Practicing with Malhar Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 9 आदमी का अनुपात कविता के प्रश्न उत्तर Question Answer improves a student’s confidence in the subject.
Class 8 Hindi Malhar Chapter 9 Question Answer आदमी का अनुपात
NCERT Class 8th Hindi Chapter 9 आदमी का अनुपात Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 9 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi आदमी का अनुपात Question Answer
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
- पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण
- ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
- सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
- समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
उत्तर :
ब्रत्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
2. कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
- पृथ्वी और सूर्य
- देश और नगर
- घर और कमरा
- मानव और ब्रह्मांड
उत्तर :
मानव और ब्रह्यांड
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3. कविता के
अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
- त्याग, ज्ञान और प्रेम में
- सेवा और परोपकार में
- ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
- उदारता, धर्म और न्याय में
उत्तर :
ईंघ्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
4. कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
- बह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।
- वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
- वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
- वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
उत्तर :
वह अपने छोटेपन को भूल अर्हंकारी हो जाता है।
वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :
मैने कपर दिए गए उत्तर इसलिए चुने है, क्योकि कविता में मनुष्य के ब्रह्मांड के विशाल आकार के सामने अपने छोटे और नगण्य अस्तित्व पर जोर दिया गया है।
कबिता मानव और ब्रह्मांड के अनुपात को समझाकर उसके दोषों; जैसे—अहंकार, ईर्ष्या, स्वार्थ आदि पर व्यंग्य करती है।
मनुष्य का सबसे बड़ा दोष है कि बह अपनी सीमितता को नहीं समझ पाता और अपने भीतर नकागत्मक भावनाओं में डूबा रहता है।
अन्य विकल्पों में जैसे कि ‘पृथ्वी पर सबसे बड़ा’ या ‘सेवा और परोपकार में आदि का उल्लेख कविता में नहीं है, इसलिए उन्हें नहीं चुना गया।
पंक्तियों पर चर्चा
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्योनपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए
(क) “अनगिन नक्षत्रों में/पृथ्वी एक छोटी/करोड़ों में एक ही।”
(ख) “संख्यातीत शंख-सी दीवारें उठाता है/अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
(ग) “देशों की कौन कहे/एक कमरे में/दो दुनिया रचाता है।”

