Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 7 मत बाँधो कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 7 Question Answer मत बाँधो
NCERT Class 8th Hindi Chapter 7 मत बाँधो Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 7 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi मत बाँधो Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा
बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
- सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
- सपनों को भूल जाना चाहिए
- सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
- सपने देखना अच्छी बात है
उत्तर :
सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।

2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
- प्रेम की
- शिक्षा की
- सपनों की
- अधिकारों की
उत्तर :
सपनों की॰ अधिकारों की
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3. ‘इन सपनों के पंख न काटो’ पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
- सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
- सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
- सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
- सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
उत्तर :
सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैै, सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
4. ‘स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प’ पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?
- जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
- जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
- जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
- जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों

उत्तर :
जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो॰ जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संबेदनशील हों
5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
- वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
- वह और गहरा हो सकता है
- उसकी उड़ान रुक सकती है
- वह बढ़कर पौधा बन सकता है
उत्तर :
बह बढ़कर पौधा बन सकता है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
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पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पड़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नम में कब उड़ पाता है?”
उत्तर :
मुझे इन पंक्तियों का यह अर्थ समझ आया कि कवयित्री कहना चाहती हैं कि जैसे सुगंध (सौरभ) एक बार उड़कर आकाश में चली जाती है, तो फिर वापस नहीं आती, उसी तरह अगर किसी के सपनों को समय पर उडने का अवसर न मिले, तो बे हमेशा के लिए खो जाते हैं। बीज अगर मिट्टी में द्यकर रह जाए और उसे बढ़ने का सही माहौल न मिले, तो वह कभी पेड़ नहीं बन सकता और न ही ऊँचाई तक पहुँच सकता। इससे मुझे यह सीख मिलती है कि हमें अपने और दूसरों के सपनों को दबाना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें उड़ने और बढने का पूरा अवसर देना चाहिए।

(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”
उत्तर :
मुझे इन पंक्तियों का यह अर्थ समझ आया कि सपने जब खुले आकाश में उड़ते हैं, तो बे ऊँचाइयों को छूते हैं। वे तारों जैसे चमकते हैं और बादलों से रंग, किरणों से प्रकाश लेते हैं। फिर वही सपने प्रेरणा बनकर धरती पर लौटते हैं। हमें सपनों को उडने की आज़ादी देनी चाहिए, ताकि वे कुछ नया रच सकें।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से मिलाइए।

