कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 5 कबीर के दोहे के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.

Class 8 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer कबीर के दोहे

NCERT Class 8th Hindi Chapter 5 कबीर के दोहे Question Answer

कक्षा 8 हिंदी पाठ 5 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi कबीर के दोहे Question Answer

पाठ से

आइए, अब हम इन दोहों को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 11

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।।’ इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?

  • श्रम का महत्त्व
  • गुरु का महत्त्व
  • ज्ञान का महत्त्व
  • भक्ति का महत्त्व

उत्तर :
गुरु का महत्य

2. ‘अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप॥’ इस दोहे का मूल संदेश क्या है?

  • हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है।
  • बारिश और धूप से बचना चाहिए।
  • हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
  • हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए।

उत्तर :
हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।

3. ‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।’ यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?

  • समय का सदुपयोग करना।
  • दूसरों के काम आना।
  • परिश्रम और लगन से काम करना।
  • सभी के प्रति उदार रहना।

उत्तर :
सभी के प्रति उदार रहना।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

4. ‘ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

  • लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं।
  • दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।
  • किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है।
  • सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है।

उत्तर :
दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।

5. ‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।’ इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

  • सत्य और झुठ में कोई अंतर नहीं होता है।
  • सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
  • बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं।
  • सत्य महत्तवपूर्ण जीवन मूल्य है, जिससे हदय प्रकाशित होता है।

उत्तर :
सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
सत्य महत्त्वपूर्ण जीवन मूल्य है, जिससे हृदय प्रकाशित होता है।

6. ‘निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।’ यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?

  • आलोचना से बचना चाहिए।
  • आलोचकों को दूर रखना चाहिए।
  • आलोचकों को पास रखना चाहिए।
  • आलोचकों की निंदा करनी चाहिए।

उत्तर :
आलोचकों को पास रखना चाहिए।

7. ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।’ इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?

  • मन की कल्पनाओं का
  • सुख-सुविधाओं का
  • विवेक और सूझवूद्न का
  • कठोर और क्रोषी स्वभाव का।

उत्तर :
विवेक और सूझबूझ का।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साधियों ने अलग-अलग उत्तर : चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर : ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 1
उत्तर :

स्तंभ 1 स्तंभ 2
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। 3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। 7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। 6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। 8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। 4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। 5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है।
7. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। 1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है।
8. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। 2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए।

(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए –
कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 2
उत्तर :

स्तंभ 1 स्तंभ 2
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। 8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। 6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। 2. औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। 1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। 4. सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। 7. जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय॥
7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। 5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
8. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। 3. जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप॥

पंक्तियों पर चर्चा

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 3

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए
(क) ‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय’
(ख) ‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।’
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए

(क) ‘गुरु गोषिंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।’ इस दोहे में गुरु को गोबिंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
हाँ, मैं इस विचार से सहमत हूँ कि गुरु को गोषिंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया जाना चाहिए। कबीरदास जी का यह दोहा – ‘गुरु गोबिंद दोक खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविद दियो बताय।।’ यह दर्शाता है कि अगर गुरु और ईंश्वर दोनों एकसाथ सामने खड़े हों, तो पहले गुरू के चरणों में प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि वही हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है। गुरु अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। वह केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि सही जीवन मूल्यों, आचरण और आत्मबोध का मार्ग भी सिखाता है। यदि गुरु न हो, तो व्यक्ति को यह भी नहीं पता चल सकता कि ईश्वर क्या है और उससे कैसे जुड़ा जाए? इसलिए गुरु को गोविंद से भी श्रेष्ठ बताया गया है, क्योकि गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम है।

(ख) ‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।’ इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।
उत्तर :
‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।’ इस दोहे में कबीरदास जी ने स्पष्ट किया है कि केबल ऊँचाई (पद, पैसा या ज्ञान) होना ही किसी व्यक्ति की महानता का प्रमाण नहीं है। जैसे खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, पर न छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से प्राप्त होते हैं – बैसे ही केवल ऊँचा पद या धन होना व्यर्थ है, यदि उसका लाभ दूसरों को न मिले। इसलिए मनुष्य में केवल बड़प्पन नहीं, बल्कि ये विशेषताएँ भी होनी चाहिए

