Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 8 नए मेहमान एकांकी के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 8 Question Answer नए मेहमान
NCERT Class 8th Hindi Chapter 8 नए मेहमान Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 8 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi नए मेहमान Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस एकांकी को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर : के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर : भी हो सकते हैं।

1. आरंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
- अतिथियों की सेवा करने के कारण
- किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
- आज्ञाकारिता के भाब के कारण
- गरमी को चुपचाप सहने के कारण
उत्तर :
अतिथियों की सेवा करने के कारण
किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
2. ‘एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…’ विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्देयी क्यों कहा?
- उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं।
- पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं।
- लड़ने-शगड़ने के अवसर डूँढते हैं।
- अतिथियों का अपमान करते हैं।
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उत्तर :
उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं।
पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं।
3. ‘ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।’ रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
- मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
- रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
- अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
- उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
उत्तर :
रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
4. ‘हे भगवान। कोई मुसीबत न आ जाए।’ रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

- पानी की कमी होने की
- पड़ोसियों के चिल्लाने की
- मेहमानों के आने की
- गरमी के कारण बीमारी की
उत्तर :
मेहमानों के आने की
5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

- संवाद
- कथा
- वर्णन
- मंचन
उत्तर :
संवाद
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(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।’
उत्तर :
इस पंक्ति से हमें पता चलता है कि गरमी इतनी ज्यादा है कि आदमी डेर सारा पानी पी रहा है, फिर भी उसे तृप्ति नहीं मिल रही। शरीर गरमी से इतना बेहाल है कि प्यास बुझ ही नहीं रही। यह पंक्ति गरमी की तीव्रता को दर्शाती है।
‘सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।’
उत्तर :
यह पंक्ति बहुत ही गहरी और प्रभावशाली है। इससे यह समझ में आता है कि गर्मी इतनी प्रचंड है कि ऐसा लग रहा है मानो ऊपर से सूरज की किरणें नहीं, बल्कि आग गिर रही हो। यह एक रूपक है, जिससे अत्यधिक ताप का अनुभव कराया गया है।
‘यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।’
उत्तर :
यह पंक्ति आम आदमी की तकलीफ को दिखाती है। इसमें अपने हालात को चने की तरह बताया गया है, जो भट्टी में तपते हैं। यहाँ ‘भाड में भुनना’ कहकर यह बताया गया है कि गरीब या मध्यमवर्गीय लोग हमेशा कठिनाइयों में ही जीते हैं-गमीं, असुविधा और अभाव के बीच।
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‘आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।’
उत्तर :
यह पंक्ति बताती है कि गरमी में पानी कितना ज़रूरी होता है। जब प्यासे व्यक्ति को ठंडा पानी मिलता है, तो उसे बहुत राहत मिलती है। ऐसा लगता है, जैसे वह दोबारा जीवित हो गया हो। यहाँ पानी को ‘जान’ अर्थात् ‘जीवन’ कहा गया है।
मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए-

उत्तर :
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए। | 3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है |
| 2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो। | 4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है |
| 3. माल-मसाला तो अंटी में है न? | 5. धनराशि सुरक्षित तो है न! |
| 4. खाने में क्या देर-दार है। | 1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी |
| 5. पहले आत्मा फिर परमात्मा | 2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम |
सोच-विचार के लिए
एकांकी को पुन: पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए
(क) ‘शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।’ नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
उत्तर :
‘ऐसे ही मकान’ से नन्हेमल का आशय शहर के छोटे, सँकरे और गरमी से भरे मकानों से है। वह यह बताना चाहता है कि शहरों में मकान बड़े नहीं होते और उनमें हवा और रोशनी की कमी होती है।
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर : दीजिए।
उत्तर :
पड़ोसी को शिकायत है कि विश्वनाथ ने अपने घर की खिड़की और बालकनी बंद कर रखी है, जिससे उस ओर से आने वाली हवा रुक गई है और उनके घर में गरमी अधिक हो रही है। मेरे विचार से पड़ोसी का व्यवहार अनुचित है, क्योकि हर व्यक्ति को अपने घर की सुविधा के अनुसार खिड़की-दरवाज़े खोलने या बंद करने का अधिकार है।
विश्वनाथ ने केवल थोड़ी घबराहट के कारण खिड़की बंद की थी। ऐसे में पड़ोसी को केवल अपनी सुविधा के बारे में सोचना स्वार्थपूर्ण ब्यवहार है।
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(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर :
विश्वनाथ भले ही नन्हेमल और बाबूलाल को पहले से नहीं जानता था, लेकिन वह यह समझता है कि तेज़ गरमी में बाहर खड़ा रहना बहुत कष्टदायक होता है।
इसानियत और सहानुभूति के नाते वह उन्हें अपने घर में बैठने देता है, ताकि वे कुछ देर चैन से पानी पी सकें और गरमी से राहत पा सकें।
(घ) एकांकी के उन संवादों क्रो इंह्कर लिखिए, जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर :
निम्नलिखित संवादों से स्पष्ट होता है कि बाबूलाल और विश्वनाथ पहले से एक-दूसरे को नहीं जानते
- विश्वनाथ = कौन संपतराम?