उत्तर :
दी गई पंक्तियों पर चर्चा और उनके अर्थ को स्पष्ट रूप से समझने के लिए यहाँ विस्तृत बिचार प्रस्तुत किए गए हैं। आप इन्हें अपने समूह में भी साझा कर चर्चा कर सकते हैं।
(क) अर्थ और चर्चा
यह पंक्ति ब्रह्मांड की अतुलनीय विशालता को दर्शाती है। अनभिनत तारे (नक्षत्र) और करोड़ों ग्रहों में हमारी पृथ्वी मात्र एक बहुत ही छोटी और नगण्य इकाई है। इसका यह अर्थ है कि हमारी धरती भी ब्रह्मांड की विशालता के समक्ष अदृश्य-मात्र की तरह है। यह हमें हमारी सीमितता और विनम्रता का अनुभव कराता है।
चर्चा के लिए प्रश्न
क्या बह पंक्ति हमारे अहंकार को समाप्त करने में सहायता करती है?
इस विशाल ब्रह्मांड सें मृत्रुप्य की भूमिका क्या है?
जब पृथ्वी इतनी छोटी है, तब भी मनुष्य अपने जीवन को इतना बड़ा क्यों समझता है?
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(ख) अर्थ और चर्चा
यहाँ कवि यह कह रहा है कि मनुष्य अनेक-संख्याहीन-कठिन और घुमाबदार दीवारें बनाता है। ‘शंख सी दीवारे’ का अर्थ है, जटिल, घुमाबदार और कठिनाई से पार पाने वाली दीबारें। ये दीवारें व्यक्तित्व, जाति, धर्म, मनोवृति और स्वार्थ की सीमाओं को निरूपित करण हैं। मनुष्य अपने अहंकार में इतना लीन हो जाता है कि वह स्वर्य को दूसरों का स्वामी समझने लगता है अर्थात् दूसरों पर निर्यंज्रण और प्रभुत्व की इच्छा रखता है।
चर्चा के लिए प्रश्न
- ये ‘दीवारे’ समाज में किस प्रकार की बाधाओं को दर्शाती हैं?
- मनुष्य क्यों दूसरों का स्वामी बनने की इच्छा रखता है?
- अहंकार और स्वार्थ से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है?
(ग) अर्थ और चर्चा
यह पंक्ति यह दर्शाती है कि मनुष्य सिर्फ बड़े स्तर पर ही नहीं, बल्कि इतने छोटे से स्थान जैसे एक कमरे के भीतर भी अपने विचारों, भावनाओं और मतभेदों के आधार पर दो बिल्कुल अलग दुनिया बना लेता है। यहाँ ‘दो दुनिया’ विरोध और असहमति के प्रतीक हैं। यह व्यंग्यात्मक रूप से बताता है कि मनुष्य में मतभेद और संघर्ष इतने प्रबल हैं कि वह सीमित स्थान में भी एकता नहीं बना पाता।
चर्चा के लिए प्रश्न
- मनुष्य के स्वभाव में ऐसा क्यों होता है कि वह छोटे-छोटे स्थान में भी असहर्मति उत्पन्न करता है?
- क्या यह पंक्ति सामाजिक, राष्ट्रीय या पारिवारिक विवादों के लिए भी लागू होती है?
- कैसे हम अपनी सोच और व्यवहार को व्यापक बना सकते हैं, ताकि ‘दो दुनिया’ न बने?
उपर्युक्त तीनों पंक्तियाँ मिलकर मनुष्य की सीमितता, उसके भीतर व्याप्त अहंकार, मतभेद और स्वार्थ के विधय में गहरी सोच प्रस्तुत करती हैं। समूह में इनका अर्थ समझकर आपस में विचार-विमर्श करने से मनुष्य की आकाक्षा और व्यवहार को बेहतर तरीके से जानने और समझने में सहायता मिलेगी।
मिलकर करें मिलान
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।

उत्तर :
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें | 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक | 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा | 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
| 4. दो व्यक्ति कमरे में/कमरे से छोटे | 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक |
| 5. परिधि नभ गंगा की | 1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता | 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति |
अनुपात
इस कविता में ‘मानब’ और ‘ब्रद्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।