  1. बिनम्रता ऊँचे पद पर होते हुए भी दूसरों के प्रति नम्र रहना।
  2. सेवा भाव अपने संसाधनों और ज्ञान से दूसरों की मदद करना।
  3. उपयोगिता समाज और जरूरतमदों के लिए उपयोगी बनना।
  4. दयालुता और सहानुभूति दूसरों के दु:ख-दर्द को समझना और सहयोग करना।
  5. प्रेरणास्रोत बनना अपने व्यवहार से दूसरों को सही मार्ग दिखाना अर्थात् सच्चा बड़ा वही होता है, जो दूसरों को छाया और फल दोनों दे सके, जैसे कोई उपयोगी वृक्षा

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(ग) ‘ऐसी बानी बोलिए, मन कुा आपा खोय।’ क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वर्य पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर :
हाँ, मैं पूरी तरह मानता हूँ कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर नहीं, बल्कि स्वयं पर भी पड़ता है। शब्दों में बहुत बड़ी शक्ति होती है, वे किसी का दिल जीत सकते हैं या दु:ख भी पहुँचा सकते है। जो व्यक्ति मृदुभाषी होता है, वह ने केवल दूसरों को शाति और सुख देता है, बल्कि स्वर्य के भीतर भी संतुलन, विनम्रता और शांति का अनुभव करता है।
उदाहरण,
एक बार मेरे एक मित्र ने परीक्षा में खराब अंक आने पर बहुत दुःखी होकर स्वयं को असफल समझन लिया। उस समय मैने उससे नम्रता से कहा – ‘असली हार वह होती है जो, इसान को प्रयास छोडने पर मजबूर करे और तुम तो हर बार उठने वाले इंसान हो।’ मेरे इस वाक्य ने उसके आत्मविश्वास को फिर से जाग्रत कर दिया। उसने मेहनत की और अगले प्रयास में अच्छा प्रदर्शन किया। इस घटना ने मुझे भी यह सिखाया कि सकारात्मक और संवेदनशील शब्द न केवल दूसरों को संबल देते हैं, बल्कि बोलने वाले के मन को भी शांत, संतुलित और सौम्य बनाते हैं। इसलिए जैसा कबीरदास जी कहते हैं – ‘ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा स्रोय। औरन को सीतल करे, आपहुँ सीतल होया।’ हमें हमेशा ऐसे अचन बोलने चाहिए, जो दूसरों को भी और स्वर्य को भी शीतलता दें।

(घ) ‘जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।’ हमारे विचारों और कायों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर :
कबीरदास जी का यह दोहा – ‘जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।’ इस बात को स्पष्ट करता है कि हमारी संगति अर्थात् साथ रहने वाले लोग, हमारे विचारों, व्यवहार और भविष्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
संगति का प्रभाव मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह जिन लोगों के साथ समय बिताता है, धीरे-धीरे उनके जैसे सोचने और व्यवहार करने लगता है। अच्छी संगति में रहने से अच्छे गुणों का विकास होता है; जैसे-मेहनत, ईमानदारी, संयम आदि। वहीं बुरी संगति बुरे विचार, गलत आदतें और आलस्य को बढ़ावा देती है। उदाहरण, यदि कोई छात्र मेहनती और ईमानदार मित्रों के साथ समय बिताता है, तो वह भी पढ़ाई की ओर प्रेरित होता है और सफलता की ओर अग्रसर होता है। वहीं यदि बह ऐसे मित्रों के साथ जुड़ता है, जो पढ़ाई से दूर भागते है, समय नष्ट करते हैं, तो वह भी उन्हीं की तरह लापरवाह बन सकता है। इसलिए हमें सोच-समझकर अपनी संगति चुननी चाहिए, क्योकि संगति का असर हमारे चरित्र और भविष्य दोनों पर पड़ता है। जैसी संगति, वैसी गति।

दोहे की रचना

‘अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥’

इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे दोहों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।

