजिए। इसके बाद अपने समूह के साथ मिलकर ‘तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!’ विषय पर जन-जागरूकता पोस्टर बनाइए।
उत्तर :
जन-जागरूकता पोस्टर
तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!
संदेश हम तीर्थ स्थलों को तो पवित्र मानते हैं, परंतु पूरी पृथ्वी ही, हमारी माँ है – इसका संरक्षण भी हमारा धर्म है।

हम सबकी ज़िम्मेदारी

  • तीर्थ स्थलों पर कूड़ा न फेंके
  • गंगा जैसी नदियों को प्रदूधित न करें
  • पेड़ लगाएँ और प्रकृति से प्रेम करें
  • प्लास्टिक का उपयोग बंद करें
  • तीर्थ यात्राओं में स्वच्छता बनाए रखें
  • जल और ऊर्जा का अपव्यय न करें

नारा ‘हरिद्वार ही क्यों, हर द्वार स्वच्छ हो, धरती माँ की हर ज़मीन पावन हो!’
हमारा संकल्प ‘हम तीर्थ स्थलों की ही नहीं, पूरी पृथ्वी की रक्षा करेगे!’

स्वास्थ्य और योग

‘चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।’ अनेक लोग आज भी मन की शांति, स्वास्थ्य लाभ और भक्ति के लिए तीर्थ और पर्वतीय स्थानों की यात्रा करते हैं। मन की शांति और स्वास्थ्य के लिए हमारे देश में हजारों वर्षों से योग भी किया जाता रहा है।

(क) 5 मिनट ध्यान लगाकर या मौन बैठकर अपने आस-पास की ध्वनियों को सुनिए, अपनी श्वास पर ध्यान दीजिए तथा ध्यान को केंद्रित करने का प्रयास कीजिए। इस अनुभव के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर :
ध्यान का अनुभव
आज मैने पाँच मिनट तक ध्यान लगाने का प्रयास किया। सबसे पहले मैं एक शांत जगह पर बैठ गया और अपनी आँखे बंद कीं। आरंभ में बहुत सी आवाजें सुनाई दीं – पक्षियों की चहचहाहट, पत्तों की सरसराहट और दूर से आती गाड़ियों की आवाज़ा धीरे-धीरे मैने अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित किया। हर श्वास को अंदर लेते और बाहर होड़ते समय मन शांत होता गया। विचार आ-जा रहे थे, पर मैने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की, बस ध्यान वापस श्वास पर ले आता रहा। कुछ ही समय में मन हल्का और शांत अनुभव करने लगा। शरीर और मन दोनों में एक अलग प्रकार की ताज़गी महसूस हुई। यह अनुभव मुझे यह समझाने में मदद करता है कि क्यों योग और ध्यान को हमारे देश में आत्मिक और मानसिक शांति का माध्यम माना जाता है। अब मैं नियमित रूप से कुछ समय मौन बैठकर ध्यान करने का प्रयास करूंगा।

(ख) ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के उपलक्ष्य में अपने विद्यालय के कार्यक्रमों को बताने के लिए एक ‘सूचना’ लिखिए, जिसे सूचना-पट्ट पर लगाया जा सके।
उत्तर
सूचना
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह
सभी छात्र-छात्राओं को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है
समय : प्रात: 6:30 बजे से 8:30 बजे तक
स्थान : विद्यालय का प्रांगण
गतिविधियाँ

सामूहिक योग अभ्यास
योग पर वक्तव्य प्रतियोगिता
चित्रकला बनारा लेखन प्रतियोगिता (योग विषय पर)
योग गुरु द्वारा विशेष व्याख्यान

सभी विद्यार्थियों से अनुरोध है कि वे योगा ड्रेस में समय पर उपस्थित रहें और पूरे उत्साह के साथ भाग लें।

विद्यालय प्रधानाचार्य
तिधि 15 जून, 20 XX
स्थान सूचना-पट्ट/मुख्य प्रवेश द्वार

सज्जन वृक्ष

‘सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।’
आप जानते ही हैं कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, किंतु हमारे ही कायों के कारण वे कम होते जा रहे हैं। आइए, पेड़-पौधों को अपना मित्र बनाएँ।

(क) एक पौधा लगाइए और उसकी देखभाल कीजिए ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके। उसे एक नाम दीजिए और उसका मित्र बनिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।

(ख) उसके बारे में अपनी दैनंदिनी में नियमित रूप से लिखिए।
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।

अपने शब्द

‘शीतल वायु… स्पर्श ही से पावन करता हुआ संचार करता है।’
आइए, एक रोचक गतिविधि करते हैं। ‘शीतल’ शब्द को केंद्र में रखिए और उसके चारों ओर ये चार बातें लिखिए

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 13
अब इसी प्रकार आपके समूह का प्रत्येक सदस्य इस पत्र से एक-एक शब्द चुनकर उसके लिए ऐसा ही शब्द-चित्र बनाए।
उत्तर :
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 20

यात्रा के व्यय की गणना

इस पत्र में आपने हरिद्वार की एक यात्रा का वर्णन पढ़ा है। मान लीजिए कि आपको अपने मित्रों या अभिभावकों के साथ अपनी रुचि के किसी स्थान की यात्रा करनी है। उस स्थान को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको ₹ 1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
उत्तर
मुझे मधुरा-वृंदावन जाने का अवसर मिला है और इसके लिए मुझे ₹ 1000 मिले हैं। मैने पूरा खर्च इस प्रकार बाँटा है
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 21

(ख) मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेंगे और कर्यों? (संकेत सोचिए, क्या वह आवश्यक है? बज