- बाबूलाल = अरे! वही गोटेवाले।
- विश्वनाथ = मैं संपतराम को नहीं जानता।
- विश्वनाध = आप कहाँ से आए हैं?
- विश्वनाथ = (खीक्नकर) जिसके यहाँ आपको जाना है, उसका नाम भी तो बताया होगा?
- बाबूलाल = क्या नाम था चाचा?
- बाबूलाल = अरे चाचा, कविराज या कवि बताया था। मैं उस समय नहीं था। सामान लेने घर गया था। तुम्हीं ने रेल में बताया था।
- विश्वनाथ = लेकिन मैं कविराज तो नहीं हूँ?
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढकर लिखिए, जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर :
‘पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।’
‘सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।’
‘आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।’ ये वाक्य दर्शति हैं कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है और लोग बुरी तरह परेशान हैं।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
उत्तर :
उस समय घर की स्थिति अचानक अतिथियों के आगमन से बदली थी और वाताबरण गरमी से व्याकुल था। विश्वनाथ ने स्वयं भोजन बनाने के विषय में इसलिए नहीं सोचा, क्योकि बह पारंपरिक सोच का व्यक्ति है, जहाँ घर में रसोई का कार्य प्राय: महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। साथ ही संभवत: उसे खाना बनाना नहीं आता था या वह यह मानता था कि बाजार से खाना मँगवाना अधिक सरल और सुविधाजनक रहेगा।
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(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर :
प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व दिए गए, क्योंकि वह अभी बच्चा होने के बाबजूद घर में चल रही असुविधाओं और गरमी की स्थिति को समझता है। साथ ही यह संकेत है कि विश्वनाथ और रेबती बच्चों को छोटे-छोटे कामों में शामिल करते हैं, ताकि वे घर की जिम्मेदारियों को महसूस करें और उनकी देखभाल में भागीदार बनें। प्रमोद का यह व्यवहार उसकी समझदारी और घर के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। रेवती अस्वस्थ हैं, तो घर में छोटे-छोटे कार्यों में बच्चों को शामिल करना भी एक तरह से उनकी सहायता करना होता है। प्रमोद की यह भूमिका परिवार में सामूहिक जिम्मेदारी का अहसास कराती है।
(ग) ‘कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
उत्तर :
रेवती उस समय शारीरिक रूप से अस्वस्थ थी और गरमी के कारण उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था। फिर भी जब उसने देखा कि उसका अपना सगा भाई आधी रात में, गरमी और परेशानी में धका-हारा उसके घर पहुँचा है, तो उसका स्नेह उमड़ पड़ा। एक बहन के नाते वह अपने भाई के लिए सेवा करना अपना कर्तंब्य और प्रेम का परिचय मानती है। इसीलिए वह अपने दर्द को भूलकर तुरंत खाना बनाने को तैयार हो गई। उसके मन में यह भाव रहा होगा कि ‘जब भाई तकलीफ में आया है, तो मैं कैसे चैन से बैठ सकती हूँ?’