(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए, जिनमें

1. एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे- राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एकसाथ आए हैं।
उत्तर :
उदाहरण 1 ‘साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।’
यहाँ ‘सूप’ और ‘सुभाय’ दोनों शब्द ‘स’ अक्षर से शुरू होते हैं।
उदाहरण 2 ‘जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाया।’
इसमें ‘जो’ और ‘जैसी’ दोनों ‘ज’ अक्षर से शुरू हो रहे हैं।

2. एक शब्द एकसाथ दो बार आया है। (जैसे- बार-बार)
उत्तर :
‘सार सार को गहि रहै, थोधा देइ उड्डाय।।’ इस पंक्ति में सार सार शब्द दो बार आया है।

3. लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे- जल, जाल) एक ही पंक्ति में आए हैं।
उत्तर :
‘बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाया।’ इस पंक्ति में बिन और बिना में केवल एक मात्रा का अंतर है।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

4. एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों (जैसे- अच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
उत्तर :
‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।’ इस पंक्ति में साँच और झुठ दोनों एक दूसरे के विपरीत शब्द है।

5. किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है। (जैसे दूध जैसा सफेद)
उत्तर :
‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूरा।’ इस पंक्ति में ‘बडे व्यक्ति’ की तुलना ‘खजूर के पेड़’ से की गई है।

6. किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (जैसे- मुख चंद्र है)
उत्तर :
‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।’ यहाँ ‘साधू’ को ‘सूप’ जैसा कहा गया है अर्थात् एक ऐसा साधू चाहिए, जो सूप की तरह अच्छे को रखे और बेकार को उड़ा दे।
‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।’ इस पंक्ति में मन को पंछी कहा गया है।

7. किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (जैसे- ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप’)
उत्तर :
‘औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होया।’ इस पंक्ति में शीतल को सीतल लिखा गया है।

8. उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
उत्तर :
‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।’ यहाँ उदाहरण द्वारा बात को कहा गया है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

अनुमान और कल्पना से

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 4

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए

(क) ‘गुरु गोविंद दोक खड़े, काके लागाँ पाँय’

  • यदि आपके सामने यह स्थिति होती, तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?
  • यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?

उत्तर :

  • यदि मेरे सामने गुरु और ग्रेक्दि (इंश्वर) दोनों एकसाथ खड़े होते, तो में पहले गुरु के चरणों में प्रणाम करता, क्योकि गुरु ही वह मार्गदर्शक होते हैं, जिन्होने मुझे ईंश्वर तक पहुँचने का ज्ञान और समझ दी।
  • गुरु ने मुझे सही और गलत में भेद करना सिखाया, चरित्र निर्माण किया और जीवन का उद्देश्य बताया। इसलिए ईश्वर से पहले भी गुरु का स्थान होता है।
  • कबीरदास जी भी यही कहते हैं कि यदि दोनों (गुरु और ईश्वर) सामने खड़े हों, तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योकि उन्होने ही हमें ईश्वर से मिलवाया है।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(ख) ‘अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।’

  • यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
  • यदि वर्षा आवश्यक्तता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
  • आवश्यकता से अधिक मोवाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर :
जो व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है, वह बिना सोचे-समझे बातें कह सकता है, जिससे दूसरों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। वह अपना समय और ऊर्जा भी व्यर्थ करता है। वहीं जो व्यक्ति हमेशा चुप रहता है, उसकी बातें और भावनाएँ दूसरों तक नहीं पहुँच पाती। इससे वह अकेला महसूस कर सकता है और उसे समाज में समझा नहीं जाता। इसलिए संतुलित बोलना ही श्रेष्ठ है।

अत्यधिक वर्षा से बाद, फसलों का नाश, मकानों की क्षति, बीमारियाँ आदि हो सकती हैं। बहुत कम वर्षा से सूखा, जल संकट, फसलों की क्षति और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अत: संतुलित और समय पर वर्षा ही लाभकारी होती है।