उत्तर :
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| (क) इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो। | 3. किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ, तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही अगर हम किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। |
| (ख) सपनों में दोनों ही गति हैं उड़कर आँखों में आता है! | 5. सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। |
| (ग) इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो! | 1. सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। |
| (घ) नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो ! | 2. सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। |
| (ङ) स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा ! | 4. रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। |
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सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए
(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
उत्तर :
ये संबोधन उन लोगों के लिए हैं, जो दूसरों के सपनों, कल्पनाओं और स्वतंत्र सोच को रोकना या सीमित करना चाहते हैं। यह संदेश विशेषकर बच्चों, नवाचार करने वालों, रचनात्मक व्यक्तियों और समाज के हर सपने देखने बाले को आज़ादी देने के लिए है।
(ख) कविता में सपनों की गतिन घाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
उत्तर :
सपनों की गति बाँधने से उनकी स्वतंत्रता, कल्पना और उड़ान पर रोक लग जाती है। यदि हम उन्हें मुक्त छोड़े, तो वे साकार हो सकते हैं और नई दिशा ले सकते हैं। रोकने पर बे नष्ट हो जाते हैं।
(ग) कचिता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
उत्तर :
सपने व्यक्ति को हिम्मत्त देते हैं, वह असंभव को संभव करने का विश्वास देते हैं। बे समय और सीमाओं से परे होते हैं। सपनों में भविष्य देखने की शक्ति होती है और वे व्यक्ति को निरंतर प्रेरणा देते हैं।
(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्त्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?
उत्तर :
एक छात्र प्रतियोगिता में पहले असफल हुआ (अवरोहण), लेकिन उसने प्रयास जारी रखे और अंत में सफल हुआ (आरोहण)।
(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है/उड़कर आँखों में आता है !” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हाँ, मैं सहमत हूँ। मेरे चचेरे भाई का सपना था कि वह पायलट बने, उसने कठिन परिश्रम किया और आज एक एयरलाइन में कार्यरत है। इसी तरह अब्दुल कलाम जी का सपना वैज्ञानिक बनने का था, जो उन्होने साकार किया।
शीर्षक
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो, तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर :
मै इस कविता का नाम ‘सपनों को उङने दो’ रखूंगी, क्योकि यह कविता सपनों की स्वतंत्र उड़ान और उनकी गति को न रोकने का संदेश देती है।
अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर :
यदि मैं एक नया संसार बनाऊँ, तो उसमें मैं प्यार, समानता, शिक्षा, स्वतंत्रता और प्रकृति की सुंदरता रखंगा। मैं नफ़रत, भेदभाव, हिंसा और लालच को उस संसार में नहीं रखूँगा, क्योकि ये बातें समाज को तोड़ती हैं और इसानियत को नुकसान पहुँचाती हैं। मेरा संसार हर किसी के लिए सुरक्षित, खुशहाल और सम्मानपूर्ण होगा।
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(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए।
उत्तर :
में संगीत की कला सीखना चाहूँगा, क्योकि संगीत दिल को शांति देता है और भावनाओं को सुंदर ढंग से ब्यक्त करता है। जब मैं उदास होऊँगा या अकेला महसूस करूँगा, तब संगीत मुझे उत्साह और सुकून देगा। संगीत न सिर्फ़ मेरे जीवन को सुंदर बनाएगा, बल्कि दूसरों के चेहरों पर भी मुस्कान लाएगा। इससे मेरा मन शांत, रचनात्मक और खुशहाल रहेगा।
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में/फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले, तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
उत्तर :
यदि मुझे बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले, तो मैं अपनी गलतियों से जल्दी सीखना, अपनों के साथ अधिक समय बिताना और हर पल को पूरी तरह जीना चाहूँगा। मैं उन बातों को बदलना चाहूँगा, जिनसे किसी को दु:ख पहुँचा हो। मैं अपने समय का बेहतर उपयोग करता और हर अच्छे मौके को पहचानकर आगे बढ़ता। इससे मेरा वर्तमान और भी बेहतर और सशक्त होता।
(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो/वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों, तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत- धूप अर्थात् मेहनत, पानी अर्थात् लगन आदि।)
उत्तर :
यदि सपने बीज की तरह हों, तो उन्हें उगने के लिए इन चीज़ों की आवश्यकता होगी
- धूप (मेहनत)-बिना परिश्रम के कोई सपना साकार नहीं होता।
- पानी (लगन)-लगातार प्रयास और लगन से ही सपना विकसित होता है।
- मिट्टी (सही दिश और मार्गदर्शन)-अच्छे वातावरण और सलाह से सपना आकार लेता है।
- हवा (सकारात्मक सोच)-आशा और आत्मविश्वास से सपनों को उड़ान मिलती है।
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प/भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है, तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर :
बुरे सपनों या विचारों से मनुष्य का जीवन अशांत, भयभीत और नकारात्मक हो सकता है। इससे समाज में भी तनाव, हिंसा और असंतुलन फैलता है।
बुरे सपनों या विचारों से बचने के लिए निम्न बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिए
- सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
- अच्छी संगत में रहना चाहिए।
- पढ़ाई, कला या ध्यान जैसे अच्छे कार्यों में मन लगाना चाहिए।
- सच्चाई, करुणा और आत्मविश्वास को जीवन का भाग बनाना चाहिए।
(च) “इन सपनों के पंख न काहोइन सपनों की गति मत बाँधो !” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्त्वपूर्ण होंगी?
उत्तर :
यदि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तो दुनिया बहुत सुंदर, रचनात्मक और उन्नत हो जाएगी। लोग डर, भेदभाव या रुकावटों से मुक्त होकर अपने अंदर छिपी क्षमताओं को पहचान सकेंगे। ऐसी दुनिया में स्वतंत्रता, समान अवसर, सहनशीलता और प्रोत्साहन देने बाला बातावरण बहुत महत्वपूर्ण होगा, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने सपनों को साकार का सके और समाज को भी आगे बढ़ा सके।
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(छ) “इन सपनों के पंख न काटो/इन सपनों की गति मत बाँधो।” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
उत्तर :
‘इन सपनों के पंख न काटो/इन सपनों की गति मत बाँधो!’-यह एक प्रार्थना और विनग्र आग्रह के रूप में कही गई बात है। इसमें काव्यात्मकता के साथ यह संदेश दिया गया है कि किसी के सपनों को सीमित मत करो, उन्हें उड्डान भरने दो। यह बात्त समाज, माता-पिता, शिक्षकों या सत्ता में बैठे लोगों से कही गई है-जो अक्सर दूसरों के सपनों को रोकने की शक्ति रखते है। कवयित्री चाहती हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने सपनों को जीने की पूरी स्वतंत्रता दी जाए।
कविता की रचना
“सौरभ उड्ड जाता है नभ में…”
“बीज धूलि में गिर जाता जो…”
“अग्नि सदा धरती पर जलती…”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है, जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
(ख) नीचे इस कविता की कुुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं, जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।

