Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी कहानी के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 6 Question Answer एक टोकरी भर मिट्टी
NCERT Class 8th Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 6 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से चर्चा करें। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ्म से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. जर्मीदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
- झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
- झोपड़ी रास्ते में बाधा थी
- वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
- वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
उत्तर :
वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
2. वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
- क्रोध और झगड़ा करके
- अदालत से अनुमति लेकर
- विनती और नग्रता से
- चुपचाप उठाकर ले गई
उत्तर :
विनती और नम्रता से
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3. वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
- दया
- लगाव
- गुस्सा
- डर
उत्तर :
- लगाव
- गुस्सा
4. कहानी का अंत कैसा है?
- दु:खद
- सुखद
- प्रेरणादायक
- सकारात्मक
उत्तर :
- सुखद
- सकारात्मक
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर
छात्र स्वयं करें।
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मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।

उत्तर :
| वाक्य | निष्कर्ष |
| 1 अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2 बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | जमींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3 आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4 जमींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्त्तव्य भूल गए थे। | धन और अहंकार ने जमींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। |
| 5 कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमींदार ने क्षमा माँगी। |
| 6 उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। |
| 7 कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाइए, जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए जमींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8 उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। |
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(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अप्रेन्त्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
उत्तर :
इस पंक्ति में वृद्धा ने जर्मीदार को यह समझाया है कि जब बह एक टोकरी मिट्टी का भार नहीं उठा सकता, तो झोपड़ी की हजारों टोकरियों जितनी मिट्टी (अर्थात् उसके द्वारा किए गए अन्याय का बोझ) जीवनभर कैसे उठाएगा? यह पंक्ति हमें सिखाती है कि दूसरों का हक छीनने और अन्याय करने का बोझ जीवनभर मनुष्य को भारी पड़ता है।
(ख) “जमींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी, तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
उत्तर :
इस पंक्ति में जर्मीदार की कठोरता और अहंकार धीरे-धीरे टूटने का संकेत मिलता है। वृद्धा की सच्ची विनती और उसके दु:ख को देखकर जर्मीदार के मन में दया जागी। जब उन्होने स्वर्य टोकरी उठाने की कोशिश की और असफल हुए, तब उन्हें यह समझ आया कि किसी का हक छीनने का बोन्र कितना भारी होता है। यह पंक्ति हमें अहंकार छोड़कर दया, सहानुभूति और न्याय का मार्ग अपनाने की सीख देती है।
सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर :
मेरे विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है, क्योकि वह गरीब और असहाय होने पर भी अपनी सच्चाई और हक के लिए डटी रही। उसने अपने तर्कपूर्ण शब्दों और सरल बातों से जमींदार जैसे अहंकारी व्यक्ति को भी बदल दिया। उसने हमें यह सिखाया कि सच्चाई और ईमानदारी के आगे धन और ताकत का घमंड टिक नहीं सकता। इसलिए कहानी में वृद्धा का चरित्र सबसे प्रभावशाली और प्रेरणादायक है।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर :
वृद्धा की पोती ने खाना इसलिए छोड़ दिया था, क्योकि वह अपनी पुरानी झोंपड़ी को ही अपना असली घर मानती थी। झोपड़ी छिन जाने के बाद वह कहती थी कि वह केवल अपने घर में ही रोटी खाएगी।
(ग) जमींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर :
जमींदार ने कानूनी चालों से वृद्धा की झोपड़ी पर कब्जा किया था।
(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। जमींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…”। यहाँ जर्मीदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
उत्तर :
यहाँ जमींदार द्वारा सिर हिलाने का अर्थ है कि उन्होने वृद्धा की बात सुनने की स्वीकृति (हाँ) दी। यह संकेत है कि बह उसकी बिनती को आगे कहने की अनुमति दे रहे है।
(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ जर्मीदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले जर्मीदार का ब्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके ब्यबहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर :
पहले जर्मीदार का ब्यवहार बहुत कठोर, घमंडी और निर्देयी था। वह अपनी ताकत और धन के बल पर वृद्धा की झोंपड़ी हड़पना चाहता था और उसकी विनती भी नहीं सुनता था। इस घटना के बाद उसके मन में दया आई और पछ्तावा हुआ। उसने महसूस किया कि उसने वृद्धा के साथ अन्याय किया है। यही कारण है कि उसने अपनी गलती मानकर वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोपड़ी लौटा दी।
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(च) ‘उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।’ जर्मीदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर :
जमींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोपड़ी वापस दे दी, क्योंकि वृद्धा की बातों से उनका अहंकार टूट गया धा। उन्होने समझा कि किसी का हक छीनने का बोझ बहुत भारी होता है। अपने किए गए अन्याय पर पखताते हुए उन्होने सही रास्ता चुना और वृद्धा की झोंपड़ी लौटा दी।
अनुमान और कल्पना से