उत्तर :
मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए आवश्यक गुण/मूल्य और चुने जाने के कारण
- सहअस्तित्व क्योंकि ब्रह्मांड में अनगिनत ग्रह और सृष्टियाँ एक साथ समायोजित और संतुलित रूप से विद्यमान हैं। वैसे ही मनुष्य को भी दूसरों के साथ मिल-जुलकर रहना सीखना चाहिए।
- विविधता क्योंकि ब्रह्मांड में विविध प्रह, जीव-जंतु और संस्कृतियाँ होती हैं। मानव में भी विविधता को अपनाना विस्तार और विकास की कुंजी है।
- संतुलन क्योंकि ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु अपने संतुलन और नियमों में बंधी होती है। मानव जीवन में भी संतुलित दृष्टिकोण अपनाने से समृद्धि और बिस्तार संभव होता है।
- समावेशिता क्योकि सभी मत, विचार, संस्कृतियाँ और ब्यक्तित्व स्वीकार करने से मनुष्य का व्यक्तित्व ब्यापक और बड़ी समझ वाला बनता है।
- स्वतंत्रता क्योंकि एक-दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान करने से ही स्वस्थ सामाजिक और मानसिक विस्तार संभव होता है।
- सहनशीलता क्योंकि विविधता और मतभेदों को स्वीकार कर मानसिक और सामाजिक विस्तार के लिए सहनशील होना आवश्यक है। इससे बिनाशकारी संघर्ष कम होते हैं।
- शांति क्योंकि आंतरिक और बाह्मा शांति से ही सामूहिक विकास, सकारात्मक ऊर्जा और सजीव विस्तार संभब हो पाता है।
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सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए
(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
उत्तर :
कबिता में बताया गया है कि मानब अपने अंदर व्याप्त नकारात्मक भावों; जैसे-ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास के कारण स्वयं को सीमाओं में बाँधता है। ये भाव मनुष्य को दूसरों से अलग-थलग करते हैं और बह अपने लिए भावनात्मक, सामाजिक और मानसिक दीवारें (जैसे शंख्ख-सी जटिल दीवारें) बनाकर स्वयं को सीमित कर लेता है। मनुष्य प्रत्येक परिस्थिति में स्वर्यं को दूसरों का स्वामी बताता है, जिससे संघर्ष और भेद बढ़ते हैं। इसलिए ये भाव तथा सोच उसके विस्तार और सौहार्द को रोकती है।
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर :
मेरी पसंदीदा पंक्ति होगी
‘यह है अनुपात आदमी का विराट से।’, क्योंकि यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि मनुष्य भौतिक रूप से ब्रह्मांड की तुलना में कितना छोटा है। यह सोच हमारे अहंकार को नियंत्रण में रखती है, हमें विनम्र बनाती है और प्रेरित करती है कि हम अपने छोटेपन को समझक्रक दूसरों के प्रति सहिष्णु और समझदार बनें। यह पंक्ति प्रत्येक दिन हमें आत्म-चितन और व्यापक सोच अपनाने की प्रेरणा देगी।
(ग) कवि ने मानब की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा- व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
उत्तर :
मेरे अनुसार, कबिता में चिंता और करुणा की भाबना प्रमुख है। कवि व्यंग्यात्मक तो है, क्योकि वे मानव व्यवहार की विरोधाभासपूर्ण और अहंकारी प्रवृत्तियों को दर्शति है, लेकिन उनका प्रयोजन आलोचना नहीं, बल्कि जागरूकता है। कविता में क्रोध नहीं, बल्कि एक प्रकार की दार्शनिक चिंतन और करुणा झलकती है, जो मानव की छोटी सोच और सीमितता को समझने तथा उसे बदलने के लिए प्रेरित करती है। यह चिंता मानवता के भविष्य और मनुष्य की आत्म-वोध क्षमता के लिए है।
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(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाता’ केवल इंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।
उत्तर :
‘दीवारें उदाता’ केवल भौतिक अर्थ में इंट-पत्थर से बनाई गई दीवारें नहीं है, बल्कि यह मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और सांस्कृतिक बाधाओं का प्रतीक है। मनुष्य अपने अहंकार, इर्ष्या, धार्मिक, जातीय और सांस्कृतिक भेदभाव के कारण असहयोग और कट्टरता की दीवारें खड़ा करता है। ये दीवारें लोगों के बीच समझ, प्रेम और एकता को रोकती हैं। उदाहरण के लिए, जब हम दूसरों को स्वीकार नहीं करते या उनके विचारों का सम्मान नहीं करते, तो हम अपने आप को और समाज को सीमित कर लेते हैं। इसलिए ‘दीवारें उठाता’ का अर्थ है अपने मन और समाज में दूरी और विभाजन पैदा करना।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्मुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ध्यां, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर :
सहिष्मुता और सहयोग के कारण समाज में कई सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, जिनके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए है
भारत का स्वतंश्रता संग्राम महात्मा गाँधी और अन्य नेताओं ने सहिण्णुता और सहयोग के माध्यम से समाज को संगठित किया। उनका अहिंसात्मक संघर्ष सभी वर्गों, धर्मों और समुदायों को एक साथ लेकर चला गया, जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध सफलता दिलाई।
विश्व में अनेक देशों में शांति समझौते युद्ध, विवादों और कट्टरता के अलावा सहिण्गुता और बातचीत से कई देशों ने शांति स्थापित की है, जिससे विकास और ख्रुशहाली आई है।
आधुनिक स्कूलों और सामाजिक संगठनों द्वारा समाज में सह-अस्तित्व की भावना का प्रसार जैसे बिभिन्न धर्मों और भाषाओं के बीच सहयोग से सामाजिक समरसता बढ़ी है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि सहिष्णुता, सहयोग और समर्पण से ही समाज में शांति, विकास और समृद्धि संभव होती है, जबकि नकारात्मक भावनाएँ केबल विघटन और संघर्ष उत्पन्न करती हैं।
अनुमान और कल्पना
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहंगे? क्यों?
उत्तर :
मैं मानब की निम्नलिखित आदतों को बदलना चाहुंगा
- ईष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास ये भाव मानव के बीच दूरी, संघर्ष और ब्दिधेष उत्पन्न करते हैं। इन्हें समाप्त करने से इंसान एक-दूसरे के प्रति अधिक सहिष्गु, प्रेमपूर्ण और सहयोगी बन सकेगा।