(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए

उत्तर :

एकांकी की रचना

इस एकांकी के आरंभ में पात्र परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि
‘गरमी की ॠब्रतु, रात के आठ बजे का समय। कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…’
विश्वनाथ-उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भर्यंकर है। मकान है कि पट्टी! (परिचम की ओर से एक स्त्री प्रबेश करती है)
रेवती-(आँचल से भुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।
एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।
एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है, जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर :
‘नए मेहमान’ एकांकी की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- समय और स्थान का परिचय (रंगमंच निर्देश) एकांकी की शुरुआत में समय और स्थान के बारे में जानकारी दी जाती है, जैसे कि समय – ‘गरमी की ॠतु, रात के आठ बजे का समय’ और स्थान – ‘कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…’। यह पाठकों और दर्शंकों को दृश्य की स्थिति और समय का आभास कराता है।
- पात्र परिचय एकांकी में पात्रों का परिचय दिया गया है; जैसे-‘विश्वनाथ’ (गृहपति), ‘रेवती’ (पत्नी), ‘नन्हेमल और बाबूलाल’ (अतिथि) और ‘प्रमोद और किरण’ (बच्चे)। यह पात्रों की भूमिका और उनके रिश्तों को स्पष्ट करता है।
- संवाद एकांकी में पात्रों के बीच संवाद होते हैं; जैसे-‘विश्वनाथ-उफ्फ, बड़ी गरमी हैं’ और ‘रेवती – आँचल से मुँह का पसीना पोछती हुईं, जो पात्रों के भाव, स्थिति और घटनाओं को व्यक्त करते हैं।
- अभिनय संकेत एकांकी में अभिनय के संकेत दिए जाते है; जैसे-‘पंख्रा जोर-जोर से करने लगता है’ और ‘आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुईं। ये संकेत अभिनेता का दृश्य को जीवंत बनाने के लिए मार्गदर्शन करते हैं।
- वेशभूषा संबंधी निदेंश पात्रों की वेशभूषा के बारे में संकेत दिए जाते हैं; जैसे-‘बड़े की मूँछें मुँह को घेरे हुए, छोटे की अधकटी मूँछें, लंबा मुख’। यह अभिनेता को उनके व्यक्तित्व और भूमिका को चित्रित करने में मदद करता है।
- संक्षिप्त कथा (संक्षेप में घटनाओं का प्रस्तुतीकरण) एकांकी में पूरी कहानी संक्षेप में दर्शाई जाती है। घटनाएं जल्दी से घटित होती हैं और पाठक/दर्शक को कहानी का सार और संदेश मिलता है।
- भाबनात्मक और सामाजिक स्थितियों का चित्रण एकांकी में पात्रों की भाबनाएँ और सामाजिक स्थितियाँ दर्शाई जाती हैं, जैसे-‘गरमी में संघर्ष’ और ‘अतिथियों का स्वागत’। यह दर्शाता है कि कैसे पात्र अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को सुलझाते हैं।
- व्यंग्य और हास्य एकांकी मे हास्य और व्यंग्य का उपयोग होता है; जैसे-‘चने की तरह भाड में भुनते रहते हैं।’ यह दर्शाता है कि किस तरह समाज के सामान्य लोग अपनी समस्याओं का सामना करते हैं।
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(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ लिखिए। जो बाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नर्ही’ लिखिए।

उत्तर :
1 -हाँ 2 -हाँ 3 -हाँ 4 -नहीं 5 -नहीं 6 -हाँ 7 -नहीं
अभिनय की बारी
(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए, इस एकांकी में आप क्या-क्या जोड़ेंगे, जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर :
यदि मुझे विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो, तो मैं निम्न तैयारियाँ करूँगा
1. स्थान और समय का निर्धारण मंच पर पहले से यह स्पष्ट करना होगा कि यह दृश्य एक छोटे से कमरे का है, जो गरमी से तंग है। हमें मंच पर कमरे का सेटअप तैयार करना होगा – एक छोटा-सा कमरे जैसा दृश्य, जिसमें दो दरवाजे और एक पुराना पंख्ञा हो। समय भी रात का होना चाहिए, जैसा कि एकांकी में बताया गया है, ताकि दृश्य की वास्तविकता बनी रहे।
2. पात्रों की भूमिका और अभिनय संकेत
विश्वनाथ (गृह्रपति) उन्हें गंभीर, मिचमिची आँखों के साथ दिखाना होगा, क्योकि बह परेशान हैं। उनकी भूमिका में पसीने से तर और थके हुए व्यक्ति के भाव स्पष्ट होने चाहिए।
रेवती (पत्नी) उनके अभिनय में सिर दर्द, घबराहट और सहानुभूति दिखानी होगी। उनका चेहरा थोड़ा अस्वस्थ और थका हुआ दिखेगा।
नन्हेमल और बाबूलाल ( अतिथि) इन दोनों पात्रों को अननबी के रूप में दिखाना होगा। डनकी शर्ट पर पसीने के बब्बे और चेहरों पर थकान होनी चाहिए, ताकि यह पता चले कि बे लंबा सफर तय करके आए हैं।
प्रमोद और किरण (बच्चे) दोनों बच्चों का अभिनय हल्का और चंचल होना चाहिए, जैसे वे गर्मी से परेशान होकर इधर-उधर भाग रहे हों, लेकिन उन्हें अपने अतिधियों का स्वागत करते दिखाया जाएगा।
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3. वेशभूषा
विश्वनाथ उनके लिए साधारण मगर गंभीर वेशभूषा; जैसेलुंगी या घोती और हल्का कपड़ा (क्योकि गरमी है) होगा।
रेवती एक साधारण साड़ी और बाल खुले होगे, जैसे घर में महिलाएँ आमतौर पर रहती हैं। उनके चेहरे पर पसीने की 7 झलक और थकावट साफ़ दिखनी चाहिए।
नन्हेमल और बाबूलाल दोनों के लिए पसीने से सने कपड़े और मैली धोती होगी, ताकि यह दिख सके कि बे यात्रा से थककर आए हैं।
प्रमोद् और किरण हल्के रंग के कपड़े; जैसे-टी-शर्ट और शॉट्स, जो बच्चों के चंचल स्वभाव को दर्शाते हैं।
4. मंच सजावट
मंच पर पुराना पंखा, एक पुरानी मेज़ और दो कुर्सियाँ रखनी होंगी।
आगंतुकों का सामान; जैसे-संदूक और बिस्तर भी मंच पर रखना होगा, ताकि यह दिख सके कि अतिथि अजनबी हैं और थोड़ा असुविधाजनक महसूस कर रहे हैं।
दीवारों पर चिपकी हूई पेटिंग्स इस तथ्य को दर्शाती हैं कि यह एक पुराना, लेकिन जीवित घर है।
5. संगीत और ध्वनि प्रभाव गरमी के प्रभाव को दिखाने के लिए पंखे की आवाज़ और गरमी से परेशान होने की आवाज़ (हबा चलाने की) को जोड़ा जा सकता है।
पानी के गिरने की आवाज, पंखे की रुक-रुक कर चलने की आवाज़ और खुलते दरवाज़ों की आवाज़ जैसे ध्वनि प्रभाबों का उपयोग किया जा सकता है।
6. किरदारों के बीच की रचनात्मकता
पात्रों के संबाद में हल्के-फुल्के हास्य और व्यंग्य का समावेश किया जाएगा, ताकि दर्शकों को किरदारों की परेशानियों के बावजूद भी हँसी आए।
कभी-कभी चुटकुले और जोक्स, जो अतिथियों के आगमन को मजेदार और अजीब बना दें, जैसे बाबूलाल और नन्हेमल के कपड़े निचोडने वाले संवाद।
7. पात्रों के बीच तर्क
रेवती और विश्वनाथ के बीच की बातचीत को दर्शाने के लिए थोड़ी भावनात्मक स्थिति पैदा की जाएगी, जिससे दर्शकों को यह महसूस हो कि बे दोनों बहुत प्यार करते हैं, हालाँकि गरमीं और असुविधा के कारण एक-दूसरे पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे।
इस प्रकार, ‘नए मेहमान’ एकांकी को रोचक, भावनात्मक और मनोरंजनपूर्ण बनाने के लिए कई तरह की तैयारियाँ की जाएँगी।
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा !
सुझाव
आप एकांकी को जैसा दिया गया है, बिल्कुल वैसा भी प्रस्तुत कर सकते हैं या इसमें धोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं।
एकांकी के लिए आस-पास की वस्तुओं का ही उपयोग कर लेना है; जैसे – कुर्सी, मेज़ आदि।
स्थान की कमी हो तो अभिनेता बच्चे अपने स्थान पर खड़े-खड़े भी संवाद बोल सकते हैं।
आप चाहें तो अपने अभिनय को अपने शिक्षक की सहायता से रिकॉई करके उसे अपने परिवार या संबंधियों के साथ साझा भी कर सकते हैं।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
भाषा की बात
‘सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।’
‘चारों तरफ़ दीवारें तप रही हैं।’
‘यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।’
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं, जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है।
उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
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मुहावरे

‘आज दो साल से दिन-रात एक करके डूँढ रहा हूँ।’
‘लाखों के आदमी खाक में मिल गए।’
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहाबरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :
एकांकी में आए अन्य मुहावरे इस प्रकार हैं-धुन सवार होना, अपनी ही हाँकना, जान में जान आना।
मुहावरों का अर्थ और उनसे बने वाक्य इस प्रकार हैं
1. धुन सवार होना
अर्थ किसी काम या विचार में इतना उलझ जाना कि उसी के
बारे में ही सोचते रहना।
वाक्य उसे किताबों के बारे में इतनी धुन सबार थी कि वह रात-रात भर पढ़ाई करता था।
2. अपनी ही हाँकना
अर्थ अपनी बात पर जोर देना या सिर्फे अपनी सुनना।
वाक्य बैठक में उसने अपनी ही हाँकते हुए सभी को अपनी राय पर सहमति जताने के लिए मजबूर कर दिया।
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3. जान में जान आना
अर्थ अचानक से राहत या उत्साह महसूस होना; जैसे-जीवन में ताजगी आ जाना।
बाक्य जब मैने लंबी दौड़ पूरी की, तो पानी पीने के बाद सच में मेरी जान में जान आ गई।
बात पर बल देना
‘वह तो कहो, मैं भी ढूँढकर ही रहा।’
उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ‘ही’ हटाकर पढ़िए
वह तो कहो, मैं भी डूँढकर रहा’
(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई?
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।
(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे

उत्तर
| 1. विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे | और किसी के अतिथि नहीं। |
| 2. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ ही रुकेंगे | यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं। |
| 3. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे | यहाँ ही रुकना निश्चित है। |
‘तुम नहाने तो जाओ।’
उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें
‘तुम तो नहाने जाओ।’
‘तुम नहाने जाओ तो।’
‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।
उत्तर :
| ‘ही’ के प्रयोग से बने वाक्य | ‘तो’ के प्रयोग से बने वाक्य |
| तुम ही उसे समझा सकते हो। | तुम तो बड़े चालू निकले। |
| तुमने ही मेरी मदद की थी। | तुम यहाँ आओ नहीं तो मैं वहाँ आ रहा हूँ। |
| तुम ही इसे सबसे अच्छे से कर सकते हो। | उसने तो बड़ी जल्दी-जल्दी काम कर लिया। |
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) ‘रेवती ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते। विश्वनाथ क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।’
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है, जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए
उत्तर :