उत्तर :
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| (क) एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 2. इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो ! |
| (ख) एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है। | 4. इन सपनों के पंख न काटो |
| (ग) समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा ! |
| (घ) प्रश्न पूछा गया है। | 1. वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| (ङ) संबोधन का प्रयोग किया गया है। | 5. नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो ! |
| (च) सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है। | 3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा ! |
शब्दों की बात

‘इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!’
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है- नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ हैऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना।
(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।
पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर _______ कर विजय प्राप्त की।
नदियाँ विशाल पर्वतों से _______ करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया _______ क्रम कहलाती है।
उत्तर :
‘आरोहण’, ‘अवरोहण’ ‘अवरोहण’
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इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।
उत्तर :
- सैनिकों ने दुर्ग पर आरोहण कर उसे अपने अधिकार में ले लिया।
- चिड़िया ने धीरे-धीरे आकाश की ओर आरोहण किया।
- योग अभ्यास में श्वास का आरोहण और अवरोहण महत्वपूर्ण होता है।
- हेलीकॉप्टर ने जमीन से आसमान की ओर आरोहण किया।
- वर्षा की बूँदें बादलों से अवरोहण करके धरती पर गिरती हैं।
(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए

“वह नभ में कब उड़ पाता है?”
“धूम गगन में मँडराता है।”
‘नम’ और ‘गगन’ समान अर्श्म-वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर :
नई पंक्तियाँ (समानार्थी शब्दों के प्रयोग से)
‘वह अंबर में कब उड पाता है?’
‘धूम आकाश में लहराता है।’
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत- ‘मत डरो’)
उत्तर :
मैं ‘मत’ के साथ निम्नलिखित क्रियाएँ लगाना चाहूँगा
- मत थको।
- मत तोड़ो।
- मत हटो।
- मत भूलो।
- मत देखो।
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे बाक्य बनाइए। (संकेत – जोड़ना)
उत्तर :
‘बाँधने’ के लिए अन्य क्रियाएँ व उनके वाक्य इस प्रकार हैं
- जोड़ना – मैने टूटे हुए तारों को फिर से जोड दिया।
- लपेटना – उसने रस्सी को डंडे के चारों ओर लपेट दिया।
- गूँधना – माँ ने फूलों की सुंदर माला गूँधी।
- समेटना – उसने सारे कपडे समेटकर रस्सी से बांध दिए।
- कसना – माली ने पौधे को सहारे से कसकर बाँधा।
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(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है-‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए, जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
उत्तर :
काटो-टोका, सदा-दास, नम-भन (भाषण या कथन)।
काल परिवर्तन
“सौरभ उड़ जाता है नभ में”
उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें, तों यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी।
भूतकाल सौरप उड़ गया है नम में
भविष्य काल सौरभ उड़ जाएगा नभ में
कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढकर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।
उत्तर :
1. वर्तमान काल : ‘इन सपनों के पंख न काटो’
भूतकाल : ‘इन सपनों के पंख न काटे गए थे।’
भविष्य काल : ‘इन सपनों के पंख्य न काटे जाएँगे।’
2. वर्तमान काल : ‘इन सपनों की गति मत बाँधो!’
भूतकाल : ‘इन सपनों की गति नहीं बाँधी गई थी।’
भविष्य काल : ‘इन सपनों की गति नहीं बाँधी जाएगी।’
3. वर्तमान काल : ‘अग्नि सदा धरती पर जलती’
भूतकाल : ‘अग्नि सदा धरती पर जलती थी।’
भविष्य काल : ‘अग्नि सदा धरती पर जलेगी।’
4. वर्तमान काल : ‘घूम गगन में मंडराता है’
भूतकाल : ‘भूम गगन में मॅंडराया करता था।’
भविष्य काल : ‘धूम गगन में मँडराएगा।’
शब्दकोश से
‘स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प’
शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं-
1. हाथ से कोई चीज बनाकर तैयार करने का काम-दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे-बर्तन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि।
2. कला संबंधी ब्यबसाय।
3. दक्षता, कौशल।
4. निर्माण, सर्जन, सृष्टि, रचना।
5. आकार, आवृत्ति।
6. अनुष्ठान, क्रिया, धार्मिक कृत्य।

अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए
1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी
2. शिल्पकला
3. शिल्पकौशल
4. शिल्पगृह या शिल्पगेह
5. शिल्पविद्या
6. शिल्पशाला या शिल्पालय
उत्तर :
1. शिल्पकार – करीगर, दस्तकार, शिल्प निर्माण करने वाला व्यक्ति।
2. शिल्यो – कुशल कलाकार, रचनात्मक कार्य करने वाला व्यक्ति।
3. शिल्पजीवी – शिल्प को आजीविका का साधन बनाने वाला।
4. शिल्पकारक – निर्माण में सहायक कारण या तत्व।
5. शिल्पिक/शिल्पकारी – शिल्प निर्माण संबंधी, शिल्प से संबंधित प्रक्रिया।
6. शिल्पकला – वस्तुओं के कलात्मक निर्माण की कला।
7. शिल्पकौशल – शिल्प निर्माण की दक्षता या निपुणता।
8. शिल्पगृह/शिल्पगेह – शिल्प कार्य करने का स्थान, कार्यशाला।
9. शिल्पविद्या – शिल्प से संबंधित ज्ञान और सिद्धांत।
10. शिल्पशाला/शिल्पालय – शिल्प शिक्षा या प्रशिक्षण का स्थान, शिल्प विद्यालय।
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पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत – गाँठ बाँधना)
उत्तर :
‘बांधने’ शब्द का प्रयोग अनेक स्थितियों या वस्तुओं के लिए किया जाता है; जैसे-
- गाँठ बाँधना – कपड़े या रस्सी को ओड़कर मजबूत करना।
- पानी बाँधना – बाँध या रोक बनाकर जल को रोके रखना।
- बाल बाँधना – बालों को एकसाथ समेटकर रस्सी या रबर से बाँधना।
- रस्सी बाँधना – किसी वस्तु को रस्सी से कसकर बाँधना।
- जानवर बाँधना – जानवर को खूँटे या किसी जगह रस्सी से बाँधना।
- बंधन बाँधना (राखी आदि) – राखी या पवित्र धागा बाँधना, विशेष अवसर पर।
- बंधक बाँधना – कानूनी रूप में किसी को बंधन में लेना।
- मन बाँधना – किसी का ध्यान, आकर्षण या भावनाएँ अपने में केंद्रित करना।
- समय बाँधना – निश्चित समय तय कर देना या समय की सीमा में रखना।
- शर्त वाँधना – कोई अनुबंध या वादा तय करना।
(ख) ‘स्वग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’ अर्थात् वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर :
अपने घर, आस-पड्रोस और विद्यालय को सुखद स्थान (स्वर्ग जैसा) बनाने के लिए मैं निम्नलिखित प्रयास करूंगा
घर को सुखद स्थान बनाने के प्रयास
- घर में सभी से प्रेमपूर्वक बात करना।
- साफ-सफ़ाई बनाए रखना।
- बड़ों का सम्मान और छोटों को स्नेह देना।
- समय पर पढ़ाई और कार्य पूरा करना।
- परिवार के साथ समय बिताना और उनकी सहायता करना।
- घर में पौधे लगाना और वातावरण को सुंदर बनाना।
- क्रोध और झगड़े से बचना।
आस-पड़ोस को सुखद बनाने के प्रयास
- पड़ोसियों से नग्रता और मित्रता से पेश आना।
- मोहल्ले में स्वच्छता बनाए रखना।
- ज़रूतमंद की सहायता करना।
- आपसी सहयोग और मेलजोल बढ़ाना।
- सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करना।
- शोर-शराबा न करना और दूसरों की शांति का ध्यान रखना।
- पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक वृक्षारोपण करना।
विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के प्रयास
- शिक्षकों और सहपाठियों का सम्मान करना।
- विद्यालय की सफाई में सहयोग करना।
- समय पर विद्यालय आना और कार्य समय पर पूरा करना।
- मित्रों से सहयोग और सौहार्द रखना।
- विद्यालय की सम्पत्ति का ध्यान रख्बना।
- पढ़ाई में मन लगाना और दूसरों को भी प्रेरित करना।
- विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना।
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(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है, जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।
उत्तर :
मेरा सपना है कि मैं एक ऐसा स्थान बनाऊँ, जहाँ कोई भी बच्चा बिना किसी पैसे के पढ़ सके। बहुत से बच्चे केवल इसलिए पढ़ाई नहीं कर पाते, क्योंकि उनके पास किताबें, कॉपी या स्कूल की फीस देने के पैसे नहीं होते। अगर मेरा यह सपना सच हो जाए, तो ऐसे सभी बच्चों को पढ़ने का मौका मिलेगा।
वे भी अपने जीवन में आगे बढ़ सकेंगे और एक अच्छा इसान बन सकेंगे। जब वे आगे चलकर कुछ बनेगे, तो वे भी दूसरों की सहायता करेंगे। इस तरह मेरा सपना सिर्फ़ मेरा नहीं रहेगा, वह औरों के लिए भी रास्ता बन जाएगा।
चर्चा-परिचर्चा

“सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है।” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत-से लोगों का भी सपना बन जाता है, जैसेहमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।
उत्तर :
मेरे कुछ ऐसे सपने हैं, जिन्हें मैं अकेले नहीं, वल्कि और लोगों को साथ लेकर पूरा करना चाहूँगा। ऐसा ही एक सपना है-अपने शहर या गाँव को साफ़ और सुंदर बनाना। मैं चाहता हूँ कि प्रत्येक गली, प्रत्येक सडक और प्रत्येक मोहल्ला साफु-सुथरा हो, जहाँ लोग बिना गंदगी के, स्वस्थ वाताबरण में रह सकें।
इस सपने को पूरा करने के लिए मैं अपने दोस्तों, पड़ोसियों और स्कूल के साथियों को जोड़ना चाहूँगा। हम सब मिलकर मोहल्ले में सफाई अभियान चला सकते है।, लोगों को कूड़ा सही जगह फेंकने के लिए जागरूक कर सकते हैं, पेड-पौधे लगा सकते हैं और दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जब एक सपना सबका सपना बन जाता है, तो उसे पूरा करना आसान और मज़ेदार भी हो जाता है। मेरा मानना है कि मिलकर काम करने से कोई भी सपना सच हो सकता है।
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सृजन

(क) विराम चिह्न का फेरबदल-
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्त्व होता है। विराम चिह्नों के प्रयोग से वाक्य या पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हो जाता है और परिवर्तित भी हो जाता है, जैसे-‘रोको मत, जाने दो’ में रोको मत के बाद अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिना रोके जाने दिया जाए। वहीं ‘रोको, मत जाने दो’ में रोको के बाद अल्पविराम (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि जाने से रोका जाए। नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।

उत्तर :

(ख) कविता आगे बढ़ाएँ
नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक कविता तैयार कीजिए।

उत्तर :
ये तो उड्मान हैं नयी सुबह की,
हर दिल की अनकही चाहत की।
इनमें ठिपा है आगे बढ़ना,
हर रुकावट को पीछे कर जाना।
इनसे ही तो नयी दिशा है,
हर जीवन में आशा की बजह है।
कभी किसी का उजला कल हैं,
कभी किसी की थामी हलचल हैं।
इन सपनों को मत हराओ,
ना तोड़ो, ना ही बहलाओ।
बस थोड़ी-सी उड़ान दो इनको,
आकाश छूने का मान दो इनको।
इन सपनों के पंख्य न काटो,
इन सपनों की गति मत बाँधो।
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(ग) खोया-पाया
मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।
उत्तर :
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय
बुलंदशहर
दिनांक : 7 जून, 20 XX
विषय मेरे सपने के खो जाने की रिपोर्ट।
मान्यवर,
सविनय निवेदन यह है कि मेरा एक सपना, जिसे मै बहुत समय से दिल में संजोए हुए था, अव मुझसे कहीं खो गया है। वह सपना मेरे जीवन की दिशा था, मेरी प्रेरणा था और मुझे आगे बढ़ने का हौसला देता था।
पिछले कुछ समय से मैं उसे ढूँढ रहा हैं। कभी किताबों के पन्नों में, कभी दोस्तों की बातों में, कभी आसमान की उड़ान में, पर वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
मेरा सपना था कि मैं बड़ा होकर एक ऐसा इंसान बनूँ, जो दूसरों की सहायता करे, अपने देश और समाज के लिए कुछ अच्छा कर सके।
पर अब लगता है जैसे वह सपना भीड़ में कहीं खो गया है, शायद व्यस्तता, परीक्षा के दबाव या आत्मविश्वास की कमी में। आपसे निवेदन हैं कि विद्यालय में कोई ऐसी गतिविधि, चर्चा या प्रेरणात्मक सत्र करवाया जाए, जिससे हम सभी छात्र अपने खोए हुए सपनों को फिर से बूँढ सकें और उन्हें फिर से जीने की प्रेरणा पा सकें।
आशा है कि आप मेरे इस-भाच को समझेंगे और ज़रूरी कदम उठाएँगे।
धन्यवाद
पुष्मा ज्ञाह
कक्षा-आठवीं
रोल नंबर-11
वाद-विवाद