- अंधविश्वास और संकीर्णता सबसे बड़ी बाधा मानब के ज्ञान और विकास की है, इसे हटाकर लोगों को वैज्ञानिक और दार्शनिक सोच मिलेगी।
- पर्यावरण के प्रति लापरवाही इसान की अनेक आदतें प्रकृति को नुकसान पहुँचाती है, इसे बदलकर सतत विकास और संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा, क्योंकि ये आदते निरंतर संघर्ष, सामाजिक बिखराव और पृथ्वी के विनाश को बढ़ाबा देती हैं, जो व्रह्मांड की विशालता और सौदर्य के सामने मानव की छवि को धुँधला करती है।
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(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रहांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ, तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?
उत्तर :
यदि मैं दूसरे भाग में यात्री बन जाता हूँ, तो निम्न स्थानों को सबसे अधिक याद करूँगा
- घर और परिवार यह वह स्थान है, जहाँ हमें अपनापन, प्यार, सहारा और पहचान मिलती है।
- कमरा क्योंकि छोटे से कमरे में भी हमारी सबसे निजी यादें और सोच रहती हैं।
- मुहल्ला या नगर जहाँ हमें सामाजिक संपर्क, संस्कृति, भाषा और अपनत्व का अनुभब होता है।
क्योंकि इतने विशाल ब्रहांड में भी मनुष्य की जड़ों का लगाब, स्मृति और भावनात्मक संबंध उसे मनुष्य बनाते हैं। घर और परिबार की यादे उसकी अस्मिता और मानसिक शांति का स्रोत हैं।
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है- वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उत्तर :
कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत
बच्चा अपनी सीमाओं से मुक्त होकर पहली बार अपने कमरे की चार दीवारों को पार कर बाहर निकलता है। वह घर, मुहल्ला, नगर को देखकर चमल्कृत होता है। उसके बाद वह देश और पृथ्वी की सीमाओं को पार करता है। अब बह अंतरिक्ष की विशालता में उड़ता हुआ अनगिनत नक्षत्रों और लाखों ब्रह्मांडों के बीच अपनी यात्रा शुरू करता है। वह अनदेखी अनेक पृथ्वियों, बिभिन्न सृष्टियों और जीवन रूपों से मिलता है। हर जगह उसे एकता, विविधता और सौहार्द का अद्भुत दृश्य मिलता है। वह समझता है कि ये सारी सीमाएँ केवल मनुष्य के मन की बनी हैं, जिन्हें पार करके सब एक हैं।
(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए- ‘मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।’
उत्तर :
‘मैं ब्रह्मांड में एक … हैं।’
‘मै ब्रहांड में एक बहुत छोटे से कण जैसा हूँ। मेरे आकार और अस्तित्व की तुलना उस अनंत विश्रालता से नहीं की जा सकती, जहाँ अनगिनत नक्षत्र, ग्रह और ब्रह्मांड है। फिर भी, मेरे अंदर नकारात्मक भावों जैसे अहंकार और स्वार्थ की दीवारें हैं, जो मुझे सीमित करती है। इस कविता ने मुझे यह एहसास कराया हैं कि अगर मैं अपनी सीमाओं और स्वार्थ को छोड दुँ, तो मै ब्रह्मांड की उस विशालता और शांति का हिस्सा बन सकता हैं, जहाँ सबकुछ एक-दूसरे से जुड़ा और संतुलित है। मैं केवल एक छोटा हिस्सा हुँ, लेकिन मेरी सोच और व्यवहार उसे व्यापक बना सकते हैं।’
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर :
मैं निम्न लोगों को भेजना चाहूँगा
कोई ऐसा व्यक्ति जो नकारात्मक भावों से मुक्त होकर सहनशीलता, दयालुता और व्यापक सोच का उदाहरण हो।
ऐसा व्यक्ति जो मानवता और पृथ्वी के प्रति समर्पित हो और जो सभी प्रकार के मतभेदों को पार कर सामाजिक और विश्वसनीय संबंध बना सके।
शिक्षक, परोपकारी, बैज्ञानिक या कोई शांतिप्रिय नेता, जो ब्रह्मांड के व्यापक संदर्भ में मानव की भलाई के लिए काम कर सके, क्योंकि दूसरे संसार को ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होगी, जो न केवल अपने भीतर और समाज में शांति और संतुलन स्थापित कर सके, बल्कि ब्रह्मांडीय दृष्टिकोण से सोचकर सामंजस्य बिठाने में सक्षम हो।
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(च) कविता में ‘ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ’ जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ, तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर :
यदि एक दिन के लिए ये सभी भाव समाप्त हो जाएँ, तो समाज में निम्न परिवर्तन होंगे
- संघर्ष, द्वेष और विवाद समाप्त हो जाएँगे।
- सभी में आपसी समझ, प्रेम और सहयोग बढ़ेगा।
- लोगों के बीच जाति, धर्म, भाषा, देश की दीवारें टूट जाएँगी।
- सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हितसंबंधों में समानत्रा और न्याय की स्थापना होगी।
- वाताबरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण बेहतर होगा, क्योकि स्वार्थमुक्त व्यक्ति पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होंगे।
- मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, क्योंकि मानव मन नकारात्मक भावों से मुक्त होगा।
- इस परिवर्तन से समष्टि स्तर पर एक शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और उन्नत समाज का निर्माण होगा।
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो, जिसमें इसके मूल भाव-‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का श्रम’-दर्शाया जाए, तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर :
चित्र एवं प्रतीक
- एक विशाल ब्रह्मांड, जिसमें अनगिनत आकाशगंगाएँ, तारे और ग्रह हों।
- ब्रह्मांड के बीच में एक छोटी, नन्ही पृथ्वी का चित्रा
- पृथ्वी पर एक ब्यक्ति जो अपने आस-पास दीवारें (शंख्य की तरह घुमावदार) बना रहा हो।
- व्यक्ति के चारों ओर दो अलग-अलग रंगों में दिखाई गई ‘दुनिया’- जो अलगाव और मतभेद का प्रतीक हो।
- आकाश के भाग में किसी एक कमरे का समांतर चित्र जो बहुत छोटा हो, परंतु उसमें दो दुनिया हों।
शब्द
- मुख्य शीर्षक ‘आदमी का अनुपात-विराट में लघुता, मनुष्य का श्रम’
- साइड में एक छोटा उद्धरण: ‘इतनी विशालता के सामने भी क्यों बनाता है आदमी अपनी दीवारे?’
- या कबिता की एक प्रेरक पंक्ति जैसे: ‘यह है अनुपात आदमी का विराट से।’
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