(क) यदि वृद्धा की पोती जर्मीदार से स्वयं बात करती, तो वह क्या कहती?
उत्तर :
यदि वृद्धा की पोती जर्मीदार से स्वर्य बात करती तो वह शायद मासूमियत से कहती, “महाराज, यह झोपड़ी हमारा घर है। मुझे यहीं रहना और रोटी खाना अच्छा लगता है। कृपया हमारी झोपड़ी बापस दे दीजिए, ताकि मैं अपनी दादी के साथ अपने घर में रह सकूँ।”
(ख) यदि आप जर्मीदार की जगह होते, तो क्या करते?
उत्तर :
यदि में जमींदार की जगह होता, तो मैं वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्जा करने के बजाय उसकी सहायता करता। मैं उसकी झोपड़ी की मरम्मत करवाता और उसके जीवन को आसान बनाने की कोशिश करता। दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाने के बजाय मैं न्याय और दया का रास्ता अपनाता।
(ग) जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
उत्तर :
जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता इसीलिए नहीं मिली होगी, क्योकि वह टोकरी केवल मिट्टी से भरी नहीं थी, बल्कि उसमें उसके अन्याय और लालच का प्रतीकात्मक बोझ भी था। यह ईश्वर का संकेत था कि दूसरों का हक छीनने का पाप कोई भी नहीं उठा सकता। यह घटना जमींदार को अपने गलत कर्मों का एहसास कराने के लिए हुई थी।
(घ) “झोंपड़ी में तो हजारों ऐकरियाँ मिट्टी पड़ी है…”। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है? (संकेत- मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)
उत्तर :
यहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं की जा रही है, बल्कि मिट्टी अन्याय और पाप का प्रतीक है। वृद्धा यह कहना चाहती है कि जब जमींदार एक टोकरी भर मिट्टी (अर्थांत् अन्याय का एक छोटा बोझ) नहीं उठा पा रहा है, तो पूरी झोपड़ी पर कब्जा करने से जो पाप का भारी बोझ्न उसके सिर पर आएगा, उसे वह जीवनभर नहीं उठा पाएगा। इस प्रकार मिट्टी के बहाने वृद्धा ने जमींदार को उसके कर्मों का भार और परिणाम समझाया।
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(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
उत्तर :
यह कहानी आज से लगभग सवा सौ वर्ष पहले लिखी गई है। इस कहानी के आधार पर पता चलता है कि पहले भारत में स्त्रियों को विधवा होने पर सहारा नहीं मिलता था, बल्कि उन्हें घृणा की दृष्टि से देखा जाता था। वह समाज में अकेली पड़ जाती थी। उन्हें सामाजिक व कानूनी अधिकार नहीं मिलते थे। शक्तिशाली लोग इस स्थिति का फायदा उठाते थे। वे भावनात्मक और आर्थिक रूप से दु?ख सहती थीं।
बदली कहानी

कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती
- यदि जर्मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
- यदि जर्मीदार टोकरी उठा लेता
- यदि जर्मीदार मिट्टी देने से मना कर देता
- यदि जमींदार एक स्त्री होती
- यदि पोती जर्मीदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
उत्तर :
बदलीबदली हुई कहानी की स्थिति- ‘यदि जमीदार मिट्टी देने से मना कर देता’ यदि जमीदार ने वृद्धा को मिट्टी देने से मना कर दिया होता, तो वृद्धा बहुत दुरंखी होकर रोने लगती। पोती भूख के कारण और कमजोर हो जाती। वृद्धा अपनी परेशानी लेकर गाँव के लोगों के पास जाती। गाँव के लोग जर्मीदार की कठोरता देखकर उसके खिलाफ खड़े हो जाते। सभी मिलकर जमीदार से कहते – “जो व्यक्ति गरीबों की सहायता नहीं कर सकता, उसे जर्मीदार कहलाने का कोई हक नहीं है।” गाँव के बुनुर्ग भी जमींदार को समझाते कि धन का गर्व नहीं करना चाहिए। धीरे-धीरे जमीदार को अपनी गलती का एहसास होता और वह वृद्धा को न केवल मिट्टी देता, बल्कि उसकी झोंपड़ी भी वापस कर देता। ‘कि’ और ‘ की’ का उपयोग
निम्न वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए
इससे भरोसा है कि बह रोटी खाने लगेगी।
यहाँ ‘कि’ एक संयोजक के रूप में प्रयोग हुआ है। संयोजक का अर्थ होता है-मिलाने वाला। संयोजक शब्दों या वाक्यों को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है। ये हमें बताते है- क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या देखा गया आदि।
जमींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। यहाँ ‘की’ एक संबंधसूचक कारक शब्द है। इसका प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य शब्द के साथ संबंध बताने के लिए किया जाता है। अन्य संबंधकारक शब्द हैं-का और के।
अब नीचे दिए गए बाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए
1. वृद्धा ने कहा __________ वह झोंपड़ी को लेने नर्हीं आई है।
उत्तर : कि
2. वह अपनी पोता __________ चिंता में दुःखी हो गई थी।
उत्तर : की
3. वृद्धा ने प्रार्थना __________ टोकरी को जरा हाथ लगाइए।
उत्तर : की, कि
4. पोती हमेशा कहती थी __________ वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
उत्तर : कि
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5. झोंपड़ी __________ मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
उत्तर : की
6. उसे विश्वास था __________ मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
उत्तर : कि
7. वृद्धा __________ आँखों से आँसुओं __________ धारा बहने लगी।
उत्तर : की, की
8. उसने यह सोचा __________ झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
उत्तर : कि
9. वृद्धा के मन __________ पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
उत्तर : की
10. जर्मीदार इतने लज्जित हुए __________ टोकरी उठाने की बात मान ली।
उत्तर : कि
11. उस झोंपड़ी __________ हर दीवार वृद्धा __________ यादों से भरी थी।
उत्तर : की, की
मुहावरे

“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर :
बाल की खाल निकालने बाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होने अदालत से झोपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।
(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
- बाल बाँका न होना- कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
- बाल बराबर-बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।
- बाल बराबर फर्क होना- जरा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अन्तर होना।
- बाल-बाल बचना-कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।
उत्तर :
- बाल बाँका न होना-भारी तुफान के बावजूद गाँव के लोगों का बाल बांका न हुआ।
- बाल बराबर-उसकी ईमानदारी में बाल बराबर भी शक करने की गुंजाइश नहीं है।
- बाल बराबर फर्क होना-इन दोनों चित्रों में बाल बराबर फर्क भी नहीं दिखाई देता।
- बाल-बाल बचना-तेज रप्ततार गाड़ी से टकराते-टकराते वह बाल-बाल बच गया।
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काल
नीचे दिए गए वार्क्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं।
काल के तीन भेद होते हैं
1. भूतकाल-यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
2. वर्तमान काल-यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
3. भविष्य काल-यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।

नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए –
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।
(ख) श्रीमान ने आज्ञा दे दी।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
(घ) जर्मीदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
उत्तर :
| वर्तमान काल | भविष्य काल |
| (क) वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। | (क) वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी। |
| (ख) श्रीमान आज्ञा दे देते हैं। | (ख) श्रीमान आज्ञा दे देंगे। |
| (ग) उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगती है। | (ग) उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगेगी। |
| (घ) जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होती है। | (घ) जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी। |
| (ङ) वे वृद्धा से क्षमा माँगते हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे देते हैं। | (ङ) वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस दे देंगे। |
वचन की पहचान
उनके मन में कुछ दया आ गई।
उनकी आँखें बुल गई।
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।
आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए
(क) वृद्धा झोपड़ी के भीतर __________ । (गई/गई)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर __________ । (बोली/बोर्ली)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया __________ । (है/हैं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी __________ । (थी/थीं)
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले __________ । (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रूला __________ । (गई/गई)
(छ) पाठक देख सक्ते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए __________ । (है/हैं)
उत्तर :
(क) गई
(ख) बोलीं
(ग) है
(घ) थी
(ङ) आई
(च) गई
(छ) हैं
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कहानी की रचना
“यह सुनकर वृद्धा ने कहा, ‘महाराज, नाराज न हों तो…”
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए ‘…’ का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों और प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है। अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़ए और उनकी सूची बनाइए।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए

उत्तर :

शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों को जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए


उत्तर :
1. पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचकार्थ लगाया जाने वाला शब्द।
2. लड़की
3. राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान
4. बहुत अधिक समय
5. नींब
भावों की पहचान
“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…”
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाब प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए

उत्तर :

वाक्य विस्तार
‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है, लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं।
‘बह बृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर बहाँ पहुँची।’
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं; जैसे-‘धकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-घीरे दरवाजे पर पहुँची।’
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
1. एक झोंपड़ी थी।
2. श्रीमान टहल रहे थे।
3. वह खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई।
5. आगे बढ़े।

उत्तर :
कहानी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वाक्य का विस्तार 15 – 20 शब्दों में इस प्रकार किया जा सकता है
1. एक झोंपड़ी थी। महल के पास एक टूटी-फूटी, कच्ची दीवारों वाली एक झोंपड़ी थी, जिसमें एक गरीब वृद्धा अपनी पोती के साथ रहती थी।
2. श्रीमान टहल रहे थे। जुमींकार साहब अपने नौकरों को काम बताते हुए झोंपड़ी के आसपास गर्व से इधर-उधर टहल रहे थे।
3. बह खाने लगेगी। वृद्धा को विश्वास था कि झोपड़ी की मिट्टी से बने चूल्हे की रोटी देखकर पोती खुश होकर खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई। काँपते हाथों और नम आँखों से वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई और अपने पुराने घर की यादों में डूब गई।
5. आगे बढ़े। जर्मीदार साहब स्वयं टोकरी उठाने के लिए आगे बढ़े, लेकिन उसका भार उठाने में असमर्थ हो गए।
संवाद फोन पर
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। जर्मीदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
उत्तर :
जर्मीदार: हैलो बेटा, कैसी हो?
पोती: मैं ठीक नहीं हुँ, मुझे अपनी झोपड़ी और चूल्हे की बहुत याद आ रही है।
जर्मीदार: बेटा, तुम्हें भूखे बिल्कुल नहीं रहना चाहिए। तुम खाना क्यों नहीं खा रही हो?
पोती: मुझे अपनी झोपड़ी में ही रोटी खानी है। वही मेरा घर है।
जमींदार: मैं समझ सकता हूँ। चलो, मैं तुम्हारी दादी को कहता हूँ कि झोंपड़ी से मिट्टी लेकर तुम्हारे लिए चूल्हा बनाए।
पोती: क्या सच में।
जमींदार: हाँ बेटा, तुम मेरी अपनी पोती जैसी हो। अब खाना खा लो। पोती: ठीक है चाचा जी, अब मै खाना खा लूँगी।
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(ख) कल्पना कीजिए कि जर्मीदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हृथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
उदाहरण
मित्र-इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है? ![]()
जर्मीदार-
मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
पोती की भावनाएँ

“मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।”
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर :
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
आगरा
विषय मेरे घर (झोपड़ी) को बचाने के लिए विनम्न प्रार्थना।
महोदय,
सादर निवेदन यह है कि मैं एक अनाथ बच्ची हूँ और अपनी दादी के साथ कविनगर में पुराने महल के पास बनी एक छोटी-सी झोपड़ी में रहती हूँ। यही झोंपड़ी हमारा एकमात्र घर है।
इसमें मेरे माता-पिता की यादें और मेरे बचपन के खेल बसे हुए हैं। अब जमीदार साहब इस झोंपड़ी को तोड़कर अपना अहाता बढ़ाना चाहते हैं।
मुझे इस घर से बहुत लगाव है। जब से मैंने सुना है कि यह झोपड़ी छीन ली जाएगी, मेरा मन बहुत दुखी है और मैने खाना-पीना भी छोड़ दिया है। यह घर मेरे जीवन का सहारा है। मै आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि कृपया हमारी झोंपड़ी को बचाने में हमारी मदद करें।
आपकी कृषा से मैं और मेरी दादी अपने छोटे-से घर में झांति से रह पाएंगे।
भवदीया
वृद्धा की पोती
(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वर्य को पोती के स्थान पर रखते हुए बह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए

उत्तर :
मेरी दैनंदिनी
2 मई -आज दादी घर पर आई, तो बहुत परेशान थीं। मैने बहुत पूछा। उन्होंने बताया, जमींदार चाचा हमारी झोपड़ी तोड़कर अपना अहाता बढ़ाना चाहते हैं। यह झोपड़ी ही मेरा असली घर है। यहीं मैं अपने माँ-पिता की यादों के बीच बड़ी हुई हूँ।
सुबह से मैने कुछ नहीं खाया। दादी मुझे बहुत समझा रही हैं, लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा। मुझे लगता है कि अगर मेरा घर नहीं रहेगा, तो मैं भी कुछ नहीं रह जाऊँगी।
दादी कह रही हैं कि वे झोपड़ी से मिट्टी लाएँगी और उसी से नया चूल्हा बनाकर रोटी पकाएँगी। शायद इससे मेरा मन थोड़ा शांत हो जाए।
काश, जमींदार चाचा समझ पाते कि यह मिट्टी हमारे लिए कितनी कीमती है। मैं दुआ करती हूँ कि वे अपना मन बदल दें और हमें हमारी झोपड़ी वापस दे दें।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
उत्तर :
मुझे अपने घर से बहुत लगाव है, क्योंकि यह सिर्फ़ रहने की जगह नहीं, बल्कि मेरे जीवन की सारी यादों का खजाना है। मेरे घर में मेरे बचपन की हँसी, खेल और परिवार का प्यार बसता है। घर का हर कोना मुक्रे अपनी छोटी-छोटी खुशियों की याद दिलाता है। जब मैं थक जाती हूँ या उदास होती हूँ, तो घर का माहौल मुझे सुकून देता है। घर की दीवारें, आँगन और छत मेरे लिए केवल इंट-परथर नहीं, बल्कि मेरी भावनाओं का हिस्सा हैं। मैं समझ सकती हूँ कि कहानी में वृद्धा की पोती को अपनी झोपड़ी से कितना प्रेम रहा होगा, क्योंकि अपने घर से दूर होने की बात ही मन को दु:खी कर देती है।
(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर :
हाँ, मुले मेरे पुराने स्कूल से बहुत लगाव था। जब मेरा परिवार नए शहर में चला गया, तो मुझे अपना स्कूल छोड़ना पड़ा। उस स्कूल की हर दीबार, खेल का मैदान और कक्षा की मेज-कुर्सी से जुड़ी बहुत सारी यादें थीं। वहाँ मेरे सबसे अच्छे दोस्त और प्यारे शिक्षक थे। स्कूल छोड़ते समय मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने घर का ही कोई हिस्सा खो रही हूँ। आज भी मैं उस स्कूल और अपने दोस्तों को बहुत याद करती हूँ।
(ग) कहानी में जर्मीदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
उत्तर :
हाँ, मैने अपने पड्रोसी अंकल को उनके किए पर पछताते हुए देखा है। एक दिन उन्होने गलती से अपने छोटे बेटे की वात सुने बिना उसे डाौट दिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि बच्चा सच कह रहा था, तो बे बहुत पछताने लगे। उन्होने बेटे को प्यार से गले लगाया और उससे माफ़ी माँगी। उस पश्चाताप का परिणाम यह हुआ कि बच्चा रोना बंद कर मुस्कुरा दिया तथा पिता-पुत्र का रिश्ता और गहरा हो गया। उस दिन मैने सीखा कि गलती मान लेने और माफी माँगने से रिश्ते और मजबूत बनते हैं।
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(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पहत्ताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
उत्तर :