आँखों की रोशनी कमजोर हो सकती है, नींद प्रभावित होती है। एकाग्रता कम होती है, पढ़ाई और काम पर ध्यान नहीं लगता। सामाजिक दूरी बढ़ जाती है, रिश्तों में संवाद घटता है। मानसिक तनाब और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। मोबाइल और तकनीक का सीमित और सही प्रयोग ही हितकारी है।

(ग) ‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।’
श्हूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर :
झुठ बोलने सें व्यक्ति का विश्वास और प्रतिष्ठा धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। लोग उस पर भरोसा करना छोड़ देते हैं। झुठ बोलकर कोई एक बार किसी समस्या से बच सकता है, लेकिन बार-बार झुठ को छुपाने के लिए और भी झुढ बोलने पड़ते हैं। इससे मन में अस्थिरता, डर और अपराधबोध बना रहता है, जो अंततः मानसिक तनाव का कारण बनता है। कभी-न-कभी सच सामने आ ही जाता है और तब व्यक्ति को शर्मिदगी झेलनी पड़ती है। इसलिए जीवन में सत्य बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ा तप है।

यदि मेरे उत्तर में गलती है और मुझे फिर भी अंक मिल गए हैं, तो मैं ईमानदारी से शिक्षक को अपनी गलती के बारे में बताऊँगा। मैं उनसे कहूँगा, ‘सर/मैम, मेरे उत्तर में त्रुटि थी, कुपया उसे दोबारा जाँच/लें।’ यह मेरी ईमानदारी और चरित्र की मजबूती को दर्शाएगा।

हो सकता है कि इससे अंक कम हो जाएँ, लेकिन शिक्षक और मित्रों की नजरों में मेरी सच्चाई की छवि मजयूत होगी। साथ ही मुझे आत्मसंतोष मिलेगा कि मैने सच का साथ दिया। याद रखिए, अंक बाद में मिल सकते हैं, लेकिन चरित्र और ईमानदारी एक बार खो जाए तो दोबारा पाना कठिन होता है।

(घ) ‘ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।’
यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है, जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।
उत्तर :
यदि सभी लोग मधुर, नप्र और शांत वाणी में बात करें, तो आपसी संबंध बेहतर होगे, परिवार, समाज और कार्यस्थलों पर प्रेम और विश्वास बड़ेगा, विवाद और झगडे कम होंगे। जब कोई कटु शब्द नहीं बोलेगा तो क्रोध और नाराज़गी भी नहीं उभरेगी। मन में सकारात्मकता आएगी। मधुर वाणी न केवल दूसरों को शांति देती है, बल्कि स्खुद के मन को भी शांत और प्रसन्न रखती है। सुनने वाले का मन सम्मानित अनुभब करता है, जिससे सामाजिक सौहार्द और समझ्न बड़ती है। वाणी से ही चरित्र की पहचान होती है। मधुर बाणी इंसान को सम्मान दिलाती है, चाहे वह अमीर हो या गरीब।

हाँ, कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो सकती है, जहाँ सच्चाई कठोर लग सकती है, लेकिन वह बोलना आवश्यक होता है

  1. गलती सुधारने के लिए जब कोई व्यक्ति बार-बार गलती कर रहा हो और नप्र भाषा से नहीं समझ रहा हो, तो थोड़ी कठोरता आवश्यक हो सकती है।
  2. अन्याय के विरुद्ध जब समाज में कोई अन्याय, भ्रष्टाचार या अत्याचार हो रहा हो, तब चुप रहना गलत होता है। वहाँ पर स्पष्ट, कठोर और साहसी वाणी ज़ूरी होती है ताकि बुराई को रोका जा सके।
  3. अपनों की भलाई के लिए जैसे माता-पिता या शिक्षक जब बच्चों को हाँटते हैं, वह कडुता प्रेम से भरी होती है। उनका उद्देश्य सड़ा देना नहीं, बल्कि सुधार लाना होता है।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(ङ) ‘बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।’
यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?
उत्तर :
मैं उस व्यक्ति से कहाँगा कि ‘खजूर का पेड़ भले ही ऊँचा होता है, लेकिन वह न तो छाया देता है और न ही आसानी से फल देता है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति केवल अपने पद, धन या ऊँचाई का घमंड करता है, लेकिन दूसरों के काम न आए, तो उसकी ऊँचाई का कोई अर्थ नही।
सच्चे अर्थों में ‘बड़ा’ बही होता है, जो विनम्र हो, दूसरों की मदद करता हो और समाज के लिए उपयोगी हो। मैं समझाऊँगा कि बड़ा होना शरीर या पद से नहीं, बल्कि व्यवहार और उपयोगिता से होता है।

खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।
उत्तर :
खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष भी निम्न प्रकार से उपयोगी होते हैं

वृक्ष उपयोगिता
खजूर इसके फल खजूर (डेट्स) ऊर्जा से भरपूर, स्वांदिष्ट व पौष्टिक होते हैं।
नारियल इसका पानी स्वास्थ्यवर्द्धक है, गिरी भोजन में और पत्तियाँ व छाल घरों की छत/कला में काम आती हैं।
बाँस जैसा ऊँचा पौधा निर्माण, फर्नीचर, वाद्ययंत्र आदि में प्रयोग होता है।

निष्कर्ष कोई भी ऊँचाई बेकार नहीं होती, यदि उसका प्रयोग सही दिशा में किया जाए।

आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मौनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?
उत्तर :
मैं निम्नलिखित विशेषताओं पर ध्यान दूँगा

  • ईमानदारी और निष्पक्षता जो सभी के साथ समान ब्यवहार करे।
  • नेतृत्व क्षमता जो दूसरों को प्रेरित कर सके।
  • सहयोगी स्वभाव जो जरूरतमंदों की मदद करे।
  • अनुशासित समय का पालन करे और नियम माने।
  • सुनने की क्षमता जो दूसरों की बात ध्यान से सुने।
  • समस्या सुलझाने का दृष्टिकोण जो झगड़े या कठिनाइयों में समाधान ढूँढ सके।

(च) ‘निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाया।’
यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा?
उत्तर :
जब कोई मेरी गलतियाँ बताता है, तो मैं उन्हें समझ पाता हैं और सुधारने का प्रयास करता हुँ। इससे मेरा व्यक्तित्व निखरता है, मैं बेहतर इंसान बनता हूँ। मेरी कमज़ोरियाँ मेरी ताकत बन सकती हैं, यदि मुझे समय रहते उनका पता चले। ऐसे लोग हमें सच का आइना दिखाते हैं। आलोचना सुधार की पहली सीढ़ी है।

यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
उत्तर :
समाज में लोग अपनी गलतियों को पहचान ही नहीं पाएंगे। इससे गलत आदतें और व्यवहार बढ़ते जाएँगे। लोग अपने अहंकार में जीने लगेंगे और दूसरों को छोटा समझेंगे। कोई किसी को सुधारने वाला नहीं होगा, जिससे समाज पिछड्ड सकता है।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(छ) ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।’
कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?
उत्तर :
मैं हर वात को सोच-समझकर अपनाऊँगा, केवल सार्थक और सकारात्मक बातें ही अपने जीवन में लाऊँगा। गलत संगति या विचारों से बच पाऊँगा। मैं लोगों की अच्छी बातों को ग्रहण करूँगा और बुरी बातों को छोड़ दूँगा। इससे मेरे निर्णंय बेहतर होंगे और मैं जीवन में सफल और शांतिपूर्ण बन सकूँगा। मैं भावनात्मक और मानसिक रूप से मजबूत रहूँगा।

यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
हम गलत लोगों या विचारों के प्रभाव में आ सकते हैं। इससे हम गलत दिशा में सोचने या काम करने लग सकते हैं। हमारा निर्णय लेने का विवेक कमजोर हो जाएगा।
हम दूसरों की मनोवैज्ञानिक चालों या धोखे का शिकार हो सकते हैं। जीवन में अस्थिरता और श्रम बढ़ जाएगा।