उत्तर :
सुष्टि से जुड़े शब्द ब्रह्मांड, विश्व, संसार, प्रकृति, जीवन, उत्पत्ति।
सृजन
(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्यांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिकचित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए; जैसे-पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए- “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
उत्तर :
कमरे से लेकर ब्रहांड तक का विस्तार-मानसिक चित्रण (माइंड-मैप/सीढ़ी)
रेखाचित्र की संरचना
1. दो व्यक्ति
- विशेषता: एक-दूसरे के साथ संचार करते, भावनाएँ साझा करते।
- उदाहरण: अपनी छोटी-सी दुनिया में, घर के सदस्य।
2. कमरा
- विशेषता: निजी स्थान, सुरक्षा और आराम का प्रतीका
- उदाहरण: एक छोटा आरक्षित क्षेत्र जहाँ मानव रहते हैं।
3. घर
- विशेषता: परिवार, प्यार, अपनत्व का केंद्र।
- उदाहरण: घर के भीतर पारिवारिक संस्कार, बचपन की यादें।
4. मुहल्ला (पड़ोस)
- विशेषता: सामाजिक संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
- उदाहरण: पड्होसी जहाँ एक-दूसरे की सहायता होती है, त्योहार मनाए जाते है।
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5. नगर
- विशेषता: विविधता, ब्यापार, शिक्षा और सामाजिक गतिशीलता।
- उदाहरण: शहर के मंदिर, बाजार, स्कूल।
6. प्रदेश
- विशेषता: क्षेत्रीय संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज।
- उदाहरण: अलग-अलग भाषायी समुदाय, त्योहार और परंपराएँ।
7. देश
- विशेषता: राष्ट्रीय पहचान, विविधता में एकता।
- उदाहरण: कई प्रांतों, भाषाओं और संस्कृतियों का समावेश।
8. पृथ्वी
- विशेषता: जीवन का केंद्र, प्राकृतिक संसाधनों का घर।
- उदाहरण: महासागर, पर्वत, वन और सभी जीव-जंतु।
9. अनगिनत नक्षत्रों वाला बहाहांड
- विशेषता: विशाल, असीम, समय और स्थान का अंतहीन विस्तार।
- उदाहरण: तारे, ग्रह, आकाशगंगाएँ, अरबों ब्रह्यांड।
‘मैं इस चित्र में दो व्यक्ति के रूप में हुँ, जो अपने छोटे से कमरे में रहते हुए भी अपने विचारों और भावनाओं के विस्तार से ब्रह्मांड के संपूर्णता को समझने का प्रयास करता हूँ।’
(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो, जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
उत्तर :
कहानी ‘बहांड में मानव’ का आरंभ
‘एक छोटे से कमरे में बैठा बह इंसान, जो स्वयं को संसार का केंद्र समझता था, धीरे-धीरे समझने लगा कि उसके आसपास की छोटी दुनिया दरअसल ब्रह्मांड की विशालता के बीच एक नन्हा कण मात्र है। उसकी दृष्टि अब उस कमरे के बाहर, घर, नगर, देश और अंततः अनगिनत तारों के बीच फैलने लगी। यह कहानी है उस मानव की, जो अपने भीतर और बाहर के विशाल ब्रहांड को खोजता है।’
(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए, जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर :
‘मेरी बनाई हुई दुनिया में कोई दीवार नहीं होगी। यहाँ न कोई सीमा होगी न बँटवारा। लोग अपने रंग, संस्कार, विचार और भाषाओं में भिन्न अवश्य होंगे, लेकिन वह विविधता सामंजस्य और मेलजोल का स्रोत होगी। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता होगी अपने पूरे विश्वास और प्रेम के साथ जीने की। यहाँ ईर्ष्या, अहंकार और घृणा की कोई जगह नहीं होगी। इस दुनिया में सब मिलकर एक-दूसरे की सहायता करेगे और कठिनाइयों में साथ देंगे। प्रत्येक कोना खुला और स्वागत योग्य होगा, जिससे आपस में प्रेम और मित्रता के पुल बनेगे।’
(घ) एक चित्र श्रृंखला बनाइए, ज्ञिसमें ये क्रम दिखे-