(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक बाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है- “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”
एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे-
समूह 1 व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।
समूह 2 स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर :
‘व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।’ वाद-विवाद गतिबिधि पर तर्क निम्न प्रकार हैं

(ख) विद्यार्थी बाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।
उत्तर :
वाद-विवाद का अनुभु पिछले सप्ताह हमारी कक्षा में ‘व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। हम पाँच-पाँच विद्यार्थियों के दो समूहों में बाँटे गए। एक समूह पक्ष में और दूसरा विपक्ष में था। मैं पक्ष वाले समूह का भाग था। यह अनुभव मेरे लिए बहुत रोचक और शिक्षाप्रद रहा। मैंने सीखा कि तकों को सही तंग से प्रस्तुत करने के लिए न केवल विषय की समझ ज़रूरी है, वल्कि आत्मविश्वास और स्पष्ट भाषा भी जरूरी होती है। प्रतियोगिता के दौरान कई रोचक और गहरें विचार सामने आए, जिससे मेरी सोच को एक नई दिशा मिली। सबसे अच्छी वात यह रही कि हम सबने एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हूए अपनी बात रखी। इस गतिविधि ने मेरी बोलने की क्षमता को निखारा और मुझे अपने बिचार स्पष्ट रूप से रखने का आत्मविश्वास भी दिया। मैं भविष्य में और भी वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहूँगा।
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देखना-सुनना-समझना….

(क) ‘धूम गगन में मँडराता है।’
सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं
वर्षा की बूँदों का अनुभव
उत्तर :
मैं उस ब्यक्ति को बाहर ले जाऊँगा, जब हल्की बारिश हो रही हो। उसे बारिश में हाथ फैलाकर खड़ा करूँगा, ताकि वो बूँदों की ठंडक और रप्तार को अपनी त्वचा से महसूस कर सके। बारिश की टपकती आवाज़ और मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू से भी वो समझ सकेगा कि बारिश हो रही है।
धुएँ के उड़ने का अनुभव
उत्तर :
धुएँ की तीखी गंध से ही अंदाज़ा हो सकता है कि कहीं कुछ जल रहा है। अगर मैं उसे हाथ से हवा में बहता धुआँ महसूस करवा दूं, तो वह समझ सकता है कि कैसे धुआँ ऊपर उड़ता है। कभी-कभी साँस में थोड़ी सी जलन भी महसूस होती है, जिससे वो और बेहतर समझ पाएगा।
खेल के रोमांच का अनुभव
उत्तर :
मैं उसे खेल के मैदान में ले जाऊँगा और स्वयं उसे मैच की प्रत्येक स्थिति आवाज़ के ज़रिए बताऊँगा-जैसे अब गोल होने वाला है, अब गेंद पास हुई, अब झौंट मारा गया। मैदान में लोगों की चीख-पुकार, तालियाँ और खिलाडियों की आवाज़ सुनकर उसे भी वही जोश महसूस होगा, जैसा हम करते हैं और अगर वो स्वयं खेल में भाग ले सके, तो और भी ज़्यादा मज़ा आएगा।
(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव
विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए। दलों के नाम रखें – कल्पना और आकांक्षा।
‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय (हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए।
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निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
आपदा प्रबंधन
“अग्नि सदा धरती पर जलती/धूम गगन में मँडराता है!”
आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाब संभव हो जाता है।
(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि
- कहीं अचानक आग लग जाए
- आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए
- भूकंप आ जाए
उत्तर :
(क) यदि कहीं अचानक आग लग जाए, तो हम सबसे पहले सभी को शांत और सावधान रहने के लिए कहेंगे। दुरंत सिर और नाक पर रुमाल या कपड़ा रखकर बाहर निकलेगे। अगर आग ज्यादा फैल गई हो, तो आपातकालीन नंबर (जैसे-101) पर कॉल करके फायर ब्रिगेड को बुलाएँगे। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का उपयोग करेंगे। अगर कोई व्यक्ति फैस गया हो, तो उसकी जानकारी तुरंत बड़ों या पुलिस को देंगे, स्वयं बचाव नहीं करेंगे।
(ख) यदि हमारे क्षेत्र में बाढ़ आ जाए, तो तुरंत ऊँचे स्थानों पर चले जाएँगे। पीने का पानी, सूखा खाना, जरूरी दबाइयाँ और मोबाइल साथ रखेंगे। बिजली के उपकरणों और वायरों से दूर रहेंगे। प्रशासन से आने वाली रेडियो या मोबाइल सूचना को ध्यान से सुनेगे। अनावश्यक यात्रा नहीं करेंगे और जरूरतमंदों की सहायता करेंगे।
(ग) यदि भूकंप आ जाए तो, अगर हम इमारत के अंदर हैं, तो मेज़, कुसीं या मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएँगे और सिर को हाथ से ढक लेगे। दरवाज़े, खिड़की या काँच के पास नहीं खड़े होंगे। जैसे ही झटका रके, धीरे-धीरे बाहर खुले स्थान में जाएंगे। अगर हम बाहर हैं, तो पेड़ों, खंभों और इमारतों से दूर रहेंगे। अफबाहों से बचेंगे और प्रशासन की सलाह का पालन करेंगे।
(ख) ‘मैं आपदा के समय क्या करूँगा या करूँगी?’-एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।
शिल्प
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!”
हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अथों या व्याख्या से मिलाइए