हाँ, एक बार मैने अपने दोस्त से गुस्से में बहुत बुरी तरह बात कर दी थी। उस समय मुझे लगा कि मैं सही हूँ, लेकिन बाद में एहसास हुआ कि मेरी बातों से उसका दिल दुःखा है। मुझे बहुत पछतावा हुआ। अगले ही दिन मैं उसके पास गया/गई और उससे माफी माँगी। उस अनुभव से मैने सीखा कि गुस्से में बोलने से पहले सोच लेना चाहिए और अहंकार कभी भी किसी रिश्ते से बड़ा नहीं होता। माफी माँगने से मन हल्का हो जाता है और दोस्ती और मजबूत हो जाती है।
न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक जर्मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।
(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
उत्तर :
हाँ, मैने समाचारों में कई बार सुना है कि कुछ ताकतवर लोग गरीबों की जमीन या घर हड़प लेते हैं। एक बार मैने टीवी पर देखा था कि एक गरीब किसान की जमीन को एक बड़े ब्यापारी ने गलत तरीकों से अपने नाम करवा लिया। किसान ने वहुत विरोध किया, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में गाँव के लोगों ने मिलकर किसान की सहायता की और उसकी जमीन वापस दिलवाई। इस घटना से मैंने सीखा कि जब हम सब मिलकर अन्याय के खिलाफ खडे होते हैं, तब न्याय और समता स्थापित होती है।
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर :
ऐसी अन्यायपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए सबसे पहले हमें साहस के साथ सच बोलना चाहिए। अगर किसी कमजोर व्यक्ति के साथ गलत हो रहा है, तो उसकी मदद करनी चाहिए। हम पुलिस या प्रशासन की मदद ले सकते हैं और कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक रह सकते हैं। आस-पास के लोग भी मिलकर पीड़ित व्यक्ति का समर्थन कर सकते हैं। मिलकर विरोध करने पर कोई भी अन्याय लंबे समय तक टिक नहीं सकता।
(ग) ‘सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।’ इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
सच्ची शक्ति किसी को डराने या उसकी चीजें छीनने में नहीं, बल्कि द्या और न्याय करने में है। जो व्यक्ति न्याय करता है और दूसरों के दु:ख को समझता है, वही असली ताकतवर होता है। दया और न्याय से समाज में शांति और बराबरी बनी रहती है। जमीदार ने जब दया और न्याय को अपनाया, तब ही उसका असली सम्मान हुआ।
घर-घर की कहानी
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
उत्तर :
मेरे घर की कहानी मैंने अपने घर की कहानी अपनी दादी से सुनी। उन्होने बताया कि हमारा घर लगभग 25 साल पहले बनाया गया था। उस समय मेरे पिताजी और ताऊडी ने मिलकर जमीन खरीदी और घर बनाने का निर्णय लिया। पैसों की कमी थी, इसलिए कई सालों तक बचत की गई। घर बनाने के लिए परिवार के सभी सदस्य बहुत मेहनत करते थे। मेरी दादी कहती हैं कि उन्होने ईंट, बालू और पानी तक की निगरानी खुद की। जब घर तैयार हुआ, तो सबकी आँखों में खुशी के आँसू थे। दादी ने यह भी बताया कि उनके बचपन का घर मिट्टी और फुस का बना हुआ था, जिसमें गर्मी और बारिश में बहुत परेशानी होती थी। आज का यह पक्का घर वनके लिए किसी सपने से कम नहीं है।
न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कज्ञा कर लिया।”
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उदाहरण-सार्वजनिक शिकायत सुविधा- भारत सरकार की इस वेबसाइट
पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https:// Pgportal.gov.in
जनसुनवाई-प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभ किया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
https:// Jansunwai. up. nic. in
सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ- भारत सरकार की सामाजिक
कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट
का उपयोग किया जा सकता है
https://eshram.gov.in/hi/Social-Security-welfare- Schemes
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।
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आज की पहेली
नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए

उत्तर :
2. याद
3. वकील
4. झोपड़ी
5. जर्मीदार
6. तौलिक
खोजबीन के लिए

हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है, जो आज भी विश्व में मनोरंजन और शान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।