प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
उत्तर :
हात्र स्वयं करे।
कविता की रचना
‘दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे-
इन पंक्तियों में चिह्न पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस चिह्न को पहले कहीं देखा है? इस चिह्न को ‘निदेशक चिह्न’ कहते हैं। यह एक प्रकार का विराम चिह्न है, जो किसी बात को आगे बढ़ाने या स्पष्ट करने के लिए उपयोग होता है। यह किसी विषय की अतिरिक्त जानकारी; जैसेव्याख्या, उदाहरण या उद्धरण देने के लिए उपयोग होता है।
इस कविता में इस चिह्न का प्रयोग एक ठहराव, सोच का संकेत और आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है। यह संकेत देता है कि अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है, जो पाठक को सोचने पर विवश करेगा।
इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं; जैसे-अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘मे’ है, बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं आदि।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर :
कविता की अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
- अनेक पंक्तियों का अंत ‘में’ शब्द से होना जिससे कविता में एक लयात्मकता और समानता बनी रहती है।
- पंक्तियाँ बहुत छोटी और सरल हैं जिससे अर्थ स्पष्ट और प्रभावशाली होता है।
- शब्दों और वाक्यों की पुनरुक्ति (दोहराब) जैसे ‘कमरा है घर में, घर है मुहल्ले मै… जो कविता को तारतम्य बनता है।
- प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग जैसे-‘संख्यातीत शंख-सी दीवारें।
- सोच-विचार पर मजबूर करने वाला विराम चिह्न (निदेशक चिह्न) का प्रयोग।
- व्यंग्यात्मक और चिंतनशील भाव मनुष्य की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर तीखा प्रहार।
- सरल और प्रभावी भाषा जो प्रत्येक आयु वर्ग के पाठक को समझ में आ सके।
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(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए

उत्तर :
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
| (क) सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | 4. कमरा है घर में |
| (ख) मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
| (ग) छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में…. |
| (घ) प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | 3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है |
| (ङ) अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है |
| (च) मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | 5. यह है अनुपात आदमी का विराट से |
कविता का सौंदर्य
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए। इन प्रश्नों से आप कविता का आनंद और अच्छी तरह से ले सकेंगे।

(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।
उत्तर :
कविता में ब्रह्मांड की विशालता व्यक्त करने के विभिन्न प्रकार
1. क्रमबद्ध बिस्तार छोटे से बड़े की शृंखला; जैसे-
- ‘दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे-कमरा है घर में, घर है मुहल्ले में…’
- इससे मनुष्य की छोटी स्थिति और ब्रह्मांड की विशालता का क्रमबद्ध बोध होता है।
2. संख्या की अभिवृद्धि और अस्पष्टता शब्द जैसे ‘अनगिन नक्षत्र’, ‘लाखों ब्रहांडों मे’, ‘करोड़ों में एक’,
- यह ब्रह्मांड के असीम फैलाव और अनंतता को दर्शाता है।
(ख) “संख्यातीत शंख-सी दीवारें उठाता है”
“अपने को दूजे का स्वामी बताता है”
‘एक कमरे में
दो दुनिया रचाता हैं
कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए। उत्तर छात्र स्वयं करें।
आपके शब्द
“सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की”
आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है।
आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।
उत्तर :
दो शब्द मिलाकर बने कुछ नए शब्दों के उदाहरण
1. जलधारा (जल + धारा) – पानी की बहती हुई धारा
2. सूर्यास्त (सूर्य + अस्त) – सूर्य का अस्त होना, सूर्यास्त
3. भूमिपुत्र (भूमि + पुत्र) – धरती का पुत्र, देशभक्त
4. राजपुत्र – राजा का पुत्र
5. तारामंडल (तारा + मंडल) – तारों का समूह, नक्षत्र समूह
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आपके प्रश्न

“हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टिया”
क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढने का प्रयास कीजिए।
उत्तर :
छात्र स्वर्य करें।
विशेषण और विशेष्य

‘पृथ्वी एक छोटी’
यहाँ ‘छोटी’ शब्द ‘पृथ्वी’ की विशेषता बता रहा है अर्थात् ‘छोटी’ ‘विशेषण’ है। ‘पृथ्वी’ एक संज्ञा शब्द है, जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् ‘पृथ्वी’ ‘विशेष्य’ शब्द है।
अब आप नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए

उत्तर

पाठ से आगे
आपकी बात

(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए, जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो- जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।
उत्तर :
जब हमें किसी काम को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता और काम का बोझ बहुत ज्यादा हो जाता है, तो वह अनुपात बिगड जाता है। उदाहरण के लिए, परीक्षा की तैयारी के लिए केवल एक दिन बचा हो और उस दिन बहुत सारे विषय पढ़ने हों, तो समय और काम के बीच संतुलन नहीं बन पाता।
इससे तनाव, असंतोष और काम की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इसी प्रकार, घर में जिम्मेदारियाँ और स्कूल का काम एकसाथ अधिक हो जाए, तो व्यस्तता और थकान बढ़ती है।
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(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘बिराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत-किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)
उत्तर :
मैं अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में विराटता निम्न तरीकों से ला सकता हैं
- सभी को उनका सम्मान करना/देना चाहे उनकी उम्र, जाति, धर्म या स्थिति जो भी हो।
- मद्वगार और सहयोगी बनना जैसे जरूरतमंद की सहायता करना, सभी की बात ध्यान से सुनना।
- विविधता को स्वीकारना और उसका सम्मान करना विभिन्न संस्कृतियों, बोलियों और विचारों को गले लगाना।
- झगड़े और मतभेदों को छोड़कर संबाद करना और मेल-जोल बड़ाना।
- पर्यावरण संरक्षण में भाग लेना, जिससे धरती सुरक्षित रहे।
- विद्यालय या मोहल्ले में समानता और दोस्ती के कार्यक्रम आयोजित करना जो भाईचारे को मजबूत करें।
(ग) ‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर :
यह पंक्ति हमें यह बताती है कि हमारी पृथ्वी कितनी अनमोल और अद्वितीय है, जो करोड़ों ग्रहों के बीच एकमात्र जीवन स्थल है। इससे मुझे अपने कर्त्तव्यों का एहसास होता है कि हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए मैं निम्न काम करूँगा
- प्लास्टिक का कम-से-कम उपयोग करूँगा।
- पौधे लगाऊँगा और पेड़ों की रक्षा करूँगा।
- पानी और बिजली की बचत करूँगा।
- कूड़ा-कचरा सही जगह डालूँगा और दोबारा उपयोग के लिए जागरूक रहूँगा।
- अपने परिवार और मित्रों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करूँगा।
(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे, ताकि आपमें ऐसा भाब न आए?
उत्तर :
मैं निम्न गुणों को विकसित करने का प्रयास करूँगा
- विनप्रता स्वयं को दूसरों से बड़ा न समझना।
- सहानुभूति दूसरों की परेशानियों और भावनाओं को समझना।
- सहिण्गुता मतभेदों को सहन करके सौहार्दपूर्ण ब्यवहार रखना।
- सहयोग भाबना दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना।
- स्वर्यं पर नियंत्रण अहंकार और स्वार्थ की प्रवृत्ति पर काबू पाना।
- समझदारी और संवाद समस्याओं का समाधान बातचीत से खोजना।
(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए, जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे-डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?
उत्तर :
तीन दीवारें, जो मैने स्वयं खड़ी की हैं
1. डर नए काम या अवसरों को लेकर डरना।
2. संदेह/अविश्वास अपने और दूसरों की क्षमताओं पर भरोसा न होना।
3. संकोच अपनी बात को खुलकर व्यक्त न कर पाना।
इन्हें तोड़ने की योजना
- डर को तोइने के लिए छोटे-होटे कदम लेकर अभ्यास और आत्मविश्वास बढ़ाऊँगा।
- विश्वास बढ़ाने के लिए अपनी उपलब्धियों को याद करुँगा और सकारात्मक सोच रखूँगा।
- संकोच दूर करने के लिए दोस्तों के बीच संबाद बढ़ाकर बोलने का अधिक प्रयास करूँगा।
समाज में ऐसी दीवारें
- जाति, धर्म, भाषा, वर्ग और आर्थिक भेद।
- पूर्वाग्रह, गलतफहमी और असहिष्णुता।
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इन्हें गिराने में सहायता
- सभी के साथ समान ब्यवहार करना और भेदभाव से बचना।
- शिक्षा और जागरूकता फैलाना कि विविधता में एकता ही समाज की शक्ति है।
- संवाद और सहयोग से मतभेद कम करना।
- समाज में भाईचारे और सहिण्गुता को बढ़ावा देना।
संख्यातीत शंख

“संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है”
शंख का अर्थ है-100 पद्म की संख्या।
नीचे भारतीय संख्या प्रणाली एक तालिका के रूप में दी गई है।

तालिका के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए

1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे पद्म कहते हैं?
2. महाशंख में कितने शुन्य होते हैं?
उत्तर :
महाशंख में 19 शून्य होते हैं?
3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?
उत्तर :
एक लाख में 100 हजार होते हैं?
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4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे होटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
उत्तर :
तालिका के अनुसार सबसे छोटी संख्या एक (इकाई) है और सबसे बड़ी संख्या महाशंख है।
5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
उत्तर :
दस करोड़ (108) और एक अरब (109) को जोड़ने पर 110,00,00,000 (एक अरब दस करोड़) आएगा।
आज की पहेली
पता लगाइए कि कौन-सा अंतरिक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा

उत्तर :
छात्र स्वयं करें।