व्यक्तिगत अनुभव एक बम मुझे एक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जब मुने यह समझने में समय लगा कि क्या सही है और क्या गलत? मेरे एक दोस्त ने मुझसे एक व्यक्तिगत समस्या पर सलाह ली थी, जिसमें उसे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी चाहिए थी, जिससे वह जुड़ा था। मैं जानती थी कि उस व्यक्ति के बारे में कुछ चीज़ें सही नहीं हैं, लेकिन दोस्त ने मुझसे सीधे तौर पर पूछा और मुझसे यह तय नहीं हो रहा था कि क्या मुझे पूरी सच्चाई बतानी चाहिए या उसे कुछ बातों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। मेरे दिमाग में कई विचार थे। क्या मेरे बताए गए तथ्य उसकी स्थिति को और जटिल बना देगे? क्या मेरी सलाह सही तरीके से उसकी मदद करेगी? यह एक दुविधापूर्ण स्थिति थी, क्योकि मुझे यह तय करना था कि किसे प्राथमिकता दूँ? दोस्त की भलाई या किसी और के बारे में कहे बिना सच्चाई छिपा लेना। कुछ समय तक सोचना पड़ा और अंत में मैने उसे पूरी सच्चाई बताई, ताकि वह भविष्य में किसी गलत स्थिति से बच सके। यह अनुभव मुझे यह समझाने में मदद करता है कि कभी-कभी सही फैसला लेने में समय लगता है, क्योंकि हमारे सामने कई विकल्प होते हैं और हमें अपने फैसले के परिणामों को सोच-समझकर ही चुनना चाहिए।
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(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर :
मेरे अच्छे मित्रों में कुछ ऐसे लोग हैं, जिनसे मैं बचपन से जुड़ी हुई हूँ और कुछ ऐसे भी हैं, जो समय के साथ अच्छे दोस्त बने हैं। मेरे प्रिय मिश्र वे हैं, जो सच्चे, समझदार और मददगार होते हैं। थे मेरी परेशानियों को समझते हैं और हमेशा मेरी मदद के लिए तैयार रहते हैं, चाहे वे किसी भी स्थिति में हों।
उन्हें मेरे लिए खास बनाने वाली बात यह है कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, मेरे विचारों का सम्मान करते हैं और मेरे साथ हैंसी-मज़ाक करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं। उनके साथ बिताया गया समय हमेशा सुखद होता है और वे मुझे हमेशा सही मार्ग दिखाते हैं।
मेरे मित्रों की सच्चाई, समझदारी और सहानुभूति की वजह से वे मेरे लिए प्रिय हैं और मुझे लगता है कि अच्छा मिश्र वही होता है, जो हमें हमारे अध्छे और बुरे वक्त में समान रूप से समर्थन देता है।
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर :
जब मैं किसी संबंधी या मित्र के घर जाती हुँ, तो मैं उनके पसंदीदा उपहार (जैसे-मिठाई या फूल) ले जाती हूँ। स्वच्छ और सलीके से तैयार होकर समय पर पहुँचने की कोशिश करती हूँ। उनकी पसंद के अनुसार तैयारी करती हूँ और सहज, मिश्रवत व्यवहार रखती हुँ, ताकि माहौल अच्छा और आरामदायक हो।
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर :
मैं अपने पड़ोसियों का सहयोग इस प्रकार करती हूँ कि यदि उन्हें किसी चीज़ की आवश्यकता हो; जैसे-किराने का सामान, दबाइयाँ या किसी और कार्य में मदद चाहिए हो, तो मैं उन्हें मदद देने के लिए हमेशा तैयार रहती हूँ। इसके अतिरिक्त यदि किसी को कुछ समय के लिए बच्चों की देखभाल की जरूरत हो या किसी खास कार्य के लिए सहयोग चाहिए हो, तो मैं उसे सहयोग देती हैं। सामाजिक कायों में भी भाग लेकर पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखती हैं और एकजुटता का माहौल बनाने की कोशिश करती हूँ।
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का ब्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर :
सामान्य अतिथियों का व्यवहार विनग्र और शिष्ट होना चाहिए। उन्हें घर के मालिक के आराम और परिस्थिति का ध्यान रखते हुए उनके साथ सहजता से पेश आना चाहिए। अतिथि को घर के नियमों का पालन करना चाहिए और आश्वासन देना चाहिए कि वे घर में असुविधा का कारण नहीं बनेगे। इसके अतिरिक्त सामान्य अतिथि घर में किसी तरह का अतिरिक्त बोझ्न नहीं डालते और घरवालों की परेशानियों का सम्मान करते हैं।
सावधानी और सुरक्षा
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर :
यदि मैं विश्वनाथ की जगह होती, तो सबसे पहले नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय जरूर पूछती, क्योकि हमें यह जानना चाहिए कि सामने वाले कौन हैं और किसलिए हमारे घर आए हैं। बिना जान-पहचान के किसी को भी घर में बुलाना ठीक नहीं है। सावधानी और सुरक्षा हमेशा जरूरी होती है, इसलिए किसी को भी घर के अंदर लाने से पहले हमें थोड़ी जानकारी लेनी चाहिए।
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(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर :
यदि मेरे माता-पिता घर पर नहीं हैं और उसी समय कोई अपरिचित ब्यक्ति घर पर आता है, तो मैं उसे घर के अंदर नहीं आने दूँगी। उसे घर के बाहर इंतजार करने के लिए या बाद में आने के लिए कहूँगी। सुरक्षा की दृष्टि से मैं दरवाज़ा नहीं खोलूँगी।