उत्तर :
| शिल्प-कार्य | अर्थ या व्याख्या |
| (क) काष्ठ शिल्प | 4. लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना |
| (ख) मृत्तिका शिल्प | 5. मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना |
| (ग) धातु शिल्प | 6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना |
| (घ) काँच शिल्प | 1. काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना |
| (ङ) वस्त्र शिल्प | 2. कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य |
| (च) कागज़ शिल्प | 3. कागज़ से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना |
| (छ) पत्थर शिल्प | 13. संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट करना आदि |
| (ज) चमड़ा शिल्प | 12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना |
| (झ) बाँस और बेंत शिल्प | 11. बाँस और बैंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना |
| (अ) मोती एवं आभूषण शिल्प | 14. रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना |
| (ट) लाख शिल्प | 9. लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्ये और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना |
| (ठ) शीशा शिल्प | 8. कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना |
| (ङ) चित्रकला शिल्प | 7. पारंपरिक चित्रकलाओं, जैसे-मधुबनी, गोंड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना |
| (ढ) नक्काशी शिल्प | 10. लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना |
(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई बेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों? उसके विषय में लिखिए।
https://nationalcraftsmuseum.nic.in/
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झरोखे से
अभी आपने जो कविता पढ़ी उसे लिखा है महादेवी वर्मा ने। अब पढ़िए इन्हीं के द्वारा लिखी एक कहानी ‘गिल्लू’ का अंश
मेरे पास बहुत से पशु-पक्षी हैं और डनका मुझसे लगाव भी कम नहीं है, परंतु उनमें से किसी को मेरे साथ मेरी थाली में खाने की हिम्मत हुई है, ऐसा मुझे स्मरण नहीं आता।
गिल्लू इनमें अपवाद था। मै जैसे ही खाने के कमरे में पहुँचती, वह खिड़की से निकलकर आँगन की दीवार, बरामदा पार करके मेज़ पर पहुँच जाता और मेरी थाली में बैठ जाना चाहता।
बड़ी कठिनाई से मैंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया, जहाँ बैठकर वह मेरी थाली में से एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफ़ाई से खाता रहता। काजू उसका प्रिय खाद्य था और कई दिन काजू न मिलने पर वह अन्य खाने की चीज़ें या तो लेना बंद कर देता या झूले से नीचे फेंक देता था।
साझी समझ
‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढकर पूरी पढ़िए और अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।