ट कैसे सँभालेंगे?)
उत्तर :
मैं इस यात्रा में एक छोटी-सी बाँसुरी खरीदना चाहूँगा, क्योकि यह मथुरा और श्रीकृष्ण जी से जुड़ी एक खास चीज़ है। बाँसुरी देखकर मुझे यह यात्रा हमेशा याद रहेगी। इसका आकार भी छोटा होता है और इसे संभालना आसान है। बजट की बात करें तो मैने पहले से ही ₹ 150 बाँसुरी के लिए रखे हैं, इसलिए मेरा बजट नहीं बिगडेगा। साथ ही यह केवल सजावट की चीज़ नहीं, वल्कि हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास से भी जुड़ी है।

यात्रा सबके लिए

(क) कल्पना कीजिए कि कुछ मित्रों का समूह एक यात्रा पर जा रहा है। आप एक मार्गदर्शक या टूरिस्ट गाइड हैं। आप इन सबकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4 14

उपर्युक्त चित्र में सबकी अलग-अलग आवश्यकताएँ हो सकती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए सोचिए कि वहाँ पहुँचने, घूमने, भोजन आदि में आप कैसे सहायता करेंगे?
उत्तर :
उपर्युक्त चित्र में विभिन्न उम्र, क्षमता और आवश्यकताओं वाले लोग है; जैसे-नेत्रहीन व्यक्ति, दिव्यांग व्यक्ति, बुजुर्ग, छोटे बच्चे, महिलाएँ आदि। इन सभी की अलग-अलग ज़रूरते हो सकती हैं। ऐसे में मैं निम्नलिखित प्रकार से इनकी सहायता कर्रुँगा 1. वहाँ पहुँचने में सहायत्म नेत्रहीन व्यक्ति को रास्ता बताकर हाथ पकडकर ले जाऊँगा, व्हीलचेयर वाले व्यक्ति के लिए रैंप या समतल रास्ता सुनिश्चित करूँगा।
2. घूमने में सहायता श्रवणबाधित व्यक्ति को संकेतों और इशारों से जानकारी दूँगा, बुजुगों को आराम देने के लिए बैठने की व्यवस्था करूँगा।
3. भोजन में सहायता छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए हल्का और सुपाच्य भोजन लूँगा, भोजन वितरण में प्राथमिकता दूँगा।
4. सूचना देना लिखित पर्चें बा चित्रों के माध्यम से उन लोगों को दिशा और जानकारी दूँगा, जो सुन या देख नहीं सकते।
5. समूह में समन्बय बनाए रखना सभी को एकत्रित और सुरक्षित रखूंगा, ताकि कोई खो न जाए।
इस प्रकार, मैं हर किसी की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए एक सहयोगी और संवेदनशील यात्री बनूँगा।

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

(ख) अपने किसी मित्र के साथ बिना बोले संवाद कीजिए-संकेतों से। अब सोचिए कि यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए क्या-क्या आवश्यक होगा?
उत्तर :
यदि मैं अपने मित्र के साथ बिना बोले संवाद करूँ, तो मैं हाथ के संकेत, चेहरे के हाव-भाव, सिर हिलाने, इशारों, चित्रों या लिखकर बात करने का सहारा लूँगा।
अव सोचें तो यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए निम्नलिखित आवश्यकताएँ हो सकती हैं

  • संकेतों या इशारों से संवाद करने वाला साथी
  • सूचनाओं के लिए लिखित बोर्ड या डिजिटल संकेत
  • महत्त्वपूर्ण जानकारी देने वाले चित्र सकेत (पिक्टोग्राम्स)
  • आपातकालीन स्थिति में सहायता के लिए जागरूक सहयात्री
  • स्थान, दिशा और सुरक्षा से संबंधित लिखित जानकारी
  • ट्रेन/बस की घोषणा का दृश्य रूप (स्क्रीन या लाइट सकेत)

इससे उन्हें यात्रा में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और वे स्वतंत्रता व आत्मसम्मान के साध यात्रा का आनंद ले सकेंगे।

(ग) यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवर्नों की सुरक्षा के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
उत्तर :
यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए मैं निम्न बातों का ध्यान रखूँगा

  • किसी भी दीवार, मूर्ति या संरचना पर नहीं लिखूँगा और न ही खरोचूँगा।
  • धरोहरों को हाथ लगाने या चढ़ने से बचूँगा।
  • वहाँ की साफु-सफ़ाई बनाए रखूँगा, कूड़ा नहीं फेकूँगा।
  • धरोहरों के पास तेज़ आवाज़ या शोर नहीं करूँगा।
  • निर्देश बोर्ड पर लिखे नियमों का पालन करूँगा।
  • यदि कोई व्यक्ति गलत व्यवहार कर रहा हो, तो उसे नम्रता से समझाऊँगा या सुरक्षा कर्मचारी को सूचित करूँगा।
  • फोटो खींचने से पहले अनुमति लूँगा (अगर फ्लैश की मनाही हो तो उसका ध्यान रखूँगा)।

आज की पहेली

पाठ में से शब्द खोजिए और नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए
1. एक मसाले का नाम _______
2. कपास से जुड़ा एक शब्द _______
3. जहाँ स्नान होता है _______
4. वृक्ष के किसी अंग का नाम _______
5. एक नगर या तीर्ध का नाम _______
6. ब्यापार से जुड़ा स्थान _______
7. एक नदी का नाम _______
8. एक पर्वत का नाम _______
9. एक धार्मिक ग्रंथ का नाम _______
उत्तर
1. दालचीनी
2. सूत
3. हर की पौड़ी/घाट
4. पत्ती
5. हरिद्वार
6. बाज़ार
7. गंगा
8. हिमालय
9. भागवत

हरिद्वार Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 4

खोजबीन के लिए

भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है-‘अंधेर नगरी’। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से डूँढकर पढ़िए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।

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