सृजन
(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (जैसे-एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए…)
उत्तर :
एक दिन मेरे घर में अचानक दो अपरिचित मेहमान आ गए। वे नन्हेमल और बाबूलाल थे। वे बहुत धके हुए और गरमी से परेशान थे। पापा और मम्मी घर पर थे, लेकिन हम उन्हें पहले से नहीं जानते थे। जब वे हमारे घर आए, तो मैं थोड़ी घबराई, क्योकि उनका कोई परिचय नहीं था। फिर भी पापा ने उन्हें अंदर आने दिया और हम उनकी खातिरदारी करने लगे।
हमारे घर में बहुत गरमी थी, पंखा भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। मैने उन्हें पानी पिलाया और आराम करने के लिए कहा। वे दोनों बहुत परेशान थे और लगातार पानी की माँग कर रहे थे। फिर मम्मी ने कहा कि वे थके हुए हैं, इसलिए खाना बना देना चाहिए। मम्मी बुद भी सिर दर्द से परेशान थी। पिताजी को पता ही नहीं था कि ये लोग कौन हैं? बहुत पूछने पर भी स्पष्ट उत्तर नहीं मिल रहा था। कुछ देर बाद पता चला कि वे हमारे नहीं किसी अन्य के मेहमान हैं। यह जानकर माताजी को राहत मिली ही-थी-कि माताजी के भाई आ गए। अपने भाई को देखकर मेरी माता जी बहुत ही खुश थीं। वह अपना सिर दर्द भूलकर उनके लिए खाना बनाने लगीं और इस तरह हमारा गरमी से तपता हुआ दिन खत्म हुआ।
गरमी का प्रकोप
‘तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।’
एकांकी में भीषण गरमी का वर्णन किया गया है। आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या साबधानी बरतेंगे? पाँच-पाँच के समूह में चर्चा करें। मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और इन्हें व्यवहार में लाएँ।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।
तार से संदेश
‘क्या मेरा तार नहीं मिला?’
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था, जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।
टेलीग्राफ
किसी भौतिक वस्तु के विनियम के बिना ही संदेश को दूर तक संप्रेषित करना टेलीग्राफी कहलाता है। विद्युत धारा की सहायता से, पूर्व निर्धारित संकेतों द्वारा, संवाद एवं समाचारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने वाला तथा प्राप्त करने वाला यंत्र तारयंत्र (टेलीग्राफ) कहलाता है। वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गई है।
(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर :
एकांकी में तार भेजने का उल्लेख है, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह लगभग 50 से 60 वर्ष पहले लिखी गई होगी अर्थात् वर्ष 1950-1960 के आसपास।
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(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर :
आजकल संदेश भेजने के लिए कई सुलभ साधन उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से हम तुरंत और आसानी से किसी को भी संदेश भेज सकते है। कुछ प्रमुख साधन निम्नलिखित है
- मोबाइल फोन SMS (Short Message Service) और WhatsApp जैसे एप्स के माध्यम से हम किसी को भी तुरंत संदेश भेज सकते हैं।
- इंमेल (Email) Gmail, Yahoo और Outlook जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम लंबे संदेश या औपचारिक संदेश भेज सकते हैं।
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म/साइट्स पर भी हम मैसेजिंग के माध्यम से संदेश भेज सकते हैं।
- वॉयस और वीडियो कॉल ऐप्स के माध्यम से हम संदेश के साथ बॉयस या वीडियो कॉल भी कर सकते हैं।
- टेक्स्ट मैसेजिंग एप्स के माध्यम से हम तुरंत संदेश भेज सकते हैं।
(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर :
मैं संदेश भेजने के लिए WhatsApp का सर्वाधिक उपयोग करती हूँ। यह बहुत ही सुविधाजनक और तेज़ है। इसके माध्यम से मैं किसी को भी तुरंत टेक्स्ट, फोटो, वीड्डियो या आवाज़ का संदेश भेज सकती हूँ। इसके अतिरिक्त ईमेल का भी इस्तेमाल करती हुँ, खासकर जब मुझे औपचारिक या लंबा संदेश भेजना होता है। इन दोनों माध्यमों से संदेश भेजना आसान और प्रभावी होता है और वे अकसर समय की बहुत बचत करते हैं।
(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा मेजिए।
उत्तर :
प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्ते!