(ज) ‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।’
यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता, तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?
उत्तर :
यदि मेरा मन एक पंछी की तरह उद सकता, तो मैं उसे शांत और प्राकृतिक जगहों पर ले जाना चाहता, जैसे हिमालय की बादियाँ या समुद्र किनारे, क्योंकि वहाँ शांति और सुकून मिलता है। प्रकृति के बीच मन एकाग्र और प्रसन्न रहता है। वहाँ रहकर मैं अपने विचारों को स्पष्ट कर सकता हैं और आत्म-विश्लेषण कर सकता हुँ। वहाँ जाकर मैं नकारात्मकता से दूर रह सकता हूँ।

संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर :
अच्छी संगति से मनुष्य सभ्य, नैतिक और जिम्मेदार बनता है। वह अच्छे विचारों और प्रेरणा से भरा रहता है। बुरी संगति से व्यक्ति प्रमित, आलसी और गलत आदतों में पड़ सकता है। संगति हमारे आचरण, बोलचाल और निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है। एक कहावत है- ‘जैसी संगत वैसी रंगत।’

वाद-विवाद

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 5

‘अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥’
(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।

(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे; जैसे-
पक्ष वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
विपक्ष अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।

(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तकों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 6
उत्तर :
मन पंछी, पंथी, गोविंद, सीतल, निंदक, मन

दोहे और कहावतें

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 7`

‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।’

इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है। यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत – ‘जैसा संग वैसा रंग’ (व्यक्ति जिस संगति में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है।) की तरह प्रयुक्त होती है। कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं, जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।

अब आप ऐसी अन्य कहाबतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर :
कहाबतें और उनसे बने वाक्य इस प्रकार हैं

  • नकल में भी अकल चाहिए राहुल ने परीक्षा में बिना समझे नकल की, लेकिन उत्तर गलत हो गया – सच ही कहते हैं, नकल में भी अकल चाहिए।
  • बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद उसे संगीत की बारीकियों की क्या समझ, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
  • अधजल गगरी छलकत जाए जो लोग कम जानते है, वही सबसे ज्यादा दिखावा करते हैं – अधजल गगरी छलकत जाए।
  • जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं वह हमेशा धमकी देता है, लेकिन कभी कुछ करता नहीं – जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं।
  • ऊँची दुकान फीका पकवान उस होटल का नाम बहुत था, लेकिन खाना बहुत साधारण था – ऊँची दुकान फीका पकवान।

सबकी प्रस्तुति

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 9

पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए,

  • गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।
  • भाब-नृत्य प्रस्तुति।
  • कविता पाठ करना।
  • संगीत के साथ प्रस्तुत करना।
  • अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है, लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।)

उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) ‘गुरु गोविंद दोक खड़े, काके लागाँ पाँय।’ क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
उत्तर :
हाँ, मेरे जीवन में मेरे शिक्षक ने मुझे कठिन समय में सही मार्ग दिखाया और आत्मविश्वास से आगे बढ़ना सिखाया। उनका मार्गदर्शन मेरे लिए एक दीपक की तरह रहा।

(ख) ‘निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।’ क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है, जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।
उत्तर :
हाँ, एक बार मेरे मित्र ने मुझे बताया कि मैं बोलते समय दूसरों की बात बीच में काट देता हूँ। उसकी बात से मैने ध्यान देना शुरू किया और अब मैं दूसरों की बाते धैर्य से सुनने लगा हूँ।

(ग) ‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।’ क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे- मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर :
हाँ, मैने अनुभव किया है कि जब मैं मेहनती और पढ़ाई में रुचि रखने वाले मित्रों के साथ रहा, तो मेरी पढ़ाई में भी रुचि बढ़ी और मैं अधिक अनुझासित हो गया। संगति का असर मेरे व्यवहार पर साफ दिखा।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

सृजन

(क) ‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।’
इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए, जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।)
उत्तर :
कहानी : सत्य की जीत
कक्षा 7 के छात्रों की क्रिकेट प्रतियोगिता हो रही थी। आरव की टीम फाइनल मैच खेल रही थी और मुकाबला बहुत कड़ा था। आखिरी ओवर में विरोधी टीम को जीतने के लिए सिर्फ 4 रन चाहिए थे। तभी बिरोधी टीम के बल्लेबाज़ ने एक बड़ा शॉट मारा, गेंद हवा में गई और सीमा रेखा के पास आरव ने कैच पकड़ लिया। पर मामला संदिग्ध था-कुछ लोगों को लगा कि गेंद ज़मीन से टकराकर उछली थी।
अंपायर ने निर्णंय आरव पर छोड़ दिया, क्योकि बह सबसे पास था। यदि वह कहता कि कैच लिया है, तो उसकी टीम जीत सकती थी। लेकिन आरव जानता था कि गेंद ज़मीन को छू गई थी।
उसने सच्चाई बताते हुए कहा, ‘गेंद ज़मीन से टकराई थी, यह कैच नहीं था’
उसके टीम के कई साथी नाराज़ हुए, लेकिन मैच के अंत में विरोधी टीम के कप्तान और अंपायर ने आरव की ईमानदारी की सराहना की और उसे ‘सत्य वीर’ का खिताब दिया।

सीख

सच बोलना कभी आसान नहीं होता, लेकिन अंतत: वही सबसे बड़ा तप और सच्चा साहस होता है।
‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।’ – यह दोहा आरव ने अपने कर्म से सिद्ध कर दिखाया।

(ख) ‘गुरु गोविंद दोक खड़े, काके लागौं पाँय।’
इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर :
निबंध : मेरे प्रेरणास्रोत शिक्षक – श्री गुप्ता सर
‘गुरु गोबिंद दोक खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोबिंद दियो बताय।।’
कबीर का यह दोहा हमारे जीवन में गुरु के महत्त्व को बहुत सुंदर रूप से प्रस्तुत करता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होने मुझे सही मार्ग दिखाया और मेरे जीवन को दिशा दी। उनका नाम है श्री गुप्ता सर।

श्री गुप्ता सर हमारे विद्यालय में हिंदी पढ़ाते हैं। उनका पढ़ाने का ढंग बहुत सरल, प्रेरणादायक और हृदय को छूने वाला होता है। वे केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देते, बल्कि हमें जीवन मूल्यों का भी पाठ पढ़ाते हैं। मैने उनसे यह सीखा कि केवल अच्छे अंक लाना ही जीवन की सफलता नहीं है, बल्कि एक अच्छा इसान बनना सबसे जरूरी है। एक बार मैं बहुत निराश हो गया था, क्योकि परीक्षा में अच्छे अंक नहीं आए थे। तब गुप्ता सर ने मुझे बुलाया, समझाया और प्रेरणा दी। उन्होने कहा – ‘हार से घबराना नहीं चाहिए, वह भी एक शिक्षक होती है।’ उनके शब्दों ने मुझमें आत्मविश्वास भर दिया।

आज जब भी मैं किसी कठिनाई में होता है, उनके बताए गए मार्गदर्शन की ओर लौटता हूँ। उनके द्वारा सिखाई गई सच्चाई, मेहनत और विनम्रता की सीख मेरे जीवन में एक प्रकाशपुंज की तरह है।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

निष्कर्ष

गुप्ता सर जैसे शिक्षक वास्तव में समाज के शिल्पकार होते हैं। यदि भगवान ने हमें जीवन दिया है, तो शिक्षक हमें उस जीवन को सार्थक बनाना सिखाते हैं। इसीलिए कबीरदास ने गुरु को ईश्वर से भी ऊपर बताया है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे गुप्ता सर जैसे प्रेरणास्पद गुरु मिले।

कबीर हमारे समय में

(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
उत्तर :
यदि कबीर आज के समय में होते, तो वे समाज की सच्चाई को उजागर करने वाली कविता अवश्य लिखते। डनकी कविताओं के विषय आज के युग में भी प्रासंगिक होते। नीचे उन संभावित विषयों की सूची दी गई है, जिन पर कबीर आज कविता लिख सकते थे
आधुनिक कबीर के कविता विषय

  1. श्रष्टाचार और नैतिक पतन
  2. धार्मिक कट्टरता और पाखंड
  3. सोशल मीडिया का दिखावा और झढा आचरण
  4. शिक्षा का व्यवसायीकरण
  5. मानवता की गिरती संबेदनाएँ
  6. पर्यावरण संकट और प्रकृति की उपेक्षा
  7. जातिवाद और भेदभाव
  8. अत्यधिक उपभोक्ताबाद (भौतिक चीज़ों की अंघी दौड़)
  9. महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान
  10. युवाओं की दिशा और उद्देश्यहीनता