आशा है कि तुम स्वस्थ और खुशहाल होगे। मैं यहाँ पर अच्छे से हुँ, लेकिन इन दिनों बहुत गरमी बढ़ गई है। हर तरफ़ पसीना और तपन है, लेकिन काम चलते रहते हैं।
तुमसे बहुत समय से मुलाकात नहीं हुई और यह सोचकर मै बहुत उदास हूँ। पिछले कुछ महीने में जो बदलाव आए हैं, उन्हें तुम्हारे साथ बाँटना चाहता था। मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्दी हम मिलेंगे और पुरानी बातें फिर से करेंगे।
मुझे याद है कि पिछली बार जब तुम मेरे घर आए थे, तो हम घंटों बातें करते रहे थे। वह वक्त बहुत अच्छा था। अब तो मैं तुमसे मिलने का इंतलार कर रहा हूँ। जल्दी ही मिलने की उम्मीद है।
अपना ध्यान रखना और जल्दी से जवाब भेजना। मुझे तुम्हारी खबरें बहुत पसंद आती हैं।
तुम्हारा मित्र, मोहित
नाप, तौल और मुद्राएँ
‘जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।’
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘गज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है, तो बहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।
(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर :
एक रुपये में 16 आने होते थे। यह पुराने समय में भारतीय मुद्रा का एक हिस्सा था।
(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर :
चार आने में 16 पैसे होते थे। यह भी पुरानी भारतीय मुद्रा प्रणाली का हिस्सा था, जिसमें 1 रुपया = 16 आने और 1 आने = 4 पैसे होते थे।
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(ग) आपके आस-पास ‘गज’ शब्द का प्रयोग किस संदर्म में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर :
‘गज’ शब्द का प्रयोग लंबाई या चौड़ाई की माप के रूप में किया जाता है। एक गज को मापने के लिए अकसर कपडे, भूमि या किसी अन्य चीज़ की लंकाई के संदर्भ में उपयोग किया जाता है। 1 गज = 36 इंच के बराबर होता है।
(घ) बताइए कि एक गज में कितने फीट होते हैं?
उत्तर :
एक गज में 3 फीट होते हैं।
झ्झरोखे से
कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक ‘पथ के साथी’ से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा सा अंश पढ़िए…ऐसे अबसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँचकर कहने लगे… ‘मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिधि आएं हैं, घर में सामान नहीं है।’
उनके अतिथि यहाँ भोजन करने आ आवें, सुनकर उनकी दूष्टि में बालकों जैसा बिस्मय छलक आता है। जो अपना घर समझकर आए हैं, उनसे यह कैसे कहा जाए कि उन्हें भोजन के लिए दूसरे घर जाना होगा। भोजन बनाने से लेकर जूठे बर्तन मांजने तक का काम बे अपने अतिथि देवता के लिए सहर्ष करते हैं। वैतीस कोटि देवताओं के देश में इस वर्ग के देवताओं की संख्या कम नहीं, पर आधुनिक युग ने उनकी पूजा विधि में बहुत कुछ सुधार कर लिया है। अब अतिथि-पूजा के अवसर वैसे कम ही आते हैं और यदि आ भी पड़े तो देवता के और अभिषेक, श्रृंगार आदि संस्कार बेयरा, नौकर आदि ही संपन्न करा देते हैं। पुजारी गृहपति को तो भोग लगाने की मेज पर उपस्थित रहने भर का कर्त्तव्य सँभालना पड़ता है। कुछ देवता इस कर्तख्य से भी उसे मुक्ति दे देते हैं।
ऐसे युग में आतिथ्य की दुष्टि से निराला जी में वही पुरातन संस्कार है, जो इस देश के ग्रामीण किसान में मिलता है।
उनके भाव की अतल गहराई और अबाष वेग भी आधुनिक सभ्यता के छिछले और बँधे भाव व्यापार से भिन्न हैं।
साझी समझ
भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं, तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं? अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर :
हात्र स्वयं करें।
खोजबीन के लिए
इस एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर :
छात्र स्वयं करें।