(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए। कबीर की दोहों जैसी शैली में दो पंक्तियाँ हैं

1. भ्रष्टाचार और नैतिक पतन
उत्तर :
मन का लालच ना बुझै, जितनी भर से धाली।
सच को छोड़ बिका सभी, पद पाकर बेमिसाल।

2. धार्मिक कट्टरता और पाखंड
उत्तर :
मदिर-मस्जिद झगडें सब, भीतर झांकि नाहिं।
प्रेम बसे जो दिल भीतर, सो ही सच्चा साहिब।

3. सोशल मीडिया का दिखाबा
उत्तर :
फोटो साजे रोज है, भीतर खाली छाय।
झूठे दिखावे की डगर, मन से दूर भगाय।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

4. शिक्षा का व्यवसायीकरण
उत्तर :
गुरुकुल बन गए दुकान, बिके ज्ञान के भाव। जहाँ विद्या थी पूज्य कभी, आज वहाँ बस व्याप।

5. संवेदनहीन समाज
उत्तर :
रोता कोई भीख माँगे, पथ में० सब अनजान। मन में मर गई करुणा, ऑँखों में अभिमान।

6. पर्यावरण संकट
उत्तर :
पेड़ काट के गर्ब करे, साँस कहाँ से पाबे। धरती रोए मौन में, मानव सोए भावे।

7. जातिवाद और भेदभाव
उत्तर :
ऊँच-नीच का भेद तू रखे, सबका रचिया एक। रक्त सभी का लाल है, समझे ना यह लेख।

8. भौतिक वस्तुओं की दौड़
उत्तर :
सोने की लिप्सा बढे, मन का चैन गँवाय। थाली भरी है वस्तु से, भूख न मिटती जाय।

9. महिला सुरक्षा और सम्मान
उत्तर :
जननी को तू पूजे घर, बाहर कर अपमान। जहाँ नारी को ना मिले मान, सो देश करे घाट।

10. युवा और उद्देश्यहीनता
उत्तर :
मन के पंख तो भारी हैं, उडना भूले काम। दिशा नहीं जब लक्ष्य में, व्यर्थ गए सब काम।

साइबर सुरक्षा और दोहे

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए
(क) ‘अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।’ इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर :
इंटरनेट पर ज़रूरत से ज्यादा जानकारी साझा करने से गोपनीयता और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इससे धोखाधड़ी, हैकिंग या मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

(ख) ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।’ किसी भी वेबसाइट, ई-मेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?
उत्तर :
इंटरनेट पर ढेर सारी सूचनाएँ होती हैं, जिनमें सही-गलत दोनों शामिल होती हैं, इसलिए ‘सूप’ की तरह छानना ज़रूरी है ताकि केवल उपयोगी और सत्य जानकारी ही हमारे पास रहे। किसी भी सूचना को सत्यापित स्रोत, लेखक की विश्वसनीयता, तिथियाँ और तथ्य देखकर तय किया जा सकता है कि वह उपयोगी है या प्रामक।

आज के समय में

नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5 10

अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया – ‘संगति का असर जीवन पर पड़ता है।’
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उत्तर :
‘कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।’

एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा- ‘हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।’
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उत्तर :
‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥’

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा -‘आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।’
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उत्तर :
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छबाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।’

रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे बातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
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उत्तर :
‘ऐसी बानी बोलिए, मन-कल्बापा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ शीतल होय।।’

कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा- ‘बोलचाल में संतुलन आवश्यक है न अधिक बोलो न अधिक चुप रहो।’
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उत्तर :
‘अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।’

सुरेश को जब प्रतिभा सम्मान मिला तो उसने कहा- ‘इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।’
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उत्तर :
‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताया।’

कबीर के दोहे Class 8 Question Answer Hindi Malhar Chapter 5

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